ज़फर राशिद के चयन को सिर्फ एक खिलाड़ी की कामयाबी के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बारामुला के दूरदराज इलाकों से निकलकर राष्ट्रीय खेल मंच तक पहुंचने वाली नई खेल सोच की एक मिसाल माना जा रहा है। खास बात यह है कि ‘टीम वॉरियर्स ऑफ कश्मीर’ ने अपने मिशन के तौर पर ड्रग-फ्री कश्मीर का पैगाम सामने रखा है। ऐसे में गोवा में होने वाला यह प्रदर्शन खेल के साथ-साथ समाजी जागरूकता का भी जरिया बनेगा।
कश्मीर में पिछले कुछ अरसे से नौजवानों को नशे की लत से दूर रखने के लिए खेलों को एक अहम माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए टीम वॉरियर्स ऑफ कश्मीर राष्ट्रीय मंच पर मार्शल आर्ट्स के प्रदर्शन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि नौजवानों की असली ताकत उनकी मेहनत, अनुशासन और हुनर में है। खेल का मैदान उन्हें न सिर्फ अपनी काबिलियत दिखाने का मौका देता है, बल्कि जिंदगी में सही रास्ता चुनने का हौसला भी देता है।
ज़फर राशिद की अगुवाई में जेएंडके की टीम का गोवा जाना कुंजर और बारामुला के खेल प्रेमियों के लिए भी अहम है। एक स्थानीय खिलाड़ी का राष्ट्रीय स्तर पर टीम की कमान संभालना इस बात की तरफ इशारा करता है कि अगर गांव और कस्बों के नौजवानों को बेहतर मौके और सही रहनुमाई मिले तो वे बड़े मंचों पर जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन कर सकते हैं।
लंगड़ी स्पोर्ट्स गेम्स के राष्ट्रीय मंच पर जम्मू-कश्मीर की टीम का प्रतिनिधित्व अपने आप में एक अहम अवसर है। यहां खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ-साथ दूसरे राज्यों से आने वाले खिलाड़ियों के साथ अनुभव साझा करने का मौका मिलेगा। डेमोंस्ट्रेशन मार्शल आर्ट्स के जरिए टीम अपनी फिटनेस, अनुशासन और तकनीकी हुनर का प्रदर्शन करेगी।
ज़फर राशिद की यह उपलब्धि खास तौर पर उन नौजवानों के लिए एक पैगाम है जो अपने हुनर को सही दिशा देना चाहते हैं। खेल सिर्फ मेडल जीतने का जरिया नहीं, बल्कि एक बेहतर समाज की तामीर में भी अहम किरदार अदा कर सकता है। मैदान से निकलने वाला सकारात्मक पैगाम अक्सर समाज में दूर तक असर छोड़ता है।
‘ड्रग-फ्री कश्मीर’ का मिशन लेकर गोवा पहुंचने वाली टीम वॉरियर्स ऑफ कश्मीर अब राष्ट्रीय मंच पर यह बताने की कोशिश करेगी कि कश्मीर का नौजवान मेहनत, खेल और कामयाबी का रास्ता चुन सकता है। ज़फर राशिद की अगुवाई में बारामुला की यह टीम अगर अपने मकसद में कामयाब रहती है तो यह सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं, बल्कि कश्मीर की नई नस्ल के लिए उम्मीद और हौसले का पैगाम भी होगा।


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