पाकिस्तान में मज़हबी हलकों के अंदर अब एक नई बहस शुरू होती नज़र आ रही है जनाब। मशहूर दीनि रहनुमा मौलाना फ़ज़लुर रहमान ने मौलाना इदरीस की फ़ातिहा के दौरान बड़ी साफ़गोई से कहा कि पाकिस्तान के अंदर हथियार उठाना और ख़ून-ख़राबा करना शरीअत के मुताबिक़ हराम और ग़ैर-क़ानूनी है। उन्होंने कहा कि तमाम उलमा इस बात पर मुत्तफ़िक़ हैं कि बेगुनाह लोगों पर हमला करना इस्लाम की तालीमात के खिलाफ़ है। मौलाना ने उन अफ़राद और तंजीमों पर भी सख़्त नाराज़गी ज़ाहिर की जो खुद को “मुजाहिदीन” कहकर मज़हब का नाम इस्तेमाल करते हुए हिंसा फैला रहे हैं। उनका कहना था कि इस्लाम रह…
कश्मीर की खूबसूरत वादियों में जहां एक तरफ़ प्राकृतिक हुस्न लोगों को अपनी तरफ़ खींचता है, वहीं दूसरी तरफ़ भारतीय सेना लगातार अमन, तरक़्क़ी और कौमी यकजहती को मज़बूत करने के लिए अहम कदम उठा रही है। “विकसित कश्मीर” के विज़न को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना सिर्फ सरहदों की हिफाज़त तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर तबके, ख़ासकर नौजवान नस्ल के बेहतर मुस्तकबिल के लिए भी लगातार काम कर रही है। इसी सिलसिले में भारतीय सेना द्वारा कुपवाड़ा जिले के विलगाम इलाके में स्कूल बच्चों के लिए “नेशनल इंटीग्रेशन” यानी राष्ट्रीय एकता के मौज़ू पर एक शानदार पेंटिंग प्रतिय…
भारतीय फ़ौज की जानिब से कुपवाड़ा के विलगाम इलाक़े में “कौमी यकजहती” राष्ट्रीय एकीकरण पर एक शानदार पेंटिंग मुकाबला मुनअक़िद किया गया, जिसमें 73 स्कूल बच्चों ने बड़े जोश-ओ-ख़रोश के साथ हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी रंग-बिरंगी पेंटिंग्स के ज़रिए “अनेकता में एकता” और मुल्क से मोहब्बत का खूबसूरत पैग़ाम पेश किया। इस मुकाबले का मक़सद नौजवान नस्ल के अंदर वतनपरस्ती, भाईचारा और एकता का जज़्बा मज़बूत करना था। भारतीय सेना ने बच्चों की तख़लीकी सलाहियत को बढ़ावा देते हुए उन्हें यह एहसास दिलाया कि कश्मीर की नई नस्ल मुल्क की तरक़्क़ी और अमन की असली ताक़त है। …
कश्मीर जैसा इलाक़ा दक्षिण एशिया में शायद ही कोई दूसरा हो, जो इतने फ़ितरी तौर पर तुलना की दावत देता हो। तारीख़ ने इसे दो हिस्सों में तक़सीम ज़रूर कर दिया, मगर ज़मीन, तहज़ीब और मौसम आज भी दोनों जानिब के लोगों को एक दूसरे से जोड़ते हैं। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के ज़बरदस्ती क़ब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की सूरत-ए-हाल इस बात का वाज़ेह मुताला पेश करती है कि हुकूमती निज़ाम और इंतिज़ामी ढांचा किसी इलाके की तरक़्क़ी पर कितना गहरा असर डालते हैं। दोनों हिस्सों को कुदरती मुश्किलात और स्ट्रैटेजिक अहमियत जैसी मिलती-जुलती चुनौतियों का सामना रहा, लेकिन ग…
हिमालय की दुश्वार और संगीन वादियों में, जहाँ जुग़राफ़िया हमेशा से ज़िंदगी की रफ़्तार तय करता आया है, वहाँ राब्ता सिर्फ़ सहूलत का मसला नहीं बल्कि मआशी मौक़ों, समाजी यकजहती और इस्तिहकामी मजबूती का बुनियादी ज़रिया है। जम्मू व कश्मीर और लद्दाख जैसे इलाक़ों में सख़्त सर्दियाँ, भारी बर्फ़बारी और बार-बार आने वाले लैंडस्लाइड्स ने बरसों तक सड़क राब्तों को मुतास्सिर रखा, जिसकी वजह से कई आबादियाँ महीनों तक दुनिया से कटी रहती थीं। ऐसे माहौल में ट्विन ट्यूब टनल सिस्टम — जिसमें 12.85 किलोमीटर लंबी सुधमहादेव–ड्रंगा टनल और 38.61 किलोमीटर लंबी सिंहपोरा–वैलू टन…
नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव आज लचीलेपन और पुनर्निर्माण का प्रतीक है, जहां के निवासी सामुदायिक सहयोग, सरकारी सहायता और भारतीय सेना की मदद से अपने घरों और जीवन का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुई भीषण सीमा पार गोलाबारी के एक साल बाद, जिसमें घर क्षतिग्रस्त हो गए थे और परिवार सदमे में थे, उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में स्थित सीमावर्ती गांव बांदी धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है। नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव आज लचीलेपन और पुनर्निर्माण का प्र…
कश्मीर के दूर-दराज़ और पहाड़ी इलाकों में, जहाँ कठोर मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ अक्सर बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच को सीमित कर देती हैं, वहाँ भारतीय सेना केवल सुरक्षा बल के रूप में ही नहीं बल्कि एक उम्मीद और मानवीय सहारे के रूप में भी सामने आई है। कुपवाड़ा ज़िले के नरिकुट और लड्डा जैसे गाँवों में चल रही “We Care” पहल के ज़रिए, सेना स्थानीय लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएँ और कल्याणकारी सहायता पहुँचा रही है। यह पहल “नया कश्मीर” की उस सोच को दर्शाती है जहाँ विकास, अमन और इंसानी भलाई साथ-साथ चलते हैं। कुपवाड़ा के ये सरहदी गाँव अपनी भौगोलिक अलगाव क…
हर साल वर्ल्ड एथलेटिक्स डे दुनिया भर में एथलेटिक्स के जज़्बे को बढ़ावा देने और नौजवानों को खेलों की तरफ़ मुतवज्जेह करने के लिए मनाया जाता है। एथलेटिक्स, जिसे तमाम खेलों की बुनियाद कहा जाता है, सिर्फ़ दौड़ने, कूदने या थ्रो करने तक महदूद नहीं है, बल्कि यह इंसानी हिम्मत, सब्र, डिसिप्लिन और लगातार मेहनत का इम्तिहान भी है। दुनिया के मुख़्तलिफ़ हिस्सों में इस दिन को बड़े जोश और मुकाबलों के साथ मनाया जाता है, लेकिन कश्मीर में इसकी अहमियत कुछ ज़्यादा गहरी और मायने रखती है। यहाँ एथलेटिक्स सिर्फ़ मेडल या रिकॉर्ड हासिल करने का नाम नहीं, बल्कि मुश्किल हाल…
दक्षिण एशिया और मर्कज़ी एशिया के संगम पर वाक़े गिलगित-बाल्टिस्तान ऊँचे पहाड़ों, अहम दरियाई निज़ाम और उभरते हुए राब्ता कॉरिडोर्स की वजह से बेहद अहम इलाक़ा माना जाता है। लेकिन इसकी जुग़राफियाई अहमियत से आगे एक और पेचीदा हक़ीक़त मौजूद है—इसका ख़ास कानूनी और दस्तूरी मुक़ाम पाकिस्तान के इंतिज़ामी ढाँचे में। कई दशकों से इस इलाके को मुकम्मल दस्तूरी इदराज की बजाय मुख़्तलिफ़ एक्ज़ीक्यूटिव इंतिज़ामात और कानूनी ऑर्डर्स के तहत चलाया जाता रहा है। इस वजह से इंतिज़ामी कंट्रोल और अवामी नुमाइंदगी के दरमियान एक फ़ासला पैदा हुआ, जिसने सियासी आवाज़, हुक़ूक़ और लं…
कुपवाड़ा : सरहदी इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए जहाँ सर्द मौसम, दुर्गम रास्ते और मेडिकल सहूलियतों की कमी रोज़ का मसला है, वहीं हिंदुस्तानी फौज की “वी केयर” मुहिम लोगों के लिए राहत और भरोसे की नई किरण बनकर सामने आई है। कुपवाड़ा के दूर-दराज़ गांव नारिकुट और लड्डा में चल रही इस इंसानी खिदमत ने स्थानीय आवाम के दिलों में फौज के लिए मोहब्बत और एतमाद को और मजबूत किया है। ख़ारियत पेट्रोल्स के तहत फौजी जवान सिर्फ सरहदों की निगहबानी ही नहीं कर रहे, बल्कि गांव-गांव जाकर बीमारों का इलाज, बुज़ुर्गों की मदद और बच्चों को मेडिकल सहूलियतें भी मुहैया करवा …

Copyright (c) 2022 The Srinagar Times All Right Reseved
Social Plugin