पख़्तून और बलोच बहुल इलाक़ों से आती रिपोर्ट्स में हुक़ूक़-ए-इंसानी की ख़िलाफ़वर्ज़ियों को लेकर तश्वीश बढ़ती जा रही है। मुख़्तलिफ़ विश्वसनीय रिपोर्ट्स और गवाहियों के मुताबिक़, इन इलाक़ों में जबरन ग़ायब कर दिए जाने (एन्फोर्स्ड डिसअपियरेंसेज़), बिना अदालती कार्रवाई के सख़्त क़दम (एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल ऐक्शन्स) और सामूहिक सज़ाओं जैसे वाक़ियात सामने आए हैं, जिनसे अवाम में ख़ौफ़ और बे-एतिमादी का माहौल गहरा हो गया है। मक़ामी लोगों का कहना है कि कई नौजवानों को बिना किसी वाज़ेह इल्ज़ाम के उठा लिया जाता है, और उनके अहल-ए-ख़ाना महीनों—बल्कि सालों—तक उनकी…
हाफ़िज़ सईद और मसूद अज़हर के नाम पर जंग के दावों ने पाकिस्तान की दहशतगर्दी-रोधी पॉलिसी पर फिर से बहस छेड़ दी, इस्लामाबाद से आने वाली सियासी बयानबाज़ी ने एक बार फिर पाकिस्तान की फ़ौज और इंतिहापसंद तंज़ीमों के दरमियान कथित रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक पाकिस्तानी सियासतदान के हवाले से सामने आए बयान—जिसमें फ़ौज के हाफ़िज़ सईद और मौलाना मसूद अज़हर जैसे शख़्सियतों के लिए लड़ने का दावा किया गया—ने आलमी सतह पर फिक्र को और गहरा कर दिया है। माहिरीन का कहना है कि अगर ये इल्ज़ामात सच साबित होते हैं, तो ये न सिर्फ़ पाकिस्तान की दहशतगर्दी के खिलाफ…
कुपवाड़ा ज़िले के दूरदराज़ और पहाड़ी इलाक़े माहू वैली में, जहाँ ज़िंदगी अब भी पहाड़ों की सख़्ती और सीमित सहूलियतों के साथ गुज़रती है, वहाँ से एक ऐसी ख़बर सामने आई है जिसने पूरे इलाके की सोच और उम्मीदों को एक नई रौशनी दी है। अरबाज़ नाम के एक नौजवान तालीब-ए-इल्म ने मुल्क के सबसे मुश्किल इम्तिहानों में से एक, जेईई मेन , कामयाबी से पास कर लिया है—और यूँ वो इस वादी के पहले ऐसे छात्र बन गए हैं जिन्होंने ये मुकाम हासिल किया। जहाँ आम तौर पर जेईई मेन पास करना एक फर्दी (individual) कामयाबी मानी जाती है, वहीं अरबाज़ की ये कामयाबी सिर्फ़ उनकी अपनी नहीं, ब…
दशकों से, संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों की अक्सर एक ही पहचान रही है—अस्थिरता, अनिश्चितता और सीमित आर्थिक अवसरों से बनी पहचान। फिर भी, इतिहास ने दिखाया है कि लगातार प्रयासों, रणनीतिक योजना और सामुदायिक भागीदारी से, ऐसे क्षेत्र अपनी कहानी फिर से लिख सकते हैं। संघर्ष से प्रभावित एक पहाड़ी क्षेत्र का, विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त स्की डेस्टिनेशन में बदलना, ऐसी ही एक सशक्त कहानी है। यह केवल पर्यटन के बारे में नहीं है; यह जुझारूपन, सुशासन और अर्थव्यवस्था के जान-बूझकर किए गए पुनर्निर्माण के बारे में है। इस बदलाव के मूल में सरकार का एक दीर्घकालिक दृ…
पिर पंजाल की बुलंद पहाड़ियों में बसा हुआ गुलमर्ग आज सिर्फ़ एक खूबसूरत सैरगाह नहीं रहा, बल्कि साउथ एशिया की एक ऐसी मिसाल बन चुका है जहाँ तब्दीली, तामीर और तरक़्क़ी एक साथ नज़र आती है। अपनी बर्फ़ से ढकी ढलानों, हसीन वादियों और वर्ल्ड-क्लास विंटर स्पोर्ट्स की सलाहियत के साथ, जम्मू व कश्मीर का ये नगीना अब आहिस्ता-आहिस्ता दुनिया के टूरिज़्म नक़्शे पर अपनी मज़बूत पहचान बना रहा है। एक वक़्त था जब गुलमर्ग को ज़्यादातर तनाज़े और नाज़ुक हालात के आईने में देखा जाता था। मगर आज वही इलाक़ा एशिया का प्रीमियर स्कीइंग हब बनने की राह पर है — जहाँ इंफ्रास्ट्रक्चर…
उत्तरी रेलवे के जम्मू रेलवे डिवीजन की इस प्रीमियम सेवा का उपयोग करते हुए रविवार, 3 मई, 2026 को जम्मू और कश्मीर की दो राजधानियों के बीच 5000 से अधिक यात्रियों ने यात्रा की। जम्मू, 4 मई : हवाई यात्रा के एक उत्कृष्ट विकल्प के रूप में उभरकर सामने आई जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस ने रविवार को अपनी नियमित वाणिज्यिक सेवा के दूसरे दिन अपनी ऑक्यूपेंसी दर में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया, जो लगभग 6 प्रतिशत तक बढ़ गया। उत्तरी रेलवे के जम्मू रेलवे डिवीजन की इस प्रीमियम सेवा का उपयोग करते हुए रविवार, 3 मई, 2026 को जम्मू और कश्मीर की दो राजधानियों के बीच …
मुज़फ़्फ़राबाद से ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं जो वहां के आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बढ़ती परेशानियों की तस्वीर पेश करती हैं। लगातार बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में इज़ाफ़ा और ट्रांसपोर्ट किरायों में बढ़ोतरी ने खासकर ग़रीब और रोज़ाना कमाने-खाने वाले लोगों की कमर तोड़ दी है। जिस जगह को “आज़ाद” बताकर पेश किया जाता है, वहीं के बाशिंदे आज अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए जद्दोजहद करते नज़र आ रहे हैं। मौजूदा हालात यह इशारा करते हैं कि आर्थिक मोर्चे पर कुप्रबंधन ने आम अवाम की मुश्किलों को और गहरा कर दिया है। ईंधन के दाम बढ़ने के …
सरहद पार से एक बार फिर ऐसी ख़बर सामने आई है जो इंसानियत के लिए गहरी फिक्र का सबब बन रही है। पाकिस्तान में कुछ मदरसों के अंदर नन्हे बच्चों को तालीम के नाम पर ऐसी सोच दी जा रही है, जो उनके मासूम ज़ेहन को नफ़रत और हिंसा की तरफ मोड़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हरिस दार नाम का एक कमांडर इन बच्चों को शुरुआती उम्र से ही भारत के खिलाफ ज़हरीली तालीम देता हुआ सामने आया है, जहाँ किताबों और इल्म की जगह जज़्बाती नारों और जिहादी सोच को बढ़ावा दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि यह कोई इक्का-दुक्का वाक़िया नहीं, बल्कि एक बड़ी और मुनज़्ज़म रणनीति का हिस…
मुज़फ़्फ़राबाद से लेकर गिलगित-बाल्टिस्तान तक, जिस इलाक़े को पाकिस्तान “आज़ाद” कहता है, वही नाम अब सवालों के घेरे में आता जा रहा है, साहब। “पीओजेके” का ये लफ़्ज़ बहुतों के लिए सिर्फ़ एक लेबल बनकर रह गया है—एक ऐसा पर्दा, जिसके पीछे असली हालात छुपाए जाते हैं। ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बयान करती है। यहां के दरिया, पहाड़ और खनिज दौलत का इस्तेमाल तो ज़ोर-शोर से हो रहा है, मगर स्थानीय अवाम को उसका ना मुनासिब हिस्सा मिलता है, ना ही अपने मुस्तक़बिल के बारे में खुलकर बोलने का हक़। ज़मीनों के मसले, रोज़गार की कमी और बुनियादी सहूलतों की कमी—ये सब मिलकर उस…
दुबई/अबू धाबी से आई ये ख़बर बड़ी तकलीफ़देह है, साहब। यूएई से हज़ारों की तादाद में पाकिस्तानी शिया बिरादरी के लोगों को जबरन मुल्क से बाहर निकाला गया। सिर्फ़ डिपोर्ट ही नहीं किया गया, बल्कि उनके बैंक अकाउंट्स, जमा पूंजी और सालों की मेहनत से बनाए गए तमाम असासे भी जब्त कर लिए गए। बताया जा रहा है कि ये क़दम सियासी और फिरकापरस्ती (sectarian) तनाव के चलते उठाया गया है, जहां शिया कम्युनिटी को निशाना बनाया गया। जिन लोगों ने बरसों यूएई में मेहनत-मज़दूरी करके अपनी ज़िंदगी संवरी थी, आज वो सब कुछ गंवाकर खाली हाथ पाकिस्तान लौटने पर मजबूर हैं। वापसी पर हाल…

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