बांदीपोरा, 19 अप्रैल: कश्मीर के सख़्त मौसम और बर्फ़बारी के दरमियान एक बार फिर भारतीय सेना ने अपने फ़र्ज़ और इंसानियत का बेहतरीन नमूना पेश किया। बांदीपोरा–गुरेज़ सड़क, जो ताज़ा बर्फ़बारी के बाद मुकम्मल तौर पर बंद हो गई थी, वहां फंसी करीब 50 गाड़ियों को एक मुश्तरका रेस्क्यू ऑपरेशन के ज़रिये महफ़ूज़ बाहर निकाला गया। इस राहत मुहिम में बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO), बांदीपोरा पुलिस और भारतीय सेना ने मिलकर जिस तरह तालमेल के साथ काम किया, उसने कई ज़िंदगियों को ख़तरे से बचा लिया। ख़ास तौर पर रज़दान टॉप के इलाक़े में बर्फ़ के भारी जमाव की वजह से हाला…
इस वक़्त पाकिस्तान में हालात कुछ ऐसे बन चुके हैं कि हक़ और इंसाफ़ की बात करना भी जैसे जुर्म बन गया हो। शहबाज़–आसिम निज़ाम के साये तले मुल्क के नौजवान एक अजीब सी घुटन महसूस कर रहे हैं—जहां उनकी आवाज़ को दबाने के लिए हर मुमकिन हथकंडा अपनाया जा रहा है। रिपोर्ट्स और ज़मीनी हालात ये इशारा कर रहे हैं कि पाकिस्तान में फ़ौजी असर-ओ-रसूख अब सिर्फ़ सियासत तक महदूद नहीं रहा, बल्कि अवाम की रोज़मर्रा ज़िंदगी और उनकी आज़ादी-ए-इज़हार तक को अपनी गिरफ़्त में ले चुका है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, हर जगह निगरानी का ऐसा निज़ाम क़ायम है जहां सच बोलना, सवाल उठा…
जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा के नूरपोरा कस्बे में, जो अपनी शांत लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पहचान के लिए जाना जाता है, साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी कहानी आकार ले रही है, जिसे घाटी से कहीं दूर तक सुना जाना चाहिए। यह कहानी है नुसरत रसूल की—एक ऐसी युवा महिला की, जिसने परिस्थितियों को अपनी सीमाएं तय करने नहीं दीं, बल्कि उन्हें अपनी सफलता की सीढ़ियां बना लिया। नुसरत रसूल सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि दृढ़ता का प्रतीक हैं। जिस समय बहुत से लोग जीवन में एक ही दिशा को संतुलित करने में संघर्ष करते हैं, उन्होंने शिक्षा, पेशा और खेल—इन तीनों क्षेत्रों…
दूरदराज़ और संवेदनशील क्षेत्रों में, जहाँ बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच एक लगातार बनी रहने वाली चुनौती है, समय पर चिकितकीय हस्तक्षेप जीवनरक्षक साबित हो सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, भारतीय सेना ने हाल ही में एक दूरस्थ गांव में व्यापक स्वास्थ्य आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसके माध्यम से वंचित ग्रामीणों तक आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाई गईं। इस पहल का नेतृत्व रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर (RMO) और नर्सिंग असिस्टेंट (NA) टीम ने किया, जिन्होंने पूरे गांव में घर-घर जाकर लोगों का स्व…
17 अप्रैल 2026 की तड़के सुबह, लगभग 3:30 बजे, भारतीय सेना ने सतर्कता और त्वरित प्रतिक्रिया का परिचय देते हुए एक संभावित बड़े हादसे को टाल दिया, जब हकनार गांव के फामदपट्टी मोहल्ला में अचानक आग लग गई। यदि समय रहते कार्रवाई न होती, तो यह घटना गंभीर त्रासदी का रूप ले सकती थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग ने स्थानीय निवासी शबीर अहमद कसाना के रिहायशी घर और उससे सटे गौशाला को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने से संपत्ति और पशु आश्रय को काफी नुकसान पहुंचा, जिससे आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। क्षेत्र में घरों की सघन बसावट के कारण आग के तेजी से फ…
हर वर्ष 18 अप्रैल को, दुनिया विश्व धरोहर दिवस के माध्यम से अपनी साझा सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व पर ठहरकर विचार करती है। यह पहल यूनेस्को के समर्थन से संचालित होती है। यद्यपि यह आयोजन वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है, लेकिन इसका महत्व उन स्थानों पर और भी अधिक व्यक्तिगत हो जाता है, जहाँ विरासत केवल स्मारकों में ही नहीं बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी रची-बसी होती है। कश्मीर ऐसा ही एक स्थान है। अक्सर “धरती का स्वर्ग” कहा जाने वाला यह क्षेत्र अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, किंतु इसकी वास्तविक समृद्धि उस बहु…
हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-उल-अज़हा जैसे पाक मौक़े का इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने में किया जा रहा है। इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों के अनुसार, आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ईद के मौके पर “नफ़्ल क़ुर्बानी” के नाम पर चंदा इकट्ठा कर रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह रकम जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों और मारे गए आतंकियों के परिवारों तक पहुंचाई जा रही है। इस मुहिम में लोगों से बड़ी रकम—हज़ारों पाकि…
लाहौर से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है, जहाँ सर्विसेज़ हॉस्पिटल में अचानक बिजली गुल होने के कारण सर्जरी जैसे नाज़ुक ऑपरेशन तक प्रभावित हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टरों को मजबूरी में अंधेरे जैसे हालात में काम करना पड़ा, जो किसी भी विकसित स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए शर्मनाक स्थिति मानी जाती है। एक पाकिस्तानी डॉक्टर ने खुद इस हालात पर सख़्त नाराज़गी जताते हुए कहा कि जब अस्पतालों में बुनियादी सहूलियत—जैसे बिजली—ही मयस्सर नहीं, तो मरीजों की जान की हिफाज़त कैसे की जा सकती है। उन्होंने इशारा किया कि यह मसला कोई एक दिन का नहीं, बल्कि मुल्क के हे…
समाज में शामिलियत और हौसला-अफ़ज़ाई को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना ने नज़र से महरूम नौजवानों के लिए गवर्नमेंट बॉयज़ हायर सेकेंडरी स्कूल, नागम में एक खास क्रिकेट मैच का आयोजन किया। यह सिर्फ़ एक खेल मुकाबला नहीं था, बल्कि उन नौजवानों को समाज की मुख्य धारा में लाने की एक बेहद मायने रखने वाली कोशिश थी। इस पहल का मक़सद उनमें एतिमाद (confidence), खेल भावना और जीने का नया जज़्बा पैदा करना था। यह प्रोग्राम इस नीयत से रखा गया कि जो बच्चे और नौजवान आँखों की रोशनी से महरूम हैं, उन्हें भी अपने हुनर और क़ाबिलियत को दिखाने का एक बेहतर मौक़ा मिले। अक्सर ऐस…
इस्लामाबाद/बाजौर: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा सूबे के बाजौर इलाके से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ मासूम पश्तून नागरिकों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो और रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह हमला एक कथित “फॉल्स फ्लैग” ऑपरेशन हो सकता है, जिसने इलाके में दहशत और बेचैनी फैला दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में आम नागरिकों को बेवजह हिरासत में लिया गया और उन पर झूठे आतंकवाद के इल्ज़ाम लगाए गए। कई अफ़गान मूल के परिवारों के घरों पर छापेमारी की गई, जिससे खौफ़ का माहौल पैदा…

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