बलोचिस्तान में पाकिस्तान की फ़ौज के मीडिया विंग आईएसपीआर (Inter-Services Public Relations) की जानिब से आयोजित किए गए बड़े समर कैंप को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं। इस कैंप में सूबे के मुख्यमंत्री ने चार हज़ार से ज़्यादा तलबा (छात्रों) को ख़िताब किया और उन्हें पाकिस्तान की "कौमी यकजहती" और "रौशन मुस्तक़बिल" का पैग़ाम दिया। मगर दूसरी जानिब कई तजज़ियाकार और बलोच मसाइल पर नज़र रखने वाले हल्के इसे एक सोची-समझी प्रोपेगेंडा मुहिम करार दे रहे हैं, जिसका मक़सद नौजवान नस्ल के ज़ेहनों पर असर डालना और असली ज़मीनी हक़ीक़त से उनका ध्यान हटान…
पाकिस्तान की सियासी और फ़ौजी क़ियादत एक बार फिर अपने पुराने तौर-तरीक़ों पर लौटती नज़र आ रही है। इस बार पाकिस्तान के वज़ीर-ए-दिफ़ा की तरफ़ से ऐसा बयान सामने आया है, जिसमें दावा किया गया कि "भारत पाकिस्तान के शहरों पर दहशतगर्द हमलों की साज़िश रच रहा है।" इसके साथ ही भारत को तथाकथित "गरजदार जवाब" देने की धमकी भी दी गई। सियासी माहिरीन का मानना है कि ऐसे बयान कोई नई बात नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उसी रवायत का हिस्सा हैं, जिसके ज़रिये वह अपने ऊपर लगने वाले दहशतगर्दी के इल्ज़ामात से दुनिया की तवज्जो हटाने की कोशिश करता रहा है। दिफ़ा…
वादी-ए-कश्मीर में अमन, तरक़्क़ी और इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए भारतीय सेना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उसका रिश्ता सिर्फ़ सरहदों की हिफ़ाज़त तक महदूद नहीं, बल्कि अवाम की ख़िदमत और उनकी बेहतरी से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। इसी सिलसिले में भारतीय सेना ने ज़ंबूर पट्टन गाँव में "ख़ैरियत पैट्रोल एवं मेडिकल असिस्टेंस ड्राइव" का एहतिमाम किया, जिसमें स्थानीय लोगों को मुफ़्त स्वास्थ्य जाँच, ज़रूरी दवाइयाँ और सेहत से जुड़ी अहम मालूमात फ़राहम की गईं। इस मेडिकल कैंप का मक़सद दूरदराज़ इलाक़ों में रहने वाले उन लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य स…
जम्मू-कश्मीर के बारामूला ज़िले में आयोजित "इंटरफेथ डायलॉग फ़ॉर हार्मनी" कार्यक्रम ने एक बार फिर यह पैग़ाम दिया कि वादी की असली पहचान अमन, इंसानियत, भाईचारे और साझा तहज़ीब है। सेव यूथ सेव फ्यूचर फ़ाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने शिरकत की और समाज में आपसी सौहार्द, नशा-मुक्ति तथा युवाओं की सकारात्मक भागीदारी पर ज़ोर दिया। अपने ख़िताब में उप-राज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की रूह हमेशा से सूफ़ियों, ऋषियों और संतों की शिक्षाओं से रोशन रही है। यही विरासत इस धरती को मोहब्बत, इंसानियत और भा…
कश्मीर में एक बार फिर सोशल मीडिया के ज़रिये अवाम के ज़ेहनों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। इस बार तथाकथित डिजिटल प्लेटफॉर्म "कश्मीर फाइट" की तरफ़ से एक पोस्टर जारी किया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर की मुख्यधारा की सियासी पार्टियों—नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP)—को निशाना बनाते हुए यह इल्ज़ाम लगाया गया है कि इनका दिल्ली के साथ कोई ख़ुफ़िया गठजोड़ है। सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यह महज़ एक सियासी बयान नहीं, बल्कि अवाम के बीच बेएतबारी और भ्रम फैलाने की एक सुनियोजित दुष्प्रचार मुहिम का हिस्सा…
दुनिया भर में स्विमिंग कैंपों को सेहत, अनुशासन और नौजवानों की शारीरिक क्षमता विकसित करने का ज़रिया माना जाता है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं में आत्मविश्वास, टीम भावना और प्रतिस्पर्धा की भावना को मज़बूत करते हैं। लेकिन हाल के महीनों में सामने आए कुछ खुफिया इनपुट और सुरक्षा विश्लेषणों ने पाकिस्तान में आयोजित कुछ स्विमिंग कैंपों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सुरक्षा आकलनों में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में संचालित कुछ स्विमिंग कार्यक्रमों का इस्तेमाल कथित तौर पर कट्टरपंथी तंजीमों द्वारा युवाओं तक पहुँच बनाने और संभावित …
पाकिस्तान की एक और कूटनीतिक कोशिश अब उसी के लिए भारी पड़ती दिखाई दे रही है। सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को घेरने की उसकी रणनीति अपेक्षित परिणाम देने में नाकाम रही है। अब हालात यह हैं कि मध्यस्थता की पूरी कानूनी प्रक्रिया का खर्च पाकिस्तान को अकेले उठाना पड़ रहा है, जबकि भारत ने इस प्रक्रिया को मान्यता देने से साफ़ इनकार कर दिया है। जानकारों का कहना है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के फैसले के पश्चात पाकिस्तान ने मामले को हेग स्थित मध्यस्थता मंच तक ले जाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने …
श्रीनगर की ख़ूबसूरत वादी इन दिनों सिर्फ़ अपनी फ़ितरती हुस्न की वजह से नहीं, बल्कि इल्म, अदब और तहज़ीब की महफ़िलों की वजह से भी चर्चा में है। तीसरे चिनार बुक फ़ेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की शिरकत ने इस अदबी आयोजन को नई अहमियत बख्शी। इस मौक़े पर उन्होंने किताबों की अहमियत, पढ़ने की आदत और नौजवान नस्ल को इल्म से जोड़ने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। बुक फ़ेस्टिवल में देश के मुख़्तलिफ़ हिस्सों से आए प्रकाशकों, लेखकों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने हिस्सा लिया। किताबों के रंग-बिरंगे स्टॉल, बच्चों के लिए ख़ास गतिविधियाँ, साहित…
श्री अमरनाथजी यात्रा को 19 जुलाई से एहतियातन अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। ये फ़ैसला पहलगाम और बालटाल, दोनों रास्तों पर लागू किया गया है। प्रशासन ने वाज़ेह किया है कि मौसम विभाग की तरफ़ से लगातार खराब मौसम, तेज़ बारिश और ऊँचाई वाले इलाक़ों में संभावित भूस्खलन की पेशगोई के मद्देनज़र ये कदम सिर्फ़ और सिर्फ़ श्रद्धालुओं की हिफ़ाज़त को यक़ीनी बनाने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम में बेहतरी आते ही हालात का दोबारा जायज़ा लिया जाएगा और उसके बाद यात्रा को फिर से शुरू करने का फ़ैसला किया जाएगा। प्रशासन ने कहा कि अमरनाथ यात्रा करोड…
कश्मीर के सीमावर्ती इलाक़े अब सिर्फ़ अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध तहज़ीब, वीरता की दास्तानों और आधुनिक सहूलियतों की वजह से भी लोगों की तवज्जो का मरकज़ बनते जा रहे हैं। इसी सिलसिले में भारतीय फ़ौज की जानिब से तंगधार के सदना टॉप पर क़ायम किया गया "शौर्य गाथा कॉम्प्लेक्स" आज सरहदी सैर-सपाटे की नई मिसाल बनकर उभरा है। यह कॉम्प्लेक्स न सिर्फ़ मुल्क की हिफ़ाज़त करने वाले बहादुर जवानों की कुर्बानियों को सलाम पेश करता है, बल्कि पहाड़ी संस्कृति की हिफ़ाज़त, स्थानीय रिवायतों के फ़रोग़ और पर्यटन को नई रफ़्तार देने म…

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