उत्तरी कश्मीर के तुलैल वैली के गांव निरू शॉट में उस वक़्त अफ़रा-तफ़री का माहौल पैदा हो गया जब एक भीषण आग ने रिहायशी इलाक़े को अपनी ज़द में ले लिया। आग की लपटें तेज़ी से फैल रही थीं और स्थानीय आबादी खौफ़ और बेबसी के आलम में फँस गई थी। ऐसे नाज़ुक वक़्त में भारतीय सेना ने फ़ौरन हरकत में आते हुए हालात पर क़ाबू पाने के लिए तेज़ और मुनज़्ज़म कार्रवाई की। मौके पर तैनात फौजी दस्तों ने बिना देर किए राहत और बचाव ऑपरेशन शुरू किया। आग से घिरे घरों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और ज़ख़्मी अफ़राद को तुरंत मेडिकल मदद फ़राहम की गई। सेना की तरफ़ से इमरज…
पाकिस्तान के सियासी और दिफ़ाई हल्कों में उस वक़्त सनसनी फैल गई जब मुल्क के डिफेंस मिनिस्टर की एक अहम मुलाक़ात की तस्वीरें सामने आईं, जिनमें उन्हें यासिर अराफ़ात बट के साथ देखा गया। यासिर बट को PMML-इस्लामाबाद का जनरल सेक्रेटरी बताया जाता है, लेकिन ताज़ा तन्क़ीदी जायज़ों और ख़ुफ़िया इनपुट्स के मुताबिक यह जमात महज़ एक सियासी चेहरा नहीं, बल्कि बैन की गई तन्ज़ीम लश्कर-ए-तैयबा का एक पर्दानशीं फ्रंट मानी जा रही है। यह मुलाक़ात ऐसे वक़्त में उजागर हुई है जब इससे महज़ 24 घंटे पहले यासिर बट की तस्वीरें पाकिस्तान के साबक़ा DG ISPR आसिफ ग़फ़ूर के साथ भी …
कश्मीर, जिसे अक्सर “धरती का स्वर्ग” कहा जाता है, अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अपार आर्थिक संभावनाओं के लिए जाना जाता है। भारत के उत्तरी छोर पर स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से अपनी आकर्षक वादियों, जीवंत परंपराओं और दृढ़ संकल्प वाली आबादी के लिए प्रसिद्ध रहा है। हाल के वर्षों में कश्मीर की अर्थव्यवस्था और पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो एक उज्ज्वल भविष्य की नींव रख रही है। यह लेख इस विकास के प्रमुख कारणों, सामने आने वाली चुनौतियों और क्षेत्र की पूरी क्षमता को उजागर करने में विभिन्न हितधारकों की भूमिक…
ख़ामोश वादियों में जहाँ हौसला और उम्मीद साथ-साथ चलते हैं, वहाँ तालीमी इदारे अक्सर तब्दीली के सबसे मज़बूत स्तंभ बन जाते हैं। आर्मी गुडविल स्कूल (एजीएस) राघवन में आयोजित डिबेट मुकाबला इसी हक़ीक़त की एक रौशन मिसाल बनकर सामने आया। यह महज़ एक अकादमिक प्रोग्राम नहीं था, बल्कि सोच, बयान और लीडरशिप का एक ज़िंदा मंच था, जहाँ नौजवान ज़ेहन अपने ख़यालात को चुनौती देने, रूढ़ियों को तोड़ने और अपनी आवाज़ की ताक़त को पहचानने के लिए एक साथ आए। आर्मी गुडविल स्कूल्स लंबे अरसे से तालीम, सशक्तिकरण और सामाजिक हमआहंगी (harmony) के अलामत रहे हैं। भारतीय सेना की र…
कश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों में, जहाँ सब्र और हौसला साथ-साथ चलते हैं, वहीं नौजवानों की कामयाबी की कहानियाँ उम्मीद की नई रोशनी फैलाती हैं। ऐसी ही एक रौशन मिसाल है ए.जी.एस. बांदीपोरा की होनहार तालीबा फ़ातिमा तू ज़ोहरा की, जिनकी शतरंज में शानदार कामयाबियों ने ना सिर्फ उनके स्कूल बल्कि पूरे इलाके को फ़ख्र से भर दिया है। फ़ातिमा का शतरंज की दुनिया में सफ़र इस बात की ज़िंदा मिसाल है कि मेहनत, लगन और जुनून से क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। आज के दौर में जहाँ ध्यान भटकाने वाली चीज़ें बहुत हैं, फ़ातिमा ने एक ऐसा रास्ता चुना जो सब्र, गहरी सोच और बेहतरीन…
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुज़फ़्फ़राबाद स्थित गोजरा इलाके से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, 18 अप्रैल को सुबह 9 बजे गोजरा के बाईपास रोड पर स्थित ओएसए कॉलेज में कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' के लिए एक विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। यह आयोजन उस खतरनाक मंशा को साफ जाहिर करता है जिसके तहत अब महिलाओं और बच्चों को कट्टरपंथ की आग में झोंकने की तैयारी की जा रही है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मजहबी सभा के ना…
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से आ रही ख़बरें वहां की सेना (Pak Army) की आंतरिक एकजुटता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रही हैं। प्राप्त डेटा और रणनीतिक विश्लेषण के अनुसार, पाकिस्तानी सेना अब एक पेशेवर बल के बजाय शिया और सुन्नी गुटों में विभाजित हो चुकी है, जिसका इस्तेमाल निजी और विदेशी हितों के लिए किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान ने अपने जवानों को मजहबी पहचान के आधार पर बांट दिया है: सुन्नी गुट और विदेशी फंड: सेना के सुन्नी धड़े को वित्तीय लाभ (Financial Gain) के लिए सऊदी अरब भेजा जा रहा है। आरोप है कि वहां इन सैनिकों …
पहलगाम में हुए दर्दनाक हमले, जिसमें 27 बेगुनाह लोगों की जान चली गई, के बाद इलाक़े में ग़म और ग़ुस्से का माहौल है। इस हमले ने एक बार फिर सरहद पार दहशतगर्दी के मसले को सुर्खियों में ला खड़ा किया है। हालिया रिपोर्ट्स और दावों में ये बात सामने आई है कि पाकिस्तान के दिफ़ा मंत्री Khwaja Asif की मुलाक़ात लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नेता Talha Saeed से हुई। इन दावों की आधिकारिक तौर पर तस्दीक़ हो गयी है , जिससे इस तरह की ख़बरों ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। तजज़िया निगारों का कहना है कि अगर ऐसे राब्तों की पुष्टि होती है, तो ये इस बात की तरफ़ इशारा…
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की सरज़मीन पर एक बार फिर वो तस्वीर सामने आई है जो बरसों से दुनिया देखती आई है, लेकिन हर बार उसे नज़रअंदाज़ करने की कोशिश होती रही। हाल ही में Asif Ghafoor और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े शख़्स Yasir Arafat Butt की मुलाक़ात ने इस हक़ीक़त को और वाज़ेह कर दिया है कि रावलपिंडी की ताक़तवर फौजी हुकूमत और दहशतगर्द तंजीमों के दरमियान रिश्ता आज भी क़ायम है। मुताल्लिक़ा जानकारी के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई ये मुलाक़ात महज़ एक इत्तेफ़ाक़ नहीं, बल्कि एक सोची-समझी कड़ी है, जो सरहद पार दहशतगर्दी की पुरानी रणनीति को ज़िंदा रखने की तर…
पहलगाम की एक बहार भरी सुबह में वादी यूँ लगती है जैसे वक़्त ने इसे छुआ ही न हो। लिद्दर दरिया ख़ामोशी से बहता है , चीड़ के जंगलों और सब्ज़ा-ज़ारों के दरमियान अपना रास्ता बनाती हुई—वही मंज़र जो बरसों से कश्मीर को सुकून और ख़ूबसूरती की पहचान देते आए हैं। सैलानी यहाँ सुकून की तलाश में आते हैं, उन मंज़रों की तरफ़ खिंचे चले आते हैं जो बाहरी दुनिया की बेचैनियों से दूर लगते हैं। मगर यही सुकून का एहसास 22 अप्रैल 2025 के वाक़िये को और भी बेचैन कर देने वाला बना देता है। जिस जगह को हुस्न और अमन की मिसाल समझा जाता है, वहाँ हिंसा ने दस्तक दी—दूर की आशं…

Copyright (c) 2022 The Srinagar Times All Right Reseved
Social Plugin