मुज़फ़्फ़राबाद से लेकर गिलगित-बाल्टिस्तान तक, जिस इलाक़े को पाकिस्तान “आज़ाद” कहता है, वही नाम अब सवालों के घेरे में आता जा रहा है, साहब। “पीओजेके” का ये लफ़्ज़ बहुतों के लिए सिर्फ़ एक लेबल बनकर रह गया है—एक ऐसा पर्दा, जिसके पीछे असली हालात छुपाए जाते हैं। ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बयान करती है। यहां के दरिया, पहाड़ और खनिज दौलत का इस्तेमाल तो ज़ोर-शोर से हो रहा है, मगर स्थानीय अवाम को उसका ना मुनासिब हिस्सा मिलता है, ना ही अपने मुस्तक़बिल के बारे में खुलकर बोलने का हक़। ज़मीनों के मसले, रोज़गार की कमी और बुनियादी सहूलतों की कमी—ये सब मिलकर उस…
दुबई/अबू धाबी से आई ये ख़बर बड़ी तकलीफ़देह है, साहब। यूएई से हज़ारों की तादाद में पाकिस्तानी शिया बिरादरी के लोगों को जबरन मुल्क से बाहर निकाला गया। सिर्फ़ डिपोर्ट ही नहीं किया गया, बल्कि उनके बैंक अकाउंट्स, जमा पूंजी और सालों की मेहनत से बनाए गए तमाम असासे भी जब्त कर लिए गए। बताया जा रहा है कि ये क़दम सियासी और फिरकापरस्ती (sectarian) तनाव के चलते उठाया गया है, जहां शिया कम्युनिटी को निशाना बनाया गया। जिन लोगों ने बरसों यूएई में मेहनत-मज़दूरी करके अपनी ज़िंदगी संवरी थी, आज वो सब कुछ गंवाकर खाली हाथ पाकिस्तान लौटने पर मजबूर हैं। वापसी पर हाल…
कश्मीर, जिसे अक्सर “धरती का स्वर्ग” कहा जाता है, अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अपार आर्थिक संभावनाओं के लिए जाना जाता है। भारत के उत्तरी छोर पर स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से अपनी आकर्षक वादियों, जीवंत परंपराओं और दृढ़ संकल्प वाली आबादी के लिए प्रसिद्ध रहा है। हाल के वर्षों में कश्मीर की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही है। यह लेख इस विकास के प्रमुख कारणों, सामने आने वाली चुनौतियों और क्षेत्र की पूरी क्षमता को उजागर करने में विभिन्न हितधारकों की भूमिक…
रणजी के पूर्व कप्तान समीउल्लाह बेग प्रशिक्षण का नेतृत्व कर रहे हैं। श्रीनगर : 2 मई 2026 जेफायर क्रिकेट अकादमी ने शुक्रवार को श्रीनगर के हरिनामबल क्रिकेट ग्राउंड में तीन दिवसीय निःशुल्क क्रिकेट कोचिंग शिविर का शुभारंभ किया, जो 4 मई, 2026 तक चलेगा। इस शिविर में विभिन्न आयु वर्ग के सैकड़ों महत्वाकांक्षी क्रिकेटरों ने भाग लिया है, जो इस क्षेत्र में खेल के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाता है। एक बयान के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य युवा क्रिकेटरों को संरचित प्रशिक्षण और पेशेवर मार्गदर्शन प्रदान करना है, जिसमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी, फील्डिंग और समग्र म…
कश्मीर की खूबसूरत वादियों में, जहाँ बुलंद पहाड़, पेचीदा रास्ते और ख़तरनाक ब्लाइंड टर्न्स अक्सर सफ़र को मुश्किल और हादसों को आम बना देते हैं, वहीं बांदीपोरा की एक होनहार बेटी ने अपनी ज़ेहानत, इल्मी सोच और इंसानी हमदर्दी से उम्मीद की एक नई शम्मा रौशन की है। आर्मी गुडविल स्कूल (AGS) बांदीपोरा की फ़ख्र फ़िज़ा फ़ैयाज़ ने न सिर्फ़ अपने स्कूल और पूरे इलाके का सर फ़ख्र से बुलंद किया है, बल्कि इंटरनेशनल स्टार किड्स अवॉर्ड्स में 23 से ज़्यादा ममालिक और 100 से अधिक तलबा के दरमियान अपनी शानदार कामयाबी दर्ज कराकर कश्मीर को आलमी सतह पर नई पहचान भी दी है। ये…
खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर इलाक़े से जो ख़बरात सामने आ रही हैं, वो दिल दहला देने वाली हैं। यहाँ के मुक़ामी लोगों का दर्द अब सिर्फ़ दास्तान नहीं रहा, बल्कि एक संगीन हक़ीक़त बन चुका है—जहाँ ज़िंदगी और मौत के दरमियान खड़ी है ख़ौफ़ की एक लंबी दीवार। मौलाना फ़ज़लुर रहमान ने हाल ही में बाजौर में पेश आए वाक़ियात का ज़िक्र करते हुए बताया कि पाक फ़ौज ने इस इलाक़े में ऐसे हमले किए जिनमें बेगुनाह शहरी, ख़ासकर औरतें और मासूम बच्चे, अपनी जान से हाथ धो बैठे। ये सिर्फ़ एक हादसा नहीं, बल्कि एक सिलसिला है—जहाँ आम आवाम को ही निशाना बनाया जा रहा है। सबसे अफ़सोसनाक…
कश्मीर के एक ख़ानदान के दो भाइयों की मौत—जो दो दहाइयों से ज़्यादा वक़्फ़े में हुई—बिला शक बेहद दर्दनाक है। ऐसे नुक़सान की हर दास्तान हमदर्दी, एहतियात और हक़ीक़त से वाबस्तगी की मुतालिबा करती है। लेकिन जब शख़्सी ग़म को इस तरह पेश किया जाए कि बिना ठोस सबूत के किसी निज़ामी मंसूबे का इशारा मिले, तो ये एक पेचीदा हक़ीक़त को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का ख़तरा पैदा करता है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में मुग़ल ख़ानदान की कहानी को इसी अंदाज़ में पेश किया गया, जहां एक मज़बूत इंसानी कहानी को एक तंग नज़रिये से दिखाया गया और कश्मीर के तनाज़े के…
29 अप्रैल 2026 को पहाड़ी इलाक़ा चौकीबाल एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का गवाह बना, जब लगातार बारिश के कारण एक पारंपरिक ढोक अचानक गिर गया। ऐसे हादसे दूर-दराज़ इलाकों में नए नहीं हैं, मगर हर बार ये कमजोर तबकों को गहरी चोट पहुंचाते हैं। इस मौके पर भारतीय सेना की फुर्तीली और इंसानी हमदर्दी से भरी कार्रवाई ने हालात को संभाल लिया, और सबसे बड़ी राहत यह रही कि किसी इंसानी जान का नुकसान नहीं हुआ। सुबह तक़रीबन 0830 बजे एक स्थानीय शख़्स ने खबर दी कि बारिश की वजह से एक ढोक ढह गया है। ढोक, गुज्जर और बकरवाल बिरादरी के लोग इस्तेमाल करते हैं—ये मौसमी ठिकाने होते ह…
कश्मीर के पुरसुकून इलाक़ा छोटीपोरा में भारतीय सेना की जानिब से एक अहम और क़ाबिले-तारीफ़ पहल देखने को मिली, जहां तलबा के लिए Essay Writing और Quiz मुक़ाबलों का एहतिमाम किया गया। इस इवेंट ने मक़ामी नौजवानों को न सिर्फ़ अपनी सलाहियत दिखाने का मौक़ा दिया, बल्कि उनके अंदर तालीम, एत्माद और क़ौमी यकजहती का जज़्बा भी मज़बूत किया। इस प्रोग्राम में स्कूलों और कॉलेजों से बड़ी तादाद में तलबा ने हिस्सा लिया। बच्चों ने मुल्की उसूलों, अपने करियर के ख़्वाब, समाजी ज़िम्मेदारियों और कश्मीर के बेहतर मुस्तक़बिल जैसे मौज़ूआत पर अपने ख़यालात बड़े एत्माद के साथ पेश …
पाकिस्तान में जारी ताज़ा हालात के दरमियान एक बार फिर मुल्क की फ़ौज पर संगीन इल्ज़ामात सामने आए हैं। मशहूर जर्नलिस्ट इमरान रियाज़ ख़ान के मुताबिक़, जहां दुनिया के दूसरे मुल्क जंग जैसे मुश्किल वक़्त में अपनी आवाम को राहत देने की कोशिश करते हैं, वहीं पाकिस्तान की फ़ौज ने इस हालात को मुनाफ़ा कमाने का ज़रिया बना लिया है। रिपोर्ट्स इशारा करती हैं कि मौजूदा तनाज़े के दौरान पाकिस्तान की मिलिट्री ने माली तौर पर सबसे ज़्यादा फ़ायदा उठाया है। दूसरी तरफ़, आम पाकिस्तानी शहरी—जो पहले ही महंगाई, बेरोज़गारी और बुनियादी सहूलतों की कमी से जूझ रहा है—उस पर टैक्स…

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