कश्मीर आज विकास, पर्यटन, बुनियादी सुविधाओं और रोज़गार के नए अवसरों के लिहाज़ से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है। बर्फ़ से ढके पहाड़, खूबसूरत वादियाँ, सर्दियों के खेल और स्थानीय लोगों की मेहनत इस क्षेत्र की बदलती तस्वीर को सामने लाते हैं। यहाँ के लोगों की उम्मीदें केवल बेहतर सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हर परिवार अपने बच्चों के लिए बेहतर तालीम, रोज़गार और एक महफूज़ भविष्य चाहता है। विकास की असल अहमियत भी इसी में है कि उसका फ़ायदा आम लोगों तक पहुँचे। कश्मीर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की अहम भूमिका है। गुलमर्ग, पहलगाम और सोनमर्ग जैसे ख…
श्रीनगर के पुराने शहर ज़ैना कदल की गलियों में आज भी कश्मीर की सदियों पुरानी हुनरमंदी की एक ऐसी मिसाल मौजूद है, जो इस वादी की सांस्कृतिक पहचान को अपने हाथों से सँवार रही है। पद्मश्री से सम्मानित गुलाम मोहम्मद ज़ाज़ अपने कारखाने में संतूर बनाने की पारंपरिक कला को ज़िंदा रखे हुए हैं। उनके हाथों से लकड़ी को तराशकर तैयार किया जाने वाला संतूर महज़ एक साज़ नहीं, बल्कि कश्मीर की रूह, तहज़ीब और संगीत की सदियों पुरानी रवायत का प्रतीक है। उनकी ज़िंदगी इस बात की गवाही देती है कि अगर इंसान अपने हुनर और विरासत से सच्ची मोहब्बत करे, तो मुश्किल हालात में भी अ…
कश्मीर की वादियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यहाँ के नौजवान और बेटियाँ अपनी मेहनत, लगन और हौसले के दम पर लगातार नई कामयाबियाँ हासिल कर रहे हैं। इसी सिलसिले में गांदरबल की होनहार खिलाड़ी बाइज़ा तारिक ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत का शानदार मुज़ाहिरा करते हुए स्कूली राष्ट्रीय जूडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया है। उनकी इस कामयाबी ने न सिर्फ गांदरबल जिले, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर का सिर फख्र से ऊँचा कर दिया है। बाइज़ा तारिक खेलो इंडिया जूडो केंद्र, गांदरबल की प्रशिक्षु हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित हो रही स्कूल गेम्स फेडरेशन …
श्रीनगर के ऐतिहासिक पोलो ग्राउंड में इन दिनों सरस मेला ग्रामीण हुनर, पारंपरिक दस्तकारी और हिंदुस्तान की रंग-बिरंगी सांस्कृतिक विरासत को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। 25 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक आयोजित हो रहा यह मेला ग्रामीण भारत की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता की खूबसूरत तस्वीर पेश कर रहा है। यहाँ मुल्क के अलग-अलग हिस्सों से आईं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएँ अपने हाथों से तैयार किए गए उत्पादों, पारंपरिक पकवानों और स्थानीय संस्कृति को लोगों के सामने पेश कर रही हैं। यह मेला केवल खरीदारी का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की मे…
कश्मीर की वादियों में हुनर, मेहनत और नई सोच की कोई कमी नहीं है। यहाँ के नौजवानों और प्रतिभाशाली लोगों ने हमेशा अपनी काबिलियत से यह साबित किया है कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों और दिल में कुछ नया करने का जज़्बा हो, तो मुश्किल रास्ते भी आसान बनाए जा सकते हैं। इसी सोच को हकीकत में बदलने का काम कश्मीर के गणित शिक्षक मीर बिलाल कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी लगन और लगातार 15 वर्षों की मेहनत से विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सूरज की रोशनी से चलने वाली कार बनाई है, जिसका नाम ‘रे’ रखा गया है। इसके साथ ही उन्होंने सौर ऊर्जा …
कुपवाड़ा जिले के लोलाब इलाके में क्रिकेट के मैदान पर 26 अक्टूबर 2026 को ऐसा रोमांच देखने को मिला, जिसने स्थानीय युवाओं के जोश, मेहनत और खेल के प्रति उनके जुनून को एक नई पहचान दी। चांदिगाम क्रिकेट मैदान पर आयोजित किलो नॉर्थ कश्मीर क्रिकेट लीग 2026 के दूसरे संस्करण के फाइनल मुकाबले में पठान पैंथर्स लोलाब ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सोपोर XI को महज 4 रन से शिकस्त दी और खिताब अपने नाम कर लिया। आखिरी पलों तक चले इस दिलचस्प मुकाबले ने दर्शकों को अपनी जगह पर बैठे रहने को मजबूर कर दिया। दोनों टीमों ने जीत के लिए भरपूर कोशिश की, लेकिन पठान पैंथर्स के ख…
जम्मू-कश्मीर के नौजवानों में मेहनत, लगन और अपने मुस्तकबिल को बेहतर बनाने का जज़्बा लगातार दिखाई दे रहा है। इसी जज़्बे की एक झलक जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (जेएके एलआई) रेजिमेंटल सेंटर द्वारा 24 और 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित भर्ती रैली में देखने को मिली, जहाँ भारतीय सेना में शामिल होने का ख्वाब लेकर 1,299 युवा मैदान में उतरे। इन नौजवानों की भागीदारी इस बात की गवाही देती है कि कश्मीर के युवा अपने हुनर, अनुशासन और मेहनत के दम पर नई मंज़िलें हासिल करने के लिए तैयार हैं। इस भर्ती रैली का आयोजन मुख्यालय कोटा के तहत किया गया। इसमें शामिल होने वाले अ…
कश्मीर की उपजाऊ ज़मीन, यहाँ की आबोहवा और किसानों की मेहनत ने हमेशा इस वादी को एक अलग पहचान दी है। यहाँ की मिट्टी में ऐसी खूबियाँ मौजूद हैं, जो न केवल लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी हैं, बल्कि कश्मीर की सदियों पुरानी विरासत को भी अपने भीतर समेटे हुए हैं। इसी विरासत को संभालने और दुनिया तक पहुँचाने की कोशिश में अनंतनाग ज़िले के सगाम क्षेत्र के किसान ज़फ़र अहमद भट ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। उन्हें नई दिल्ली में आयोजित भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन में सुगंधित मुश्कबुदजी चावल की किस्म के संरक्षण और उसे आगे बढ़ाने में किए गए प्रयासों …
कश्मीर की पहचान केवल इसकी ख़ूबसूरत वादियों, बर्फ़ से ढके पहाड़ों और दरियाओं तक महदूद नहीं है, बल्कि यहाँ के लोगों के हुनर, मेहनत और सदियों पुरानी तहज़ीब में भी इसकी असल रूह बसती है। इसी विरासत का एक बेमिसाल हिस्सा है कश्मीरी पश्मीना, जिसकी नफ़ासत और बारीक कारीगरी ने हमेशा लोगों के दिलों में अपनी ख़ास जगह बनाई है। आज इसी पारंपरिक हुनर को आधुनिक कारोबार और नए डिज़ाइन के साथ जोड़कर कश्मीर की पहचान को नई बुलंदी देने की कोशिशें रंग ला रही हैं। ‘द स्प्लेंडर ऑफ कश्मीर’ को वैश्विक नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026 में मिला उत्कृष्ट व्यावसायिक नवाचार सम्मान इस…
कश्मीर की खूबसूरत वादियाँ, यहाँ की तहज़ीब, भाईचारा और मेहनतकश अवाम इस सरज़मीन की असली पहचान हैं। यहाँ के नौजवानों में हुनर, काबिलियत और आगे बढ़ने का भरपूर जज्बा मौजूद है। ऐसे में उनकी सेहत, तालीम और बेहतर मुस्तकबिल की हिफाजत करना पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। इसी मकसद को सामने रखते हुए अनंतनाग पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए 25 अक्टूबर 2026 को वरीनाग इलाके में लगभग 1.30 करोड़ रुपये की एक दो मंजिला व्यावसायिक इमारत कुर्क की। यह कदम नशे के अवैध कारोबार से जुड़े कथित आर्थिक नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कस…

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