एक ऐसी दुनिया में जहां सपनों को अक्सर रास्ता ढूंढने में मुश्किल होती है, कुछ कहानियां उम्मीद की एक चिंगारी बनकर उभरती हैं—मजबूत, निडर और अडिग। ऐसी ही एक कहानी है अतीका मीर की, एक युवा रेसिंग प्रतिभा, जिनका सफर सिर्फ रफ्तार और ट्रैक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जुनून, संघर्ष और सीमाओं को तोड़ने की कहानी है। अंतरराष्ट्रीय कार्टिंग की दुनिया में उनका उभार सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि खासकर कश्मीर से जुड़े युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। कश्मीर, जिसे “धरती का स्वर्ग” कहा जाता है, अपनी खूबसूरती, संस्कृति और जज़्बे के लिए जाना जाता है। लेकिन इन…
बलोचिस्तान से एक बार फिर ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने पाकिस्तान की नीयत पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा का सरगना सैफुल्लाह कसूरी क्वेटा में मौजूद है और वहां मिलिटेंट कैडर की ट्रेनिंग की निगरानी कर रहा है। ये वही इलाक़ा है जहां पहले भी दहशतगर्दी के तार जुड़ते रहे हैं, मगर इस बार मामला और भी संगीन नज़र आ रहा है। माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान की एजेंसियां अब खुले तौर पर ऐसे गिरोहों पर निर्भर होती जा रही हैं, ताकि इलाके में अपना असर बनाए रखा जा सके। ये रवैया ना सिर्फ़ बलोचिस्तान के आम लोगों को तन्हाई और खौफ में धक…
पाकिस्तान में मौजूदा हालात को लेकर आवाम का ग़ुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में आम नागरिक ने सख़्त लहजे में दावा किया कि मुल्क की सबसे बड़ी तबाही का सबब उसकी अपनी फ़ौज है। यह बयान अब मुल्क के अलग-अलग हिस्सों में चल रही बेचेनी और नाराज़गी को साफ तौर पर बयान करता है। आवाम का इल्ज़ाम—हिफाज़त के बजाय दबाव वीडियो में शख़्स यह कहता नज़र आता है कि फ़ौज, जिसका काम मुल्क और अवाम की हिफाज़त करना है, वही अब अपने ही लोगों पर दबाव डालने और सियासी मामलों में दखलअंदाज़ी करने में लगी हुई है। उसके मुताबिक, “जनता की मुश्क…
गिलगित-बाल्टिस्तान से एक वीडियो सामने आई है जिसने वहां के हालात पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक ख़ातून खुलकर ये इल्ज़ाम लगाती नज़र आ रही हैं कि इलाक़े के साथ इंसाफ़ नहीं हो रहा, बल्कि उसे महज़ एक “संसाधनों का ज़रिया” समझ लिया गया है। ख़ातून का कहना है कि इस इलाके की क़ीमती दौलत—चाहे वो पहाड़ हों, दरिया हों या खनिज—सब कुछ लिया जा रहा है, लेकिन बदले में लोगों को न तो बुनियादी सहूलतें मिल रही हैं, न ही असल मायनों में तरक़्क़ी। उनके लफ़्ज़ों में, “सब कुछ ले लिया जाता है, मगर वापस सिर्फ़ ख़ामोशी और कंट्रोल मिलता है।” वीडियो में ये…
हर साल 15 अप्रैल को पूरी दुनिया में वर्ल्ड आर्ट डे मनाया जाता है, जो तख़लीक़ (रचनात्मकता) और फ़न (कला) की ख़ूबसूरती का जश्न है। यह सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि इस बात की याद दिलाता है कि कला का हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से कितना गहरा रिश्ता है। प्राचीन गुफाओं की पेंटिंग्स से लेकर आज की डिजिटल क्रिएशन्स तक, कला हमेशा इंसान के जज़्बात, ख़यालात और तजुर्बों को बयान करने का एक ताक़तवर ज़रिया रही है। यह कहानियाँ सुनाती है, एहसासात को उजागर करती है और अलग-अलग तहज़ीबों और पृष्ठभूमियों के लोगों को जोड़ती है। वर्ल्ड आर्ट डे की शुरुआत 2012 में इंटरनेश…
इस्लामाबाद से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने पाकिस्तान की सियासी हक़ीक़त को फिर से उजागर कर दिया है। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान की फौज ने सऊदी अरब में तैनाती जैसे अहम फैसले बिना संसद की मंज़ूरी के ही ले लिए — एक ऐसा कदम जो सीधे तौर पर जम्हूरी उसूलों पर सवाल खड़ा करता है। माहिरीन का कहना है कि ये कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में लंबे समय से यही पैटर्न देखने को मिलता रहा है, जहाँ असली फैसले सिविल हुकूमत नहीं बल्कि फौजी क़ियादत करती है। अगर एक मुल्क में विदेशी तैनाती जैसे बड़े कदम भी पार्लियामेंट को दरकिनार करके लिए जाएं, तो यह साफ़…
पाकिस्तान से सामने आई एक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट ने मुल्क में आज़ादी-ए-इज़हार की हक़ीक़त को एक बार फिर बेनक़ाब कर दिया है। एक नौजवान ने महज़ दो मिनट में पाकिस्तान के 75 सालों का ख़ुलासा करते हुए साफ़ अल्फ़ाज़ में कहा — “यहाँ बोलने की आज़ादी नहीं है… अगर सच कहूँगा तो अंजाम भी वही होगा।” इस बयान ने ना सिर्फ़ सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है, बल्कि पाकिस्तान के अंदर मौजूदा माहौल पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक मजलिस के दौरान यह नौजवान खुलकर अपनी बात रखता है, लेकिन उसके लहजे में डर और नाउम्मीदी साफ़ झलकती है। …
इस्लामाबाद से सामने आई ताज़ा ख़बर ने एक बार फिर पाकिस्तान की माली हालत और उसकी हुकूमती नीतियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान को क़रीब 5 अरब डॉलर की माली मदद सऊदी अरब और क़तर से मिलने जा रही है, ताकि वो अपने बढ़ते कर्ज़ और डिफ़ॉल्ट के ख़तरे से उबर सके। लेकिन असल सवाल ये है कि इतना बड़ा कर्ज़ आखिर जा कहाँ रहा है? हक़ीक़त ये है कि पाकिस्तान सालों से कर्ज़ पर कर्ज़ लेकर अपनी इकॉनमी को सहारा देने की कोशिश कर रहा है, मगर ज़मीनी हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। महंगाई आसमान छू रही है, आम आदमी को बुनियादी सहूलतें तक मय…
लाहौर से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर पाकिस्तान के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिन तंज़ीमों पर दुनिया भर में पाबंदी लगाई गई है, उनके कारकुनों का इस तरह खुलेआम इकट्ठा होना ये दिखाता है कि ज़मीनी हक़ीक़त क्या है और दावे क्या। मिली जानकारी के मुताबिक, लाहौर में एक कथित “ट्रेनिंग सेशन” का इनक़ाद किया गया, जिसमें ऊँचे स्तर की क़ियादत की मौजूदगी बताई जा रही है। तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है कि बड़ी तादाद में लोग जमा हैं, और पूरा माहौल किसी आम मजलिस जैसा नहीं बल्कि एक मुनज़्ज़म इजलास जैसा लग रहा है। सबसे अहम बात ये है कि ये सब कुछ ख…
हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाने वाला बैसाखी का त्योहार भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक कैलेंडर में एक अहम मुकाम रखता है। पंजाब में इसे आम तौर पर फसल के त्योहार और रंग-बिरंगी खुशियों के दिन के तौर पर जाना जाता है, लेकिन सिखों के लिए यह गहरी रूहानी अहमियत भी रखता है। जहाँ बैसाखी की तस्वीर अक्सर भांगड़ा, मेलों और सुनहरी गेहूं के खेतों से जुड़ी होती है, वहीं कश्मीर में इसका जश्न एक ज्यादा सुकून भरा और गहराई से भरा हुआ रूप पेश करता है—जो इबादत, बिरादरी और तसल्सुल (continuity) में जड़ें रखता है। बैसाखी की तारीखी और मज़हबी अहमियत 1699 से जुड़ी है, जब गु…

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