गिलगित-बाल्टिस्तान की बुलंद और संगीन पहाड़ियां बरसों से वहां के अवाम की चीख़ों की गवाह रही हैं, लेकिन आज ये आवाज़ें बगावत की गूंज में तब्दील हो चुकी हैं। हालिया दिनों में एहतिजाज (प्रदर्शनों) के दौरान शिया बच्चों और नौजवानों — जो इस इलाके का मुस्तकबिल (भविष्य) हैं — की मौत ने फौजी निज़ाम के चेहरे से नक़ाब उतार दिया है। गिलगित की गलियों से लेकर मुज़फ्फराबाद के कस्बों तक अब सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि कब्ज़े वाली ताकत के खिलाफ खुला इंकार सुनाई दे रहा है। बेगुनाह शहरीयों पर गोलियां चला कर पाकिस्तान आर्मी ने सिर्फ आवाज़ें दबाने की कोशिश नहीं की, बल…
गुलमर्ग के सनशाइन पीक इलाके में एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन उस वक़्त अंजाम दिया गया, जब एक सिविल हेलिकॉप्टर में टेक्निकल खराबी आने की वजह से 24 सैलानी ऊँचाई वाले इलाके में फँस गए। इस मुश्किल घड़ी में भारतीय फ़ौज के चिनार वॉरियर्स, बारामुला एडमिनिस्ट्रेशन, गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर फ़ौरन राहत और बचाव कार्रवाई शुरू की और तमाम सैलानियों को महफ़ूज़ तरीके से नीचे लाया गया। यह वाक़या गुलमर्ग के मशहूर सनशाइन पीक इलाके में पेश आया, जो अपनी खूबसूरती और एडवेंचर टूरिज्म के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। बताया गया कि कश्…
उत्तर कश्मीर में इंसानी ख़िदमत की नई मिसाल क़ायम करते हुए भारतीय सेना की चिनार कोर ने “डैगर डेंटाथॉन” नामी एक महीने लंबा डेंटल हेल्थकेयर मुहिम कामयाबी से मुकम्मल किया। ऑपरेशन सद्भावना के तहत चलाए गए इस ख़ास अभियान का मक़सद दूर-दराज़ और मेडिकल सहूलियतों से महरूम इलाकों तक बेहतर दांतों का इलाज और सेहत से जुड़ी जागरूकता पहुंचाना था। इस पहल ने कश्मीर के अवाम के दिलों में भरोसा, अपनापन और इंसानियत का पैगाम मज़बूत किया। इस मुहिम के दौरान भारतीय सेना की मेडिकल टीमों ने उत्तर कश्मीर के कई गांवों, स्कूलों और कम्युनिटी सेंटरों में जाकर मुफ़्त डेंटल चेकअ…
खैबर पख्तूनख्वा के हंगू इलाके से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ पाकिस्तानी फ़ौज की कार्रवाई में पाँच मासूम बच्चों समेत छह बेगुनाह नागरिकों की जान चली गई, जबकि ग्यारह अफ़राद ज़ख्मी बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक़ यह ऑपरेशन कथित तौर पर आतंकियों के खिलाफ़ किया गया था, मगर एक बार फिर पाक फ़ौज की गोलियों का निशाना आम अवाम बनी। इलाके के चश्मदीदों का कहना है कि फ़ौजी कार्रवाई के दौरान रिहायशी मकानों पर अंधाधुंध फ़ायरिंग और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे मासूम बच्चे और बेगुनाह लोग मलबे के नीचे दब गए। …
उत्तर कश्मीर की वादियों में जब भी बर्फ़ पिघलती है, तो उसके साथ लोगों की उम्मीदें भी नई रौशनी लेकर जाग उठती हैं। इन पहाड़ी इलाक़ों में ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं रही। दूर-दराज़ गांव, कम मेडिकल सहूलियतें, मुश्किल रास्ते और सख़्त मौसम—ये सब आम लोगों, ख़ासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए बड़ी चुनौती बनते रहे हैं। लेकिन ऐसे हालात में अगर कोई संस्था लगातार लोगों के साथ खड़ी नज़र आती है, तो वह है भारतीय सेना जिसे कश्मीर में कई लोग “ज़िंदगी की लाइफ़ लाइन” भी कहते हैं। इसी इंसानी ख़िदमत और भरोसे की एक और मिसाल हाल ही में उत्तर कश्मीर में देखने को मिली, जब च…
पाकिस्तान में मज़हबी हलकों के अंदर अब एक नई बहस शुरू होती नज़र आ रही है जनाब। मशहूर दीनि रहनुमा मौलाना फ़ज़लुर रहमान ने मौलाना इदरीस की फ़ातिहा के दौरान बड़ी साफ़गोई से कहा कि पाकिस्तान के अंदर हथियार उठाना और ख़ून-ख़राबा करना शरीअत के मुताबिक़ हराम और ग़ैर-क़ानूनी है। उन्होंने कहा कि तमाम उलमा इस बात पर मुत्तफ़िक़ हैं कि बेगुनाह लोगों पर हमला करना इस्लाम की तालीमात के खिलाफ़ है। मौलाना ने उन अफ़राद और तंजीमों पर भी सख़्त नाराज़गी ज़ाहिर की जो खुद को “मुजाहिदीन” कहकर मज़हब का नाम इस्तेमाल करते हुए हिंसा फैला रहे हैं। उनका कहना था कि इस्लाम रह…
कश्मीर की खूबसूरत वादियों में जहां एक तरफ़ प्राकृतिक हुस्न लोगों को अपनी तरफ़ खींचता है, वहीं दूसरी तरफ़ भारतीय सेना लगातार अमन, तरक़्क़ी और कौमी यकजहती को मज़बूत करने के लिए अहम कदम उठा रही है। “विकसित कश्मीर” के विज़न को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना सिर्फ सरहदों की हिफाज़त तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर तबके, ख़ासकर नौजवान नस्ल के बेहतर मुस्तकबिल के लिए भी लगातार काम कर रही है। इसी सिलसिले में भारतीय सेना द्वारा कुपवाड़ा जिले के विलगाम इलाके में स्कूल बच्चों के लिए “नेशनल इंटीग्रेशन” यानी राष्ट्रीय एकता के मौज़ू पर एक शानदार पेंटिंग प्रतिय…
भारतीय फ़ौज की जानिब से कुपवाड़ा के विलगाम इलाक़े में “कौमी यकजहती” राष्ट्रीय एकीकरण पर एक शानदार पेंटिंग मुकाबला मुनअक़िद किया गया, जिसमें 73 स्कूल बच्चों ने बड़े जोश-ओ-ख़रोश के साथ हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी रंग-बिरंगी पेंटिंग्स के ज़रिए “अनेकता में एकता” और मुल्क से मोहब्बत का खूबसूरत पैग़ाम पेश किया। इस मुकाबले का मक़सद नौजवान नस्ल के अंदर वतनपरस्ती, भाईचारा और एकता का जज़्बा मज़बूत करना था। भारतीय सेना ने बच्चों की तख़लीकी सलाहियत को बढ़ावा देते हुए उन्हें यह एहसास दिलाया कि कश्मीर की नई नस्ल मुल्क की तरक़्क़ी और अमन की असली ताक़त है। …
कश्मीर जैसा इलाक़ा दक्षिण एशिया में शायद ही कोई दूसरा हो, जो इतने फ़ितरी तौर पर तुलना की दावत देता हो। तारीख़ ने इसे दो हिस्सों में तक़सीम ज़रूर कर दिया, मगर ज़मीन, तहज़ीब और मौसम आज भी दोनों जानिब के लोगों को एक दूसरे से जोड़ते हैं। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के ज़बरदस्ती क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की सूरत-ए-हाल इस बात का वाज़ेह मुताला पेश करती है कि हुकूमती निज़ाम और इंतिज़ामी ढांचा किसी इलाके की तरक़्क़ी पर कितना गहरा असर डालते हैं। दोनों हिस्सों को कुदरती मुश्किलात और स्ट्रैटेजिक अहमियत जैसी मिलती-जुलती चुनौतियों का सामना रहा, लेकिन ग…
हिमालय की दुश्वार और संगीन वादियों में, जहाँ जुग़राफ़िया हमेशा से ज़िंदगी की रफ़्तार तय करता आया है, वहाँ राब्ता सिर्फ़ सहूलत का मसला नहीं बल्कि मआशी मौक़ों, समाजी यकजहती और इस्तिहकामी मजबूती का बुनियादी ज़रिया है। जम्मू व कश्मीर और लद्दाख जैसे इलाक़ों में सख़्त सर्दियाँ, भारी बर्फ़बारी और बार-बार आने वाले लैंडस्लाइड्स ने बरसों तक सड़क राब्तों को मुतास्सिर रखा, जिसकी वजह से कई आबादियाँ महीनों तक दुनिया से कटी रहती थीं। ऐसे माहौल में ट्विन ट्यूब टनल सिस्टम — जिसमें 12.85 किलोमीटर लंबी सुधमहादेव–ड्रंगा टनल और 38.61 किलोमीटर लंबी सिंहपोरा–वैलू टन…

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