इस्लामाबाद से एक अहम और संगीन बयान सामने आया है, जिसने ना सिर्फ पाकिस्तान की अंदरूनी सियासत बल्कि अंतरराष्ट्रीय हलकों में भी नई बहस को जन्म दे दिया है। पाकिस्तान के वज़ीर-ए-दिफ़ा ने एक खुली तक़रीर में अमेरिका पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा कि “अमेरिका ने पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया और फिर फेंक दिया।” यह बयान 12 अप्रैल 2026 को सामने आया, और इसके लहजे ने साफ़ तौर पर वाशिंगटन और इस्लामाबाद के दरमियान रिश्तों में मौजूद तल्ख़ी को उजागर कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक जज़्बाती बयान नहीं, बल्कि लंबे अरसे से चले आ रहे उस एह…
इस्लामाबाद में स्थित जिन्ना कन्वेंशन सेंटर को अचानक एक नए नाम से जाना जाने लगा है। इसे अब “इंटरनेशनल मीडिया ऑडिटोरियम” के तौर पर रीब्रांड किया गया है, ठीक उसी वक्त जब यहां अमेरिका और ईरान के दरमियान अहम बातचीत की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि 11 अप्रैल 2026 को इस तब्दीली को अमल में लाया गया। लेकिन ये महज़ एक नाम की तब्दीली नहीं, बल्कि इसके पीछे की तारीख़ और इस जगह का माज़ी कई तरह के सवालात खड़े कर रहा है। जिन्ना कन्वेंशन सेंटर वही मकाम रहा है जहां पहले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे तंजीमों से जुड़े लोगों की तकरीरें और इजलासात…
पारंपरिक जल चक्कियाँ, जो कुदरती पानी के बहाव से चलती थीं, सदियों से खास तौर पर पहाड़ी इलाकों में ग्रामीण समाज की ज़रूरतों को पूरा करती रही हैं। अतीत में, ये चक्कियाँ अनाज पीसने का एक अहम ज़रिया थीं, उस दौर से पहले जब बिजली से चलने वाली मशीनें आम नहीं हुई थीं। लेकिन टेक्नोलॉजी में तरक़्क़ी के साथ-साथ, कई पारंपरिक चक्कियाँ इस्तेमाल से बाहर हो गईं और धीरे-धीरे खस्ता हाल हो गईं। इनका पुनर्निर्माण न सिर्फ़ हमारी सांस्कृतिक विरासत को महफूज़ रखता है, बल्कि सतत ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देता है। पारंपरिक जल चक्कियाँ देसी इंजीनियरिंग और सतत तकनीक की…
पाकिस्तान से सामने आ रही कुछ तस्वीरें और वीडियोज़ ने एक बार फिर दहशतगर्दी और हुकूमती इंतज़ामिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बैन के बावजूद कुछ चरमपंथी गिरोह खुलेआम रैलियों में नज़र आ रहे हैं, और बिना किसी खौफ के अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। इन मंज़रों को देखकर ऐसा महसूस होता है कि कानून की पकड़ कहीं न कहीं कमज़ोर पड़ती दिख रही है, जहां ऐसे अनासिर (तत्व) पब्लिक जगहों का इस्तेमाल करके अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि आम अवाम का इनसे कोई खास…
कश्मीर के पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले को लेकर एक नई और हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और पोस्ट के मुताबिक, पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक टॉप कमांडर ने ऐसा दावा किया है, जिसने पूरी सियासत में हलचल मचा दी है। बताया जा रहा है कि इस आतंकी ने कबूल किया है कि पहलगाम में हुआ हमला पाकिस्तान की सियासी और वैश्विक हैसियत को बढ़ाने का ज़रिया बना। इस बयान के बाद पाकिस्तान की नीयत और उसकी दहशतगर्दी से जुड़ी कड़ियों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच खबरें ये भी हैं कि इस्ला…
कश्मीर की आत्मा को समझने के लिए हिमालय की ऊँची चोटियों से आगे बढ़कर उसके लोगों के दिलों में झाँकना पड़ता है। जब चिला-ए-कलाँ की कड़ाके की ठंड घाटी को अपनी गिरफ्त में ले लेती है और जीवन के किनारे जमने लगते हैं, तब भी लोग हार नहीं मानते। वे खुद को फ़ेरन की गर्माहट में लपेटते हैं और तांबे के समोवर के पास बैठकर कहानियाँ और अपनापन बाँटते हैं। फ़ेरन और समोवर केवल सांस्कृतिक वस्तुएँ नहीं हैं, बल्कि वे उस पहचान के जीवंत प्रतीक हैं, जिसने सदियों के साम्राज्यवादी लालच, शोषण और राजनीतिक उथल-पुथल को सहा है। कश्मीरी पहचान का सार, जिसे कश्मीरियत कहा जाता है,…
Pakistan के रक्षा मंत्री Khawaja Asif के एक हालिया बयान ने पूरे क्षेत्र में सियासी हलचल तेज़ कर दी है। एक इंटरव्यू और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने भारत और इज़राइल को “मुस्लिम दुनिया का असली दुश्मन” करार दिया, जिसके बाद इस बयान पर सख़्त प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कश्मीर के नजरिए से देखें तो इस तरह की बयानबाज़ी माहौल को और ज़्यादा तनावपूर्ण बना सकती है। यहां के सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब एक जिम्मेदार ओहदे पर बैठा सियासतदान इस तरह की सख़्त भाषा इस्तेमाल करता है, तो उसका असर सरहदी इलाकों में सीधा महसूस किया जाता है। माहिरी…
इस्लामाबाद से सामने आने वाली एक अहम वीडियो और बयान ने Pakistan की सियासी हक़ीक़त पर एक बार फिर सख़्त सवालात खड़े कर दिए हैं। सीनियर सहाफी अज़ीम चौधरी का बयान इन दिनों काफ़ी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने मुल्क की ख़ुदमुख़्तारी और हुकूमती निज़ाम पर खुलकर तन्क़ीद की है। अज़ीम चौधरी के मुताबिक, पाकिस्तान में ना सिर्फ़ ख़ुद्दारी की कमी है, बल्कि ये भी इल्ज़ाम लगाया गया कि यहां की हुकूमतें बाहरी असर-ओ-रसूख़ के बिना मुकम्मल तौर पर क़ायम नहीं हो पातीं। उनका कहना है कि मुल्क की असल सियासी ताक़त अंदरूनी नहीं बल्कि बाहरी इशारों पर चलती नज़र आती है। वीडिय…
इस्लामाबाद से आने वाली ताज़ा मालूमात ने एक बार फिर Pakistan की सियासी सूरत-ए-हाल पर गंभीर सवालात खड़े कर दिए हैं। दावा तो ये किया जाता है कि मुल्क दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही कहानी बयान करती नज़र आ रही है। मिलने वाली तस्वीरों और रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब असेंबली के स्पीकर मलिक अहमद ख़ान की मुलाक़ात लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े अफ़राद के साथ हुई। इन अफ़राद में सैफ़ुल्लाह कसूरी, याक़ूब शेख़ और राना अशफ़ाक जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। ये मुलाक़ात सिर्फ़ एक रस्मी ताज़ियत नहीं लगती, बल्कि इससे सियासत और दहशतगर…
कश्मीर से जुड़ी एक अहम डेवलपमेंट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की अंदरूनी एडवाइजरी सामने आई है, जिसने संगठन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जारी हिदायतों में आतंकियों को साफ तौर पर कहा गया है कि वे सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें, आम लोगों से किसी भी तरह का ताल्लुक न रखें और ज्यादा से ज्यादा तन्हाई में रहें। एडवाइजरी के मुताबिक, “दुनिया भर में तुम पर नजर रखी जा रही है,” जैसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल कर कैडर के अंदर खौफ पैदा करने की कोशिश की गई है। साथ ही, किसी भी किस्म की पर्सनल जानकारी—जैसे लोकेशन, मोबाइल नंबर या रोज़मर्रा की एक्टिविटी—…

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