मायन बिजहामा के कमरान इरफान का नेशनल कूडो चैंपियनशिप के लिए चयन, बॉर्डर गांव के नौजवान ने बढ़ाया बारामूला का मान


बारामूला जिले के सीमावर्ती इलाके मायन बिजहामा के रहने वाले युवा मार्शल आर्ट खिलाड़ी कमरान इरफान ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर एक अहम मुकाम हासिल किया है। कमरान का चयन जम्मू-कश्मीर कूडो एसोसिएशन की ओर से अंडर-14 वर्ग की नेशनल कूडो चैंपियनशिप के लिए किया गया है। अब वह राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर की नुमाइंदगी करते हुए अपनी काबिलियत का मुज़ाहिरा करेंगे।

कूडो एसोसिएशन की ओर से जारी चयन पत्र में कमरान इरफान को राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए जम्मू-कश्मीर की टीम में शामिल किए जाने की पुष्टि की गई है। यह चयन पत्र एसोसिएशन की जनरल सेक्रेटरी तनज़ीला रफ़ीक ने जारी किया है। कमरान के चयन की खबर सामने आने के बाद मायन बिजहामा और आसपास के इलाकों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमावर्ती और दूरदराज इलाकों में रहने वाले बच्चों में भी खेल के मैदान में आगे बढ़ने की भरपूर सलाहियत मौजूद है, जरूरत सिर्फ उन्हें सही मौका और हौसला देने की है।

कमरान इरफान का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वह बारामूला के एक सीमावर्ती गांव से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे इलाकों में रहने वाले नौजवानों के लिए खेल महज मुकाबला नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाने और समाज में एक सकारात्मक मिसाल कायम करने का जरिया भी बन रहा है। कमरान की कामयाबी इस बात की गवाही देती है कि अगर बच्चों को सही तर्बियत, मेहनत का माहौल और आगे बढ़ने का मौका मिले तो वे किसी भी बड़े मंच पर अपनी जगह बना सकते हैं।

कूडो एक ऐसा मार्शल आर्ट खेल है जिसमें ताकत के साथ-साथ अनुशासन, फुर्ती, तकनीक और मानसिक संतुलन की भी अहमियत होती है। अंडर-14 श्रेणी में कमरान का चयन उनके लिए एक बड़ा अवसर है। राष्ट्रीय चैंपियनशिप में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। ऐसे में जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करना कमरान के लिए न सिर्फ सम्मान की बात है बल्कि अपनी खेल प्रतिभा को बड़े मंच पर साबित करने का भी मौका है।

स्थानीय अवाम के लिए कमरान का यह चयन खास मायने रखता है। सीमावर्ती गांवों से अक्सर यह धारणा जुड़ी रहती है कि यहां के बच्चों के लिए बड़े खेल मंचों तक पहुंचना मुश्किल होता है। कमरान ने अपनी मेहनत से इस सोच को बदलने की एक उम्मीद पैदा की है। उनकी कामयाबी गांव के दूसरे बच्चों के लिए भी एक पैगाम है कि मेहनत, लगन और सही रहनुमाई के साथ रास्ते खोले जा सकते हैं।

कमरान इरफान के राष्ट्रीय स्तर पर चयन से उनके परिवार और स्थानीय खेल प्रेमियों में उत्साह है। उम्मीद की जा रही है कि वह नेशनल कूडो चैंपियनशिप में बेहतर प्रदर्शन कर जम्मू-कश्मीर का नाम रोशन करेंगे। साथ ही, उनकी यह उपलब्धि मायन बिजहामा जैसे दूरदराज इलाकों में खेलों को बढ़ावा देने और नई नस्ल के नौजवानों को खेल की तरफ आकर्षित करने में भी मददगार साबित होगी।

कमरान का सफर अभी शुरुआत है, लेकिन एक सीमावर्ती गांव से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचना अपने आप में एक काबिले-ज़िक्र उपलब्धि है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि यह नन्हा मार्शल आर्ट खिलाड़ी राष्ट्रीय मुकाबले में किस तरह अपनी हुनर और हिम्मत का इज़हार करता है।

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