पहलगाम की एक बहार भरी सुबह में वादी यूँ लगती है जैसे वक़्त ने इसे छुआ ही न हो। लिद्दर दरिया ख़ामोशी से बहता है , चीड़ के जंगलों और सब्ज़ा-ज़ारों के दरमियान अपना रास्ता बनाती हुई—वही मंज़र जो बरसों से कश्मीर को सुकून और ख़ूबसूरती की पहचान देते आए हैं। सैलानी यहाँ सुकून की तलाश में आते हैं, उन मंज़रों की तरफ़ खिंचे चले आते हैं जो बाहरी दुनिया की बेचैनियों से दूर लगते हैं। मगर यही सुकून का एहसास 22 अप्रैल 2025 के वाक़िये को और भी बेचैन कर देने वाला बना देता है। जिस जगह को हुस्न और अमन की मिसाल समझा जाता है, वहाँ हिंसा ने दस्तक दी—दूर की आशं…
22 अप्रैल—ये तारीख हमें एक नई-नवेली दुल्हन की ख़ामोश, मगर सब्र से भरी खामोशी की याद दिलाती है, जो बेपनाह अफ़रा-तफ़री और ग़म के दरमियान भी खड़ी रही। ये दिन हमें ये भी याद दिलाता है कि इंसानियत अपनी राह इत्तेहाद (एकजुटता) में ढूंढती है, और मिलकर मज़बूती और पुख़्ता इरादे के साथ उठ खड़ी होती है। पहलगाम—जो अपनी पाक-साफ़ ख़ूबसूरती और हरियाली के लिए जाना जाता है—उस दिन बेबसी की चीख़ों और गोलियों की आवाज़ से गूंज उठा। ख़ूबसूरती की हरी चादर पर मौत का साया छा गया। उस क़त्लेआम की तस्वीरें आज भी हमारे ज़ेहन को झकझोर देती हैं। मासूम और खुशमिज़ाज सैलानी, …
जम्मू-ओ-कश्मीर की बेटी अंसा हसन चिश्ती ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। मॉस्को में आयोजित वुशू स्टार इंटरनेशनल चैम्पियनशिप 2026 में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर न सिर्फ़ अपना, बल्कि पूरे मुल्क-ए-हिंद का नाम रोशन कर दिया। इंटरनेशनल मंच पर हिंदुस्तान की नुमाइंदगी करते हुए अंसा ने जिस जज़्बे, हुनर और इत्मीनान के साथ मुकाबला किया, वो हर नौजवान खिलाड़ी के लिए एक प्रेरणा बन गया है। जे&के स्पोर्ट्स काउंसिल ने भी उनके इस शानदार कारनामे को एक बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि यह जम्मू-ओ-कश्मीर के खेल इतिहा…
बहावलपुर, पाकिस्तान: बहावलपुर से सामने आए एक ताज़ा बयान ने सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के वरिष्ठ कमांडर हाफ़िज़ अब्दुल रऊफ़ ने कथित तौर पर एक संबोधन में “जिहाद जारी रखने” की अपील की, जिसे विशेषज्ञ खतरनाक और उकसाने वाला बयान मान रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने भाषण में रऊफ़ ने लोगों से पीछे न हटने और इस विचारधारा को जारी रखने का आह्वान किया। सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की बयानबाज़ी सीधे तौर पर युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलती है और हिंसक गतिविधियों के लिए मान…
श्रीनगर/पहलगाम, 22 अप्रैल: वादियों की ख़ामोशी में दफ़्न एक दर्दनाक सच्चाई फिर से उभर कर सामने आई है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए निर्मम हमले की पहली बरसी के क़रीब, इस वारदात से जुड़ी अहम जानकारियाँ अब उजागर हो रही हैं, जो सरहद पार से चल रही साज़िश की तरफ़ इशारा करती हैं। इंतिहाई अफ़सोसनाक इस हमले में बेगुनाह लोगों, ख़ास तौर पर हिंदू और ईसाई समुदाय को निशाना बनाया गया था। ताज़ा इनपुट के मुताबिक, इस हमले की योजना पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर हबीबुल्लाह ने तैयार की थी। बताया जा रहा है कि हमले के लिए ज़रूरी कोऑर्डिनेट्स और हिदा…
हर साल 22 अप्रैल को पूरी दुनिया में Earth Day मनाया जाता है—एक ऐसा दिन जो इंसान को अपनी ज़मीन और माहौल की हिफाज़त की याद दिलाता है। 1970 में एक छोटी सी अवामी तहरीक के तौर पर शुरू हुआ ये दिन आज आलमी सतह पर एक बड़ी मुहिम बन चुका है। ये दिन हमें ये एहसास कराता है कि हमारी ज़िंदगी इस धरती की सेहत से गहराई से जुड़ी हुई है। जब हम कश्मीर जैसे इलाके की तरफ देखते हैं—जिसे “धरती का जन्नत” कहा जाता है—तो इस दिन की अहमियत और भी बढ़ जाती है। Kashmir अपनी बेमिसाल खूबसूरती के लिए जाना जाता है। हिमालय की बुलंद पहाड़ियों से घिरा ये इलाका हरे-भरे वादियों, घने ज…
कामयाबी की कहानियाँ अक्सर साधारण शुरुआत से जन्म लेती हैं, मगर उन्हें असाधारण बनाती है मेहनत, हौसला और लगन। हुज़ैद अमजिद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—एक ऐसी दास्तान जो न सिर्फ़ उनकी ज़ाती कामयाबी को बयान करती है, बल्कि कश्मीर के नौजवान बच्चों के लिए उम्मीद और रौशन मुस्तक़बिल का पैग़ाम भी देती है। इस सफ़र को सँवारने और मुकम्मल बनाने में आर्मी गुडविल स्कूल (AGS) का किरदार बेहद अहम रहा है। हुज़ैद अमजिद ने प्रतिष्ठित नेशनल लेवल मैथ्स कार्निवल में मैथमेटिक्स मॉडल मेकिंग के जूनियर कैटेगरी में गोल्ड मेडल (पहला मुकाम) हासिल करके पूरे कश्मीर का सर फ़ख़्र…
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए दर्दनाक हमले की पहली बरसी जैसे-जैसे क़रीब आ रही है, वैसे-वैसे उस वाक़िये से जुड़ी यादें और बेचैनी फिर से ताज़ा हो रही है। इस हमले में 26 बेगुनाह हिन्दू और ईसाई अफ़राद की जान गई थी, जिससे पूरे इलाके में ग़म और खौफ़ की लहर दौड़ गई थी। इसी दरमियान पाकिस्तान से आई एक बयानबाज़ी ने मामले को और संगीन बना दिया है। एक पाकिस्तानी स्पीकर के हवाले से कहा गया कि “पहलगाम ने पाकिस्तान को ग्लोबल नक्शे पर ला दिया।” इस तरह के अल्फ़ाज़ को कई हलकों में दहशतगर्दी की हिमायत के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे पाकिस्तान की पालिसियों और उ…
रहीम यार खान में ताजिर बिरादरी ने पाकिस्तान की हुकूमत की मआशी पालिसियों के खिलाफ सख़्त एहतिजाज किया। शहर के मुख्तलिफ़ इलाकों से आए कारोबारियों ने अपनी नाराज़गी का इज़हार करते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने उनके कारोबार को बुरी तरह मुतास्सिर किया है। मुतअद्दिद ताजिरों का कहना था कि महंगाई, टैक्सों का बढ़ता बोझ और कमज़ोर मआशी इंतज़ामात ने उनकी रोज़ी-रोटी को खतरे में डाल दिया है। एहतिजाज के दौरान लोगों ने नारेबाज़ी की और हुकूमत से फ़ौरी तौर पर अपनी पालिसियों में तब्दीली की मांग की। ताजिर रहनुमाओं ने एलान किया है कि अगर उनके मुतालिबात पर गौर नहीं कि…
किसी भी मुल्क की बुनियाद अक्सर उसके दस्तूरी वादों और अमली हक़ीक़तों के दरमियान मौजूद हमआहंगी में साफ़ झलकती है। लेकिन जब पाकिस्तान की सियासी और आलमी सूरत-ए-हाल पर नज़र डाली जाती है, तो वहां एक पेचीदा निज़ाम नज़र आता है, जो मुंतज़िम तौर पर दोहरेपन पर क़ायम है। ये एक ऐसा मुल्क है जिसने सियासी धोखे की फनकारी को बख़ूबी अपना लिया है। आलमी मंच पर इसके सिविल नुमाइंदे मज़लूमियत का चेहरा ओढ़े, दुनिया से हमदर्दी, माली मदद और अमन की गुहार लगाते नज़र आते हैं। मगर इस परदे के पीछे एक ताक़तवर फौजी निज़ाम काम करता है, जो इन्हीं वादों को बार-बार कमज़ोर करता है…

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