भारत के संविधान निर्माण के इतिहास में कुछ ऐसी तिथियां हैं जिन्हें केवल कैलेंडर की तिथियों के रूप में नहीं देखा जा सकता। 12, 13 और 14 सितंबर 1949 ऐसी ही तीन तिथियां हैं। इन तीन दिनों के दौरान, संविधान सभा ने एक ऐसे मुद्दे पर निर्णायक बहस की जो केवल आधिकारिक कामकाज की भाषा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण था। प्रश्न यह था: स्वतंत्र भारत में शासन की आवाज किस भाषा में सुनी और बोली जाएगी? क्या औपनिवेशिक शासन की भाषा अंग्रेजी स्वतंत्र भारत में भी बनी रहेगी? क्या हिंदी को संघ की आधिकारिक भाषा बनाया जाएगा? यदि हिंदी को अपनाया जाता है, तो वह किस प्रकार की हिंदी…
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर ब्रिक्स के संयुक्त घोषणापत्र में एक बार फिर स्पष्ट और कड़ा संदेश सामने आया है। ब्रिक्स देशों ने हमले की निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति दोहराई और आतंकवादियों, उनके समर्थकों तथा सुरक्षित पनाहगाहों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। हमले में 26 लोगों की जान गई थी। ताजा ब्रिक्स घोषणापत्र में पहलगाम हमले का उल्लेख लगातार दूसरी बार होना इस बात की अहमियत को दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकवाद…
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से सटी कुपवाड़ा की माचिल वादी में वर्ष 2026 की माचिल प्रीमियर लीग का समापन पुरुष और महिला वर्ग के रोमांचक फाइनल मुकाबलों के साथ हुआ। भारतीय सेना की 56 राष्ट्रीय राइफल्स के सहयोग और स्थानीय लोगों की व्यापक भागीदारी से आयोजित इस क्रिकेट लीग ने सीमांत इलाके में खेल, भाईचारे और सामुदायिक जुड़ाव की एक खूबसूरत तस्वीर पेश की। कभी अलगाव और सीमित आवाजाही के लिए पहचानी जाने वाली यह सरहदी वादी/5 अब खेल गतिविधियों और स्थानीय प्रतिभाओं के जरिए नई पहचान बनाने की राह पर आगे बढ़ रही है। महिला वर्ग के फाइनल में विजेता टीम ने शानदा…
कश्मीर के कुलगाम जिले के कुटाब्राडी गांव से ताल्लुक रखने वाले डॉक्टर मुश्ताक अहमद मल्ला ने अपनी मेहनत, जज़्बे और बुलंद हौसले का शानदार मुज़ाहिरा करते हुए 72 किलोमीटर लंबी खारदुंग ला चुनौती पूरी कर वादी का नाम रोशन किया है। 13वीं लद्दाख मैराथन के तहत आयोजित इस बेहद मुश्किल दौड़ को डॉ. मुश्ताक ने 11 घंटे 20 मिनट 9 सेकंड में पूरा किया। समुद्र तल से करीब 17,618 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर इतनी लंबी दूरी तय करना उनकी शारीरिक क्षमता और असाधारण सहनशक्ति को दर्शाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह इस चुनौती को पूरा करने वाले कश्मीर घाटी के पहले एथलीट बताए जा …
पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे और वहां की सुरक्षा एजेंसियों के बीच कथित संपर्क को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रेजोनेंट न्यूज की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के टारबेला बांध के आसपास लश्कर-ए-तैयबा के कैडरों के साथ पाकिस्तान सेना की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (एसएसजी) से जुड़े कर्मियों को देखा गया। रिपोर्ट में एक वीडियो का हवाला देते हुए इसे प्रशिक्षक और प्रशिक्षुओं के बीच संभावित संपर्क के तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, इसलिए इन्हें फिलहाल रिपोर्ट में किए गए आरोप के तौर…
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की मार झेल चुके परिवारों के बच्चों और जीवनसाथियों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम अवसर सामने आया है। जम्मू-कश्मीर व्यावसायिक प्रवेश परीक्षा बोर्ड (बीओपीईई) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए केंद्रीय पूल के तहत उपलब्ध चार एमबीबीएस सीटों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन सीटों का मकसद उन नागरिक परिवारों के सदस्यों को मेडिकल शिक्षा का अवसर देना है, जिन्होंने आतंकवाद की वजह से अपने परिवार के किसी सदस्य को खोया है। ऐसे परिवारों के लिए यह पहल केवल दाखिले का एक मौका नहीं, बल्कि मुश्किल हालात से निकलकर सम्मानजनक और बेहतर भव…
कश्मीर की दूरदराज वादियों में रहने वाले बच्चों के लिए अच्छी तालीम तक पहुंच कभी आसान नहीं रही है। पहाड़ी इलाकों, सीमित संसाधनों और घर से दूर शिक्षण संस्थानों की चुनौतियों के बीच भी कई नौजवान अपनी मेहनत और हौसले से ऐसी मिसालें कायम कर रहे हैं, जो पूरी वादी के लिए उम्मीद और प्रेरणा का सबब बन रही हैं। मावरहनवारा जैसे दूरदराज गांव से निकलकर डॉक्टर बनने वाली आर्मी गुडविल स्कूल नोगाम की एक पूर्व छात्रा की कहानी भी इसी बदलती तस्वीर की गवाही देती है। उन्होंने न सिर्फ अपनी मेहनत से नीट परीक्षा में कामयाबी हासिल की, बल्कि वर्ष 2025 में राजकीय मेडिकल कॉले…
कश्मीर की वादियों की खूबसूरती और यहां की रचनात्मक क्षमता को उस समय नई पहचान मिली, जब मशहूर संगीतकार और ऑस्कर विजेता कलाकार ए.आर. रहमान ने जम्मू-कश्मीर के अपने हालिया दौरे के दौरान घाटी को बेहद खूबसूरत और मुबारक करार दिया। विज्ञापन की शूटिंग के सिलसिले में कश्मीर पहुंचे रहमान ने यहां की प्राकृतिक खूबसूरती से प्रभावित होकर कहा कि वादी की असल पहचान उसकी हसीन फिजाओं, संस्कृति और लोगों की मेहमाननवाजी में है। उनके इस नजरिये ने कश्मीर को लेकर देश और दुनिया में बनने वाली सकारात्मक तस्वीर को और मजबूत करने का काम किया है। रहमान ने जम्मू-कश्मीर में आयोजि…
कश्मीर की पहचान सिर्फ उसकी खूबसूरत वादियों, झीलों और पहाड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही उसकी दस्तकारी भी इस सरज़मीन की तहज़ीब और सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। श्रीनगर में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी में 26 स्टॉलों के जरिए कश्मीर के जीआई-टैग हासिल कर चुके और धीरे-धीरे लुप्त होने की कगार पर पहुंच रहे पारंपरिक शिल्पों को लोगों के सामने पेश किया गया। प्रदर्शनी ने स्थानीय दस्तकारों की महीन कारीगरी, हुनर और मेहनत को खरीदारों तथा सैलानियों तक पहुंचाने का एक अहम मंच मुहैया कराया, जिससे कश्मीर की पारंपरिक दस्तकारी को नए बाजार और नई…
कश्मीर की मिट्टी से निकली लोककथाओं, पुरानी यादों और विस्थापन के दर्द को पर्दे पर उतारने वाली फिल्म ‘तसरुफदार द जिन्न्स ऑफ कश्मीर’ ने जम्मू-कश्मीर के सिनेमाई सफर में एक अहम पड़ाव दर्ज किया है। 10 सितंबर 2026 को आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू-कश्मीर में फिल्म ने ‘जेएंडके सिलेक्ट’ श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हासिल किया। कपिल मट्टू के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कामयाबी ने न सिर्फ इसकी रचनात्मकता को पहचान दिलाई, बल्कि वादी के उन फिल्मकारों के लिए भी नई उम्मीद जगाई है, जो अपनी जमीन से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे तक पहुंचाने…

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