इस्लामाबाद/बाजौर: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा सूबे के बाजौर इलाके से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ मासूम पश्तून नागरिकों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो और रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह हमला एक कथित “फॉल्स फ्लैग” ऑपरेशन हो सकता है, जिसने इलाके में दहशत और बेचैनी फैला दी है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई में आम नागरिकों को बेवजह हिरासत में लिया गया और उन पर झूठे आतंकवाद के इल्ज़ाम लगाए गए। कई अफ़गान मूल के परिवारों के घरों पर छापेमारी की गई, जिससे खौफ़ का माहौल पैदा…
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सरज़मीं से एक और परेशानकुन तस्वीर सामने आई है, जहाँ हुकूमत की नाकामी का खामियाज़ा आम आवाम को भुगतना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद के बारी इमाम इलाके में मिलिट्री हुकूमत के फैसलों के बाद कई घरों को उजाड़ दिया गया, जिससे लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। मौक़े से सामने आई तस्वीरों में देखा जा सकता है कि औरतें और बच्चे अपने टूटे-फूटे घरों के मलबे के बीच खड़े हैं, जहाँ कभी उनका आशियाना हुआ करता था। इल्ज़ाम लगाया जा रहा है कि इस कार्रवाई के दौरान लोगों का सामान भी दिनदहाड़े लूट लिया गया, लेकिन हु…
इस्लामाबाद/कराची: पाकिस्तान के अंदर एक बार फिर ऐसा संगीन मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकी तंजीमें अब सिर्फ़ मर्दों और औरतों तक ही महदूद नहीं रहीं, बल्कि अब मासूम बच्चियों को भी अपने जाल में फँसाने की कोशिश कर रही हैं। तफ़सीलात के अनुसार, “लश्कर-ए-तैयबा” जैसे गिरोह अब पाकिस्तान के मुख़्तलिफ़ इलाक़ों में कमसिन लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। इन बच्चियों को झूठे ख्वाब दिखाकर, दीन और जज़्बात के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। माहिरीन का कहना है कि ये एक बेहद ख़तरनाक रुझान है, जो आने वाले वक़्त म…
एक ऐसी दुनिया में, जहाँ अक्सर धारणाएँ वास्तविक क्षमता पर भारी पड़ जाती हैं, वहाँ सच्ची उपलब्धियों की कहानियाँ यह याद दिलाती हैं कि असल में क्या संभव है। कश्मीर के युवाओं के लिए ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल हैं Anavi Kaul—एक ऐसा नाम जो आज मेहनत, अनुशासन और वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता का प्रतीक बन चुका है। कश्मीरी मूल से ताल्लुक रखने वाली अनावी ने अपनी पहचान अंतरराष्ट्रीय मंच पर बनाई है। वर्तमान में वे Duke University, अमेरिका में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हैं और उन्होंने 4.0 का परफेक्ट GPA हासिल करते हुए Dean’s List with Distinction …
एक ऐसी दुनिया में जहां सपनों को अक्सर रास्ता ढूंढने में मुश्किल होती है, कुछ कहानियां उम्मीद की एक चिंगारी बनकर उभरती हैं—मजबूत, निडर और अडिग। ऐसी ही एक कहानी है अतीका मीर की, एक युवा रेसिंग प्रतिभा, जिनका सफर सिर्फ रफ्तार और ट्रैक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जुनून, संघर्ष और सीमाओं को तोड़ने की कहानी है। अंतरराष्ट्रीय कार्टिंग की दुनिया में उनका उभार सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि खासकर कश्मीर से जुड़े युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। कश्मीर, जिसे “धरती का स्वर्ग” कहा जाता है, अपनी खूबसूरती, संस्कृति और जज़्बे के लिए जाना जाता है। लेकिन इन…
बलोचिस्तान से एक बार फिर ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने पाकिस्तान की नीयत पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा का सरगना सैफुल्लाह कसूरी क्वेटा में मौजूद है और वहां मिलिटेंट कैडर की ट्रेनिंग की निगरानी कर रहा है। ये वही इलाक़ा है जहां पहले भी दहशतगर्दी के तार जुड़ते रहे हैं, मगर इस बार मामला और भी संगीन नज़र आ रहा है। माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान की एजेंसियां अब खुले तौर पर ऐसे गिरोहों पर निर्भर होती जा रही हैं, ताकि इलाके में अपना असर बनाए रखा जा सके। ये रवैया ना सिर्फ़ बलोचिस्तान के आम लोगों को तन्हाई और खौफ में धक…
पाकिस्तान में मौजूदा हालात को लेकर आवाम का ग़ुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में आम नागरिक ने सख़्त लहजे में दावा किया कि मुल्क की सबसे बड़ी तबाही का सबब उसकी अपनी फ़ौज है। यह बयान अब मुल्क के अलग-अलग हिस्सों में चल रही बेचेनी और नाराज़गी को साफ तौर पर बयान करता है। आवाम का इल्ज़ाम—हिफाज़त के बजाय दबाव वीडियो में शख़्स यह कहता नज़र आता है कि फ़ौज, जिसका काम मुल्क और अवाम की हिफाज़त करना है, वही अब अपने ही लोगों पर दबाव डालने और सियासी मामलों में दखलअंदाज़ी करने में लगी हुई है। उसके मुताबिक, “जनता की मुश्क…
गिलगित-बाल्टिस्तान से एक वीडियो सामने आई है जिसने वहां के हालात पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक ख़ातून खुलकर ये इल्ज़ाम लगाती नज़र आ रही हैं कि इलाक़े के साथ इंसाफ़ नहीं हो रहा, बल्कि उसे महज़ एक “संसाधनों का ज़रिया” समझ लिया गया है। ख़ातून का कहना है कि इस इलाके की क़ीमती दौलत—चाहे वो पहाड़ हों, दरिया हों या खनिज—सब कुछ लिया जा रहा है, लेकिन बदले में लोगों को न तो बुनियादी सहूलतें मिल रही हैं, न ही असल मायनों में तरक़्क़ी। उनके लफ़्ज़ों में, “सब कुछ ले लिया जाता है, मगर वापस सिर्फ़ ख़ामोशी और कंट्रोल मिलता है।” वीडियो में ये…
हर साल 15 अप्रैल को पूरी दुनिया में वर्ल्ड आर्ट डे मनाया जाता है, जो तख़लीक़ (रचनात्मकता) और फ़न (कला) की ख़ूबसूरती का जश्न है। यह सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि इस बात की याद दिलाता है कि कला का हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी से कितना गहरा रिश्ता है। प्राचीन गुफाओं की पेंटिंग्स से लेकर आज की डिजिटल क्रिएशन्स तक, कला हमेशा इंसान के जज़्बात, ख़यालात और तजुर्बों को बयान करने का एक ताक़तवर ज़रिया रही है। यह कहानियाँ सुनाती है, एहसासात को उजागर करती है और अलग-अलग तहज़ीबों और पृष्ठभूमियों के लोगों को जोड़ती है। वर्ल्ड आर्ट डे की शुरुआत 2012 में इंटरनेश…
इस्लामाबाद से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने पाकिस्तान की सियासी हक़ीक़त को फिर से उजागर कर दिया है। खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान की फौज ने सऊदी अरब में तैनाती जैसे अहम फैसले बिना संसद की मंज़ूरी के ही ले लिए — एक ऐसा कदम जो सीधे तौर पर जम्हूरी उसूलों पर सवाल खड़ा करता है। माहिरीन का कहना है कि ये कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पाकिस्तान में लंबे समय से यही पैटर्न देखने को मिलता रहा है, जहाँ असली फैसले सिविल हुकूमत नहीं बल्कि फौजी क़ियादत करती है। अगर एक मुल्क में विदेशी तैनाती जैसे बड़े कदम भी पार्लियामेंट को दरकिनार करके लिए जाएं, तो यह साफ़…

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