तरक़्क़ी पर चलने वाली हुकूमत और ज़ोर-ज़बरदस्ती पर टिकी कंट्रोल की सियासत का फ़र्क़ अब सिर्फ़ किताबों की बात नहीं रहा—ये ज़मीन पर साफ़, नज़र आने वाला और नापने लायक़ हक़ीक़त बन चुका है। ये फर्क सबसे ज़्यादा जम्मू-कश्मीर और लाइन ऑफ़ कंट्रोल के उस पार के इलाक़ों में दिखाई देता है। एक तरफ़ वो निज़ाम है जो मज़बूत इदारे (इंस्टीट्यूशन्स), बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और इकॉनॉमिक इंटीग्रेशन पर खड़ा है। दूसरी तरफ़ वो कहानी है जो सिर्फ़ बयानों और दावों पर टिकी है, जहां “तरक़्क़ी” के दावे बुनियादी जांच में भी टिक नहीं पाते। भारत का तरीका मुनज़्ज़म (systematic),…
हालिया सालों में कश्मीर में एक आहिस्ता मगर मायनेख़ेज़ तब्दीली देखने को मिली है—अमन, तरक़्क़ी और नौजवानों की शिरकत की तरफ बढ़ता हुआ रुझान। इस तब्दीली के दरमियान गुफ़्तगू, शमूलियत और इख़्तियार देने (empowerment) पर खास ज़ोर दिया जा रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, भारतीय सेना लगातार ऐसी पहल कर रही है जो स्थानीय नौजवानों के साथ राब्ता मज़बूत करे। 04 मई 2026 को जीडीसी विमेन्स कॉलेज, पुलवामा में मुनअक़िद “वालिव कथ – बात कराव” ओपन माइक प्रोग्राम इसी की एक बेहतरीन मिसाल है, जिसने भरोसे, समझदारी और एक रोशन कश्मीर की तसव्वुर को मज़बूती दी। इस प्र…
इस चैंपियनशिप में पुरुषों और महिलाओं दोनों वर्गों में प्रतियोगिताएं होंगी, जो श्रीनगर के एक इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित की जाएंगी। श्रीनगर में अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय वुशु चैंपियनशिप (पुरुष और महिला) चल रही है, जिसमें देश भर के विश्वविद्यालयों की भागीदारी है और यह विश्वविद्यालय स्तर पर इस खेल की बढ़ती लोकप्रियता को उजागर करती है। कश्मीर विश्वविद्यालय द्वारा मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, यह चैंपियनशिप नई दिल्ली स्थित भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) के तत्वावधान में कश्मीर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित की जा रही है। सोमवार …
पुलवामा की सरज़मीन से एक बार फिर उम्मीद और रोशनी की किरण उभरी है, जहाँ भारतीय सेना ने “वालिव कथ–बात कराव” के नाम से एक खुला डायलॉग प्रोग्राम जीडीसी वीमेंस कॉलेज पुलवामा में मुनअक़िद किया। यह सिर्फ़ एक प्रोग्राम नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने और भरोसे को मज़बूत करने की एक सच्ची कोशिश नज़र आई, जिसमें कश्मीरी नौजवान—ख़ासकर ख़वातीन—ने पूरे एतमाद के साथ हिस्सा लिया। इस ओपन माइक गुफ़्तगू में लड़कियों ने बिना किसी झिझक के अपने मसाइल, अपने ख़्वाब और अपने सवालात पेश किए। अमन-ओ-अमान, तालीम, करियर के मौक़े और नौजवानों की समाज के प्रति ज़िम्मेदारी जैसे अहम …
दुनिया भर में एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर बहस तेज़ हो गई है। ताज़ा इल्ज़ामात के मुताबिक, पाकिस्तान पर यह संगीन आरोप लग रहे हैं कि वहां कुछ हलकों में आम नागरिकों, खासकर नौजवानों को तालीम और रोज़गार के मौके देने के बजाय उन्हें दहशतगर्दी के रास्ते पर धकेला जा रहा है। रिपोर्ट्स और विश्लेषणों में दावा किया गया है कि कुछ इलाकों में युवाओं को इस तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है, जो उन्हें समाज के लिए खतरनाक बना सकती है। कहा जा रहा है कि जहां एक तरफ दुनिया के दूसरे मुल्क अपने नौजवानों को एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और स्किल्स की तरफ बढ़ावा दे रहे हैं, …
पख़्तून और बलोच बहुल इलाक़ों से आती रिपोर्ट्स में हुक़ूक़-ए-इंसानी की ख़िलाफ़वर्ज़ियों को लेकर तश्वीश बढ़ती जा रही है। मुख़्तलिफ़ विश्वसनीय रिपोर्ट्स और गवाहियों के मुताबिक़, इन इलाक़ों में जबरन ग़ायब कर दिए जाने (एन्फोर्स्ड डिसअपियरेंसेज़), बिना अदालती कार्रवाई के सख़्त क़दम (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल ऐक्शन्स) और सामूहिक सज़ाओं जैसे वाक़ियात सामने आए हैं, जिनसे अवाम में ख़ौफ़ और बे-एतिमादी का माहौल गहरा हो गया है। मक़ामी लोगों का कहना है कि कई नौजवानों को बिना किसी वाज़ेह इल्ज़ाम के उठा लिया जाता है, और उनके अहल-ए-ख़ाना महीनों—बल्कि सालों—तक उनकी…
हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर के नाम पर जंग के दावों ने पाकिस्तान की दहशतगर्दी-रोधी पॉलिसी पर फिर से बहस छेड़ दी, इस्लामाबाद से आने वाली सियासी बयानबाज़ी ने एक बार फिर पाकिस्तान की फ़ौज और इंतिहापसंद तंज़ीमों के दरमियान कथित रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक पाकिस्तानी सियासतदान के हवाले से सामने आए बयान—जिसमें फ़ौज के हाफ़िज़ सईद और मौलाना मसूद अज़हर जैसे शख़्सियतों के लिए लड़ने का दावा किया गया—ने आलमी सतह पर फिक्र को और गहरा कर दिया है। माहिरीन का कहना है कि अगर ये इल्ज़ामात सच साबित होते हैं, तो ये न सिर्फ़ पाकिस्तान की दहशतगर्दी के खिलाफ…
कुपवाड़ा ज़िले के दूरदराज़ और पहाड़ी इलाक़े माहू वैली में, जहाँ ज़िंदगी अब भी पहाड़ों की सख़्ती और सीमित सहूलियतों के साथ गुज़रती है, वहाँ से एक ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने पूरे इलाके की सोच और उम्मीदों को एक नई रौशनी दी है। अरबाज़ नाम के एक नौजवान तालीब-ए-इल्म ने मुल्क के सबसे मुश्किल इम्तिहानों में से एक, जेईई मेन , कामयाबी से पास कर लिया है—और यूँ वो इस वादी के पहले ऐसे छात्र बन गए हैं जिन्होंने ये मुकाम हासिल किया। जहाँ आम तौर पर जेईई मेन पास करना एक फर्दी (individual) कामयाबी मानी जाती है, वहीं अरबाज़ की ये कामयाबी सिर्फ़ उनकी अपनी नहीं, ब…
दशकों से, संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों की अक्सर एक ही पहचान रही है—अस्थिरता, अनिश्चितता और सीमित आर्थिक अवसरों से बनी पहचान। फिर भी, इतिहास ने दिखाया है कि लगातार प्रयासों, रणनीतिक योजना और सामुदायिक भागीदारी से, ऐसे क्षेत्र अपनी कहानी फिर से लिख सकते हैं। संघर्ष से प्रभावित एक पहाड़ी क्षेत्र का, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त स्की डेस्टिनेशन में बदलना, ऐसी ही एक सशक्त कहानी है। यह केवल पर्यटन के बारे में नहीं है; यह जुझारूपन, सुशासन और अर्थव्यवस्था के जान-बूझकर किए गए पुनर्निर्माण के बारे में है। इस बदलाव के मूल में सरकार का एक दीर्घकालिक दृ…
पिर पंजाल की बुलंद पहाड़ियों में बसा हुआ गुलमर्ग आज सिर्फ़ एक खूबसूरत सैरगाह नहीं रहा, बल्कि साउथ एशिया की एक ऐसी मिसाल बन चुका है जहाँ तब्दीली, तामीर और तरक़्क़ी एक साथ नज़र आती है। अपनी बर्फ़ से ढकी ढलानों, हसीन वादियों और वर्ल्ड-क्लास विंटर स्पोर्ट्स की सलाहियत के साथ, जम्मू व कश्मीर का ये नगीना अब आहिस्ता-आहिस्ता दुनिया के टूरिज़्म नक़्शे पर अपनी मज़बूत पहचान बना रहा है। एक वक़्त था जब गुलमर्ग को ज़्यादातर तनाज़े और नाज़ुक हालात के आईने में देखा जाता था। मगर आज वही इलाक़ा एशिया का प्रीमियर स्कीइंग हब बनने की राह पर है — जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर…

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