कुपवाड़ा जिले के दूर-दराज़ सरहदी इलाक़े कर्नाह में भारतीय फौज ने एक बार फिर अपनी इंसानी ख़िदमत और अवामी भलाई की मिसाल पेश की। इंडियन आर्मी ने जिला प्रशासन कुपवाड़ा के साथ मिलकर सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल कर्नाह में एक बड़े “कैंसर स्क्रीनिंग और मल्टी-स्पेशलिटी मेडिकल कैंप” का एहतिमाम किया, जिसमें 300 से ज़्यादा लोगों ने मुफ़्त इलाज और मेडिकल जांच की सहूलियत हासिल की। सरहद के पहाड़ी और दुश्वारगुज़ार इलाक़ों में रहने वाले लोगों के लिए ऐसे मेडिकल कैंप किसी नेमत से कम नहीं। यहां कई गांव ऐसे हैं जहां बेहतर इलाज तक पहुंचना आज भी एक बड़ा मसला बना हुआ है…
कश्मीर के दूर-दराज़ सरहदी इलाक़ों में, जहाँ मुश्किल पहाड़, सख़्त मौसम और सीमित सहूलियतों की वजह से बुनियादी सुविधाओं तक पहुँचना आसान नहीं होता, वहाँ भारतीय सेना उम्मीद, भरोसे और इंसानियत की एक मज़बूत मिसाल बनकर सामने आती रही है। मुल्क की सरहदों की हिफ़ाज़त के साथ-साथ सेना ने हमेशा दूरदराज़ बस्तियों में रहने वाले लोगों की भलाई और मदद को भी अपनी ज़िम्मेदारी समझा है। हाल ही में कुपवाड़ा ज़िले के करनाह में सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल (SDH) में आयोजित कैंसर स्क्रीनिंग और मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप इसी इंसानी ख़िदमत की एक रौशन मिसाल है। भारतीय सेना…
लाहौर में हुई पीएमएमएल की एक सियासी कॉन्फ्रेंस ने पाकिस्तान के आतंक से रिश्तों की हक़ीक़त को एक बार फिर दुनिया के सामने खोल कर रख दिया। इस इजलास में ऐसे अफ़राद की मौजूदगी सामने आई है, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र पहले ही दहशतगर्द तंजीमों से जुड़ा हुआ करार दे चुका है। इस वाकये ने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान में दहशतगर्द सिर्फ पनाह ही नहीं पा रहे, बल्कि खुलेआम सियासी हलकों में भी घूम रहे हैं और असर रखते हैं। माहिरीन का कहना है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि पाकिस्तान की पुरानी पॉलिसी का हिस्सा है, जहां दहशतगर्द गिरोहों को “स्ट्रेटजिक एसेट” समझा जा…
हर साल 11 मई को National Technology Day मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ़ एक तारीखी साइंटिफिक कामयाबी की याद नहीं बल्कि भारत के टेक्नोलॉजिकल ख़ुद-मुख्तारी और नवाचार के लंबे सफ़र की भी निशानी है। इस दिन की अहमियत 1998 में हुए पोखरण-II न्यूक्लियर टेस्ट्स से जुड़ी हुई है, जिसने दुनिया के सामने साइंस और टेक्नोलॉजी के मैदान में भारत की बढ़ती ताक़त को साबित किया। लेकिन नेशनल टेक्नोलॉजी डे सिर्फ़ एक वाक़िये को याद करने तक सीमित नहीं है। यह उस अहम किरदार को पहचानने का दिन है जो टेक्नोलॉजी किसी मुल्क के मुस्तक़बिल को बनाने में निभाती है—इकॉनमी को मज़बूत करत…
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, नाज़ुक पारिस्थितिक तंत्र और समय-समय पर आने वाले संकटों से प्रभावित क्षेत्रों में सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत अक्सर केवल उपेक्षा ही नहीं, बल्कि अनेक गंभीर खतरों का सामना करती है। मंदिर, मठ, गुरुद्वारे, चर्च और दरगाहें केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं होते, बल्कि वे स्मृति, पहचान और सामुदायिक एकता के जीवंत प्रतीक होते हैं। ऐसे परिदृश्यों में राज्य संस्थाओं की भूमिका पारंपरिक दायित्वों से कहीं आगे बढ़ जाती है। भारतीय सेना, जिसका प्राथमिक दायित्व राष्ट्रीय सुरक्षा है, वर्षों से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में सांस्कृत…
कुपवाड़ा की होनहार बेटी मीर सहरिश ने NDA इम्तिहान में शानदार कामयाबी हासिल कर के पूरे जम्मू-कश्मीर, खास तौर पर कुपवाड़ा जिले का नाम रौशन कर दिया है। मीर मोहल्ला लोन हारिए, कुपवाड़ा की रहने वाली मीर सहरिश, जो वाली मोहम्मद मीर साहब की बेटी हैं, ने मुल्क के सबसे प्रतिष्ठित डिफेंस ट्रेनिंग इदारे National Defence Academy (NDA) में अपनी जगह बना ली है। पूरे हिंदुस्तान से सिर्फ 24 लड़कियों का इस बार सिलेक्शन हुआ, जिनमें वादी-ए-कश्मीर की ये बेटी भी शामिल है। सहरिश की इस बड़ी कामयाबी को इलाके में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना…
हर साल मई के दूसरे इतवार को दुनिया भर में इंटरनेशनल मदर्स डे मनाया जाता है, एक ऐसा दिन जो माओं की बेपनाह मोहब्बत, उनकी कुर्बानियों और खानदान व समाज को सँवारने में उनके अहम किरदार को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने के लिए मनाया जाता है। दुनिया के मुख़्तलिफ़ मुल्कों में यह दिन फूलों, तोहफ़ों और जज़्बाती पैग़ामों के साथ मनाया जाता है। यह दिन शुक्रगुज़ारी, मोहब्बत और एहतराम का पैग़ाम लेकर आता है। लेकिन दुनिया के कई दूसरे मौक़ों की तरह मदर्स डे का मतलब भी हर जगह एक जैसा नहीं होता। कश्मीर में माँ होने का मतलब सिर्फ़ ममता और परवरिश तक महदूद नहीं है, यहाँ मा…
गिलगित-बाल्टिस्तान की बुलंद और संगीन पहाड़ियां बरसों से वहां के अवाम की चीख़ों की गवाह रही हैं, लेकिन आज ये आवाज़ें बगावत की गूंज में तब्दील हो चुकी हैं। हालिया दिनों में एहतिजाज (प्रदर्शनों) के दौरान शिया बच्चों और नौजवानों — जो इस इलाके का मुस्तकबिल (भविष्य) हैं — की मौत ने फौजी निज़ाम के चेहरे से नक़ाब उतार दिया है। गिलगित की गलियों से लेकर मुज़फ्फराबाद के कस्बों तक अब सिर्फ शिकायत नहीं, बल्कि कब्ज़े वाली ताकत के खिलाफ खुला इंकार सुनाई दे रहा है। बेगुनाह शहरीयों पर गोलियां चला कर पाकिस्तान आर्मी ने सिर्फ आवाज़ें दबाने की कोशिश नहीं की, बल…
गुलमर्ग के सनशाइन पीक इलाके में एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन उस वक़्त अंजाम दिया गया, जब एक सिविल हेलिकॉप्टर में टेक्निकल खराबी आने की वजह से 24 सैलानी ऊँचाई वाले इलाके में फँस गए। इस मुश्किल घड़ी में भारतीय फ़ौज के चिनार वॉरियर्स, बारामुला एडमिनिस्ट्रेशन, गुलमर्ग डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर फ़ौरन राहत और बचाव कार्रवाई शुरू की और तमाम सैलानियों को महफ़ूज़ तरीके से नीचे लाया गया। यह वाक़या गुलमर्ग के मशहूर सनशाइन पीक इलाके में पेश आया, जो अपनी खूबसूरती और एडवेंचर टूरिज्म के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। बताया गया कि कश्…
उत्तर कश्मीर में इंसानी ख़िदमत की नई मिसाल क़ायम करते हुए भारतीय सेना की चिनार कोर ने “डैगर डेंटाथॉन” नामी एक महीने लंबा डेंटल हेल्थकेयर मुहिम कामयाबी से मुकम्मल किया। ऑपरेशन सद्भावना के तहत चलाए गए इस ख़ास अभियान का मक़सद दूर-दराज़ और मेडिकल सहूलियतों से महरूम इलाकों तक बेहतर दांतों का इलाज और सेहत से जुड़ी जागरूकता पहुंचाना था। इस पहल ने कश्मीर के अवाम के दिलों में भरोसा, अपनापन और इंसानियत का पैगाम मज़बूत किया। इस मुहिम के दौरान भारतीय सेना की मेडिकल टीमों ने उत्तर कश्मीर के कई गांवों, स्कूलों और कम्युनिटी सेंटरों में जाकर मुफ़्त डेंटल चेकअ…

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