कश्मीर के एक ख़ानदान के दो भाइयों की मौत—जो दो दहाइयों से ज़्यादा वक़्फ़े में हुई—बिला शक बेहद दर्दनाक है। ऐसे नुक़सान की हर दास्तान हमदर्दी, एहतियात और हक़ीक़त से वाबस्तगी की मुतालिबा करती है। लेकिन जब शख़्सी ग़म को इस तरह पेश किया जाए कि बिना ठोस सबूत के किसी निज़ामी मंसूबे का इशारा मिले, तो ये एक पेचीदा हक़ीक़त को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का ख़तरा पैदा करता है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में मुग़ल ख़ानदान की कहानी को इसी अंदाज़ में पेश किया गया, जहां एक मज़बूत इंसानी कहानी को एक तंग नज़रिये से दिखाया गया और कश्मीर के तनाज़े के…
29 अप्रैल 2026 को पहाड़ी इलाक़ा चौकीबाल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का गवाह बना, जब लगातार बारिश के कारण एक पारंपरिक ढोक अचानक गिर गया। ऐसे हादसे दूर-दराज़ इलाकों में नए नहीं हैं, मगर हर बार ये कमजोर तबकों को गहरी चोट पहुंचाते हैं। इस मौके पर भारतीय सेना की फुर्तीली और इंसानी हमदर्दी से भरी कार्रवाई ने हालात को संभाल लिया, और सबसे बड़ी राहत यह रही कि किसी इंसानी जान का नुकसान नहीं हुआ। सुबह तक़रीबन 0830 बजे एक स्थानीय शख़्स ने खबर दी कि बारिश की वजह से एक ढोक ढह गया है। ढोक, गुज्जर और बकरवाल बिरादरी के लोग इस्तेमाल करते हैं—ये मौसमी ठिकाने होते ह…
कश्मीर के पुरसुकून इलाक़ा छोटीपोरा में भारतीय सेना की जानिब से एक अहम और क़ाबिले-तारीफ़ पहल देखने को मिली, जहां तलबा के लिए Essay Writing और Quiz मुक़ाबलों का एहतिमाम किया गया। इस इवेंट ने मक़ामी नौजवानों को न सिर्फ़ अपनी सलाहियत दिखाने का मौक़ा दिया, बल्कि उनके अंदर तालीम, एत्माद और क़ौमी यकजहती का जज़्बा भी मज़बूत किया। इस प्रोग्राम में स्कूलों और कॉलेजों से बड़ी तादाद में तलबा ने हिस्सा लिया। बच्चों ने मुल्की उसूलों, अपने करियर के ख़्वाब, समाजी ज़िम्मेदारियों और कश्मीर के बेहतर मुस्तक़बिल जैसे मौज़ूआत पर अपने ख़यालात बड़े एत्माद के साथ पेश …
पाकिस्तान में जारी ताज़ा हालात के दरमियान एक बार फिर मुल्क की फ़ौज पर संगीन इल्ज़ामात सामने आए हैं। मशहूर जर्नलिस्ट इमरान रियाज़ ख़ान के मुताबिक़, जहां दुनिया के दूसरे मुल्क जंग जैसे मुश्किल वक़्त में अपनी आवाम को राहत देने की कोशिश करते हैं, वहीं पाकिस्तान की फ़ौज ने इस हालात को मुनाफ़ा कमाने का ज़रिया बना लिया है। रिपोर्ट्स इशारा करती हैं कि मौजूदा तनाज़े के दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री ने माली तौर पर सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाया है। दूसरी तरफ़, आम पाकिस्तानी शहरी—जो पहले ही महंगाई, बेरोज़गारी और बुनियादी सहूलतों की कमी से जूझ रहा है—उस पर टैक्स…
यात्री रेलवे काउंटरों पर या IRCTC की वेबसाइट के माध्यम से अपने टिकट बुक कर सकते हैं। जम्मू, 30 अप्रैल : दशकों के लंबे इंतजार को समाप्त करते हुए एक ऐतिहासिक क्षण में, जम्मू-कश्मीर की दो राजधानियां कल (30 अप्रैल, 2026) से श्रीनगर-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस का जम्मू तक विस्तार होने के साथ ही ट्रेन के माध्यम से भी सीधे जुड़ जाएंगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव गुरुवार, 30 अप्रैल, 2026 को जम्मू तवी रेलवे स्टेशन से विस्तारित श्रीनगर-कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कार्यालय में केंद्रीय राज्य…
श्रीनगर — वादी-ए-कश्मीर में अमन, यकजहती और भरोसे की फ़ज़ा को मज़बूत करने की दिशा में भारतीय सेना का “मुख़ालमा 2.0” प्रोग्राम एक अहम क़दम बनकर उभर रहा है। इस पहल के ज़रिये कश्मीरी नौजवानों को एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म दिया जा रहा है जहाँ वो खुलकर अपनी बात रख सकें, अपने खयालात साझा कर सकें और एक बेहतर, पुर-अमन मुस्तक़बिल की तामीर में हिस्सा ले सकें। “मुख़ालमा 2.0” का बुनियादी मक़सद गुफ़्तगू के ज़रिये फासलों को कम करना और दिलों को जोड़ना है। इस प्रोग्राम में नौजवानों और सुरक्षा बलों के दरमियान सीधी बातचीत को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आपसी एतमाद (trus…
इस्लामाबाद/बहावलपुर — पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया के सामने अपने असली चेहरे के साथ बेनक़ाब होता नज़र आ रहा है। अमेरिकी तौर पर नामज़द दहशतगर्द इंजीनियर हरीस डार ने खुलेआम ये दावा किया है कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) बहावलपुर में और ज़्यादा नौजवानों को भर्ती कर उन्हें ट्रेनिंग देगा। हैरत की बात ये है कि इस ख़तरनाक मंसूबे को पाकिस्तान के मौजूदा संकट का “इकलौता हल” बताया जा रहा है। हरीस डार का ये बयान ना सिर्फ़ पाकिस्तान में सक्रिय दहशतगर्द तंजीमों की बढ़ती पकड़ को ज़ाहिर करता है, बल्कि ये भी दिखाता है कि किस तरह ये मुल्क आतंकवाद को एक औज़ार के तौर पर इस…
कश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों में, जहाँ पहाड़ों की बुलंदी के साथ नौजवानों के ख़्वाब भी परवान चढ़ते हैं, वहीं कुछ ऐसी प्रेरणादायक कहानियाँ जन्म लेती हैं जो पूरी वादी के लिए फ़ख्र का सबब बन जाती हैं। ऐसी ही एक शानदार मिसाल हैं आर्मी गुडविल स्कूल (AGS) बांदीपोरा के होनहार, मेहनती और बा-सलाहियत छात्र मोहम्मद अज़हर रादर, जिन्होंने एथलेटिक्स और रग्बी के मैदान में अपनी शानदार कारगुज़ारी से न सिर्फ़ अपने स्कूल बल्कि पूरे कश्मीर का सर फ़ख्र से बुलंद कर दिया है। अपनी सख़्त मेहनत, बे-मिसाल डिसिप्लिन और खेलों के लिए जुनून के बलबूते अज़हर आज वादी के उभरते ह…
बारामुला के आउडूरा इलाके से एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहाँ भारतीय सेना की जानिब से तैयार किया गया नया पुल मक़ामी अवाम के लिए बड़ी सहूलियत बनकर उभरा है। इस पुल के इफ्तिताह के बाद इलाके के कई गांवों में रहने वाले करीब दो हज़ार लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में साफ़ तौर पर बदलाव महसूस किया जा रहा है, खासकर तलबा, किसानों और बुज़ुर्गों के लिए यह एक अहम सहारा साबित हो रहा है। मक़ामी लोगों के मुताबिक़, पहले जो पुल मौजूद था, वो तक़रीबन आधा किलोमीटर दूर था, जिसकी वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों और खेतों की तरफ़ जाने वाले किसानों को लंबा रास्ता तय करना…
खैबर पख्तूनख्वा से सामने आ रही रिपोर्ट्स ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहाँ कुछ मक़ामी हल्कों में यह इल्ज़ाम लगाया जा रहा है कि मज़हबी इदारों और इबादतगाहों के पर्दे में ऐसी सरगर्मियाँ चल रही हैं, जो नौजवानों की सोच को एक खास दिशा में मोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इन खबरों ने न सिर्फ़ इलाके में बेचैनी बढ़ाई है, बल्कि रियासती इदारों की भूमिका और उनकी ख़ामोशी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मक़ामी ज़राए के मुताबिक़, कुछ जगहों पर बड़े पैमाने पर जमा होने वाले इज्तिमा (gatherings) हो रहे हैं, जहाँ दीन के नाम पर ऐसे बयानात दिए जा रहे हैं, जिनसे कट…

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