ऑपरेशन दृष्टि: भारतीय सेना ने 364 लोगों की आंखों में लौटाई रोशनी, श्रीनगर से तंगधार तक पहुंची स्वास्थ्य सेवा


जम्मू-कश्मीर में आम अवाम की ख़िदमत और इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए भारतीय सेना ने एक बार फिर साबित किया है कि उसका मक़सद महज़ सरहदों की हिफ़ाज़त करना ही नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी में बेहतरी लाना भी है। ऑपरेशन दृष्टि के तहत आयोजित 11वें मेगा आई सर्जिकल कैंप के समापन समारोह में यह जानकारी सामने आई कि भारतीय सेना और आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज़ की टीमों ने श्रीनगर और कुपवाड़ा ज़िले के दूरदराज़ सरहदी इलाके तंगधार में कुल 364 लोगों की आंखों के ऑपरेशन किए। इन कोशिशों से ऐसे लोगों को राहत मिली है, जिनके लिए बेहतर आंखों का इलाज हासिल करना कई बार मुश्किल हो जाता है।

30 सितंबर को श्रीनगर में आयोजित समापन समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शिरकत की। इस मौके पर ऑपरेशन दृष्टि के तहत किए गए मेडिकल प्रयासों और आम लोगों को मुहैया कराई गई स्वास्थ्य सेवाओं को अहम बताया गया। इस मुहिम का मक़सद आंखों की बीमारियों से परेशान लोगों तक इलाज पहुंचाना और उन्हें बेहतर ज़िंदगी जीने का मौक़ा देना है।

श्रीनगर से तंगधार तक पहुंची मेडिकल सुविधा

ऑपरेशन दृष्टि के तहत आयोजित इस मेगा सर्जिकल कैंप की खास बात यह रही कि मेडिकल सुविधाओं को सिर्फ बड़े शहरों तक महदूद नहीं रखा गया, बल्कि सरहदी और दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले लोगों तक भी पहुंचाया गया। कुपवाड़ा ज़िले का तंगधार इलाका अपनी भौगोलिक स्थिति और दुर्गम रास्तों के कारण कई बार स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच के मामले में चुनौतियों का सामना करता है। ऐसे इलाकों में आंखों के ऑपरेशन जैसी विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना स्थानीय आबादी के लिए राहत का सबब बनता है।

इस मुहिम के तहत तंगधार में आयोजित 10वां मेगा आई सर्जिकल कैंप अपनी तरह का पहला सरहदी कैंप था। इस कैंप की अगुवाई ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा ने की। इस पहल के ज़रिये यह कोशिश की गई कि सरहद के करीब रहने वाले लोगों को भी बेहतर मेडिकल सुविधा हासिल हो और उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज़ के अस्पतालों का रुख करने की परेशानी कम उठानी पड़े।

ऑपरेशन दृष्टि का बढ़ता दायरा

ऑपरेशन दृष्टि के तहत देशभर में अब तक डेढ़ लाख से ज़्यादा लोगों की आंखों की जांच की जा चुकी है, जबकि 3,500 से अधिक सर्जरी की गई हैं। ये आंकड़े इस बात को उजागर करते हैं कि आंखों की सेहत से जुड़ी समस्याओं की पहचान और उनके इलाज के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं।

आंखों की रोशनी इंसान की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा है। कमज़ोर नज़र या मोतियाबिंद जैसी परेशानियां बुज़ुर्गों, किसानों, मज़दूरों और आम नागरिकों की ज़िंदगी को मुश्किल बना सकती हैं। ऐसे में समय पर जांच और ऑपरेशन से लोगों को अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों को बेहतर तरीके से अंजाम देने में मदद मिलती है। खासकर ग्रामीण और सरहदी इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए इस तरह के मेडिकल कैंप काफी अहमियत रखते हैं।

इंसानियत और जनसेवा का पैग़ाम

जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना की ओर से चलाए जाने वाले जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का एक अहम पहलू यह है कि इनके ज़रिये दूरदराज़ आबादी तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की जाती है। ऑपरेशन दृष्टि भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है, जिसमें आंखों की जांच, सर्जरी और चिकित्सा सहायता को प्राथमिकता दी गई है।

श्रीनगर और तंगधार में 364 सफल ऑपरेशनों का आंकड़ा उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो आंखों की बीमारी के कारण रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मुश्किलात का सामना कर रहे थे। ऐसे प्रयासों से स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को समय पर इलाज हासिल करने के लिए प्रेरित करने में भी मदद मिल सकती है।

ऑपरेशन दृष्टि का यह अभियान इस पैग़ाम को मज़बूत करता है कि इंसानी ख़िदमत समाज की बेहतरी का एक अहम ज़रिया है। जब मेडिकल टीमें दूरदराज़ और सरहदी इलाकों तक पहुंचकर लोगों का इलाज करती हैं, तो इसका असर सिर्फ सेहत तक महदूद नहीं रहता, बल्कि आम लोगों के भरोसे और सामाजिक रिश्तों को भी मज़बूती मिलती है। जम्मू-कश्मीर में इस तरह की पहलें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में एक अहम कदम मानी जा सकती हैं। 

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