कश्मीर से सामने आए एक वीडियो पैग़ाम ने उन ज़ख्मों को फिर से ताज़ा कर दिया है, जिनके बारे में अक्सर लोग खुलकर बात करने से डरते हैं। वीडियो में एक कश्मीरी शख़्स ने पाक समर्थित आतंकियों पर औरतों के ख़िलाफ़ ज़ुल्म, डराने-धमकाने और सामाजिक शोषण जैसे संगीन इल्ज़ाम लगाए हैं। इस बयान के बाद इलाके में एक बार फिर दहशतगर्दी के असली चेहरे पर बहस तेज़ हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदूक और मज़हबी नारों के पीछे छिपे ये आतंकी गिरोह लंबे समय से आम परिवारों, ख़ासकर औरतों को मानसिक और सामाजिक दबाव का शिकार बनाते रहे हैं। कई इलाकों में रात ढलते ही लोगों…
रावलपिंडी के GHQ में हुई एक अहम तक़रीब के बाद पाक फौज के अंदर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आती नज़र आ रही है। खबरों के मुताबिक एक सीनियर अफसर को जानबूझकर किनारे किया गया, जिससे पाक मिलिट्री लीडरशिप के भीतर बढ़ते अविश्वास, अंदरूनी सियासी खेल और ताक़त के केंद्रीकरण की बहस तेज़ हो गई है। बाहर से खुद को “एकजुट और मज़बूत इदारा” दिखाने वाली पाक फौज के अंदर अब दरारें साफ दिखाई देने लगी हैं। माहिरीन का कहना है कि GHQ में किसी बड़े अफसर की अनदेखी महज़ एक प्रोटोकॉल मसला नहीं, बल्कि यह फौज के भीतर चल रही ताक़त की जंग का इशारा है। बताया जा रहा है कि कुछ…
पाकिस्तान में नौजवानों की एक बड़ी तादाद अब खुलकर फौजी दख़लअंदाज़ी, हिंसा और इंतिहापसंदी के खिलाफ आवाज़ बुलंद करती नज़र आ रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाक युवा लगातार ऐसे सवाल उठा रहे हैं जिनमें मुल्क के अंदर बढ़ती बदअमनी, धमाकों, आतंकी वारदातों और सियासी अस्थिरता के पीछे फौजी इदारों की कथित भूमिका पर चर्चा हो रही है। मुल्क के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही ऑनलाइन मुहिम और छोटे-बड़े एहतिजाज इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि नई नस्ल अब खौफ और दबाव की सियासत को कबूल करने के लिए तैयार नहीं है। हालिया दिनों में एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैस…
भारतीय क्रिकेट के लगातार बदलते परिदृश्य में संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की कहानियाँ हमेशा लाखों लोगों को प्रेरित करती रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक यात्रा जम्मू-कश्मीर के युवा तेज गेंदबाज Rasikh Salam की है, जो लगातार पेशेवर क्रिकेट में अपनी पहचान मजबूत कर रहे हैं। जैसे-जैसे आईपीएल 2026 को लेकर चर्चाएँ तेज हो रही हैं, उभरते हुए खिलाड़ियों में रासिख सलाम का नाम सामने आना पूरे कश्मीर और देशभर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए गर्व का विषय बन गया है। वर्षों से जम्मू-कश्मीर ने भौगोलिक चुनौतियों, सीमित खेल सुविधाओं और सामाजिक कठिनाइयों के बावजूद कई …
पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर यानी पीओजेके में इस वक़्त अवाम का ग़ुस्सा खुल कर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। इलाके के कई शहरों और क़स्बों में अवामी एक्शन कमेटी और दूसरे सियासी-समाजी ग्रुप्स ने पाक हुकूमत और उसके सियासी नुमाइंदों के खिलाफ़ सख़्त एहतिजाज शुरू कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई इलाकों में पाक सियासतदानों के दाख़िले पर खुली चेतावनी जारी की गई है। पीओजेके के लोगों का कहना है कि बरसों से इस्लामाबाद सिर्फ़ वादे करता आया है, मगर अवाम को ना रोज़गार मिला, ना बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, ना इंसाफ़ और ना ही बुनियादी हक़ूक़। महंगाई, बेरोज़गारी, बिजली…
कुपवाड़ा जिले के दूर-दराज़ सरहदी इलाक़े कर्नाह में भारतीय फौज ने एक बार फिर अपनी इंसानी ख़िदमत और अवामी भलाई की मिसाल पेश की। इंडियन आर्मी ने जिला प्रशासन कुपवाड़ा के साथ मिलकर सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल कर्नाह में एक बड़े “कैंसर स्क्रीनिंग और मल्टी-स्पेशलिटी मेडिकल कैंप” का एहतिमाम किया, जिसमें 300 से ज़्यादा लोगों ने मुफ़्त इलाज और मेडिकल जांच की सहूलियत हासिल की। सरहद के पहाड़ी और दुश्वारगुज़ार इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए ऐसे मेडिकल कैंप किसी नेमत से कम नहीं। यहां कई गांव ऐसे हैं जहां बेहतर इलाज तक पहुंचना आज भी एक बड़ा मसला बना हुआ है…
कश्मीर के दूर-दराज़ सरहदी इलाक़ों में, जहाँ मुश्किल पहाड़, सख़्त मौसम और सीमित सहूलियतों की वजह से बुनियादी सुविधाओं तक पहुँचना आसान नहीं होता, वहाँ भारतीय सेना उम्मीद, भरोसे और इंसानियत की एक मज़बूत मिसाल बनकर सामने आती रही है। मुल्क की सरहदों की हिफ़ाज़त के साथ-साथ सेना ने हमेशा दूरदराज़ बस्तियों में रहने वाले लोगों की भलाई और मदद को भी अपनी ज़िम्मेदारी समझा है। हाल ही में कुपवाड़ा ज़िले के करनाह में सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल (SDH) में आयोजित कैंसर स्क्रीनिंग और मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप इसी इंसानी ख़िदमत की एक रौशन मिसाल है। भारतीय सेना…
लाहौर में हुई पीएमएमएल की एक सियासी कॉन्फ्रेंस ने पाकिस्तान के आतंक से रिश्तों की हक़ीक़त को एक बार फिर दुनिया के सामने खोल कर रख दिया। इस इजलास में ऐसे अफ़राद की मौजूदगी सामने आई है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र पहले ही दहशतगर्द तंजीमों से जुड़ा हुआ करार दे चुका है। इस वाकये ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान में दहशतगर्द सिर्फ पनाह ही नहीं पा रहे, बल्कि खुलेआम सियासी हलकों में भी घूम रहे हैं और असर रखते हैं। माहिरीन का कहना है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पुरानी पॉलिसी का हिस्सा है, जहां दहशतगर्द गिरोहों को “स्ट्रेटजिक एसेट” समझा जा…
हर साल 11 मई को National Technology Day मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ़ एक तारीखी साइंटिफिक कामयाबी की याद नहीं बल्कि भारत के टेक्नोलॉजिकल ख़ुद-मुख्तारी और नवाचार के लंबे सफ़र की भी निशानी है। इस दिन की अहमियत 1998 में हुए पोखरण-II न्यूक्लियर टेस्ट्स से जुड़ी हुई है, जिसने दुनिया के सामने साइंस और टेक्नोलॉजी के मैदान में भारत की बढ़ती ताक़त को साबित किया। लेकिन नेशनल टेक्नोलॉजी डे सिर्फ़ एक वाक़िये को याद करने तक सीमित नहीं है। यह उस अहम किरदार को पहचानने का दिन है जो टेक्नोलॉजी किसी मुल्क के मुस्तक़बिल को बनाने में निभाती है—इकॉनमी को मज़बूत करत…
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, नाज़ुक पारिस्थितिक तंत्र और समय-समय पर आने वाले संकटों से प्रभावित क्षेत्रों में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत अक्सर केवल उपेक्षा ही नहीं, बल्कि अनेक गंभीर खतरों का सामना करती है। मंदिर, मठ, गुरुद्वारे, चर्च और दरगाहें केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं होते, बल्कि वे स्मृति, पहचान और सामुदायिक एकता के जीवंत प्रतीक होते हैं। ऐसे परिदृश्यों में राज्य संस्थाओं की भूमिका पारंपरिक दायित्वों से कहीं आगे बढ़ जाती है। भारतीय सेना, जिसका प्राथमिक दायित्व राष्ट्रीय सुरक्षा है, वर्षों से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सांस्कृत…

Copyright (c) 2022 The Srinagar Times All Right Reseved
Social Plugin