कुपवाड़ा जिला प्रशासन ने भारतीय सेना और पर्यटन विभाग के सहयोग से इस मेले का आयोजन किया। इसमें स्थानीय लोगों, युवाओं और बाहर से आए सैलानियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तीन सप्ताह तक चले कार्यक्रमों में क्रिकेट, वॉलीबॉल, गटका, 200 मीटर दौड़, रस्साकशी और एथलेटिक्स जैसी खेल प्रतियोगिताओं ने युवाओं में खासा जोश पैदा किया। इसके साथ पारंपरिक नृत्य, वाद्य संगीत और कला प्रदर्शनों ने कश्मीर की सांस्कृतिक रंगत को भी सामने रखा।
समापन समारोह में उपायुक्त कुपवाड़ा श्रीकांत सुसे ने मेले के सफल आयोजन के लिए भारतीय सेना के सहयोग की सराहना की और केरन के लोगों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि केरन में टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन की बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने क्षेत्र की पाकीजा फिजा, प्राकृतिक खूबसूरती और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को महफूज रखने की जरूरत पर जोर दिया।
उपायुक्त ने कहा कि इस तरह की पहल जीवंत ग्राम कार्यक्रम के मकसद को आगे बढ़ाती हैं। इसके तहत केरन जैसे सीमावर्ती गांवों में बुनियादी ढांचे, संपर्क सुविधाओं और पर्यटन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ सरहदी इलाकों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, बल्कि इन क्षेत्रों की सामाजिक और रणनीतिक अहमियत भी मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय नौजवानों के लिए रोजी-रोटी के नए रास्ते पैदा करने और नागरिकों, सेना तथा स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल कायम करने वाली पहलों को लगातार समर्थन देता रहेगा।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी मेले में खास तवज्जो दी गई। श्रीकांत सुसे ने कहा कि ‘ग्रीन केरन, क्लीन केरन’ अभियान को और मजबूत किया जाएगा। केरन के प्रवेश द्वार पर जल्द ही एक समर्पित एकल-उपयोग प्लास्टिक जांच केंद्र स्थापित किया जाएगा। इसका मकसद सैलानियों को एकल-उपयोग प्लास्टिक भीतर ले जाने से रोकना, जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना और कचरे के सही संग्रह तथा निपटान को सुनिश्चित करना है।
समारोह में मेजर जनरल राकेश नायर ने दूरदराज और सरहदी इलाकों में ऐसे आयोजनों की अहमियत पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम स्थानीय सांस्कृतिक रिवायतों को जिंदा रखने के साथ सरकारी सेवाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं को लोगों के और करीब लाने में मददगार साबित होते हैं।
मेले के दौरान चिकित्सा जांच, करियर परामर्श, पर्यटन मार्गदर्शन और नशामुक्ति जागरूकता के लिए विभिन्न स्टॉल लगाए गए। स्थानीय दस्तकारी और जैविक कृषि उत्पादों को भी प्रदर्शित किया गया। पंजीकृत होमस्टे और स्थानीय भोजनालयों ने सैलानियों को केरन की स्थानीय मेहमाननवाजी और खान-पान से रूबरू होने का मौका दिया।
‘ग्रीन केरन, क्लीन केरन’ अभियान के जरिए पूरे आयोजन को पर्यावरण के लिहाज से जिम्मेदार और टिकाऊ बनाए रखने की कोशिश की गई। समापन अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों में पुरस्कार वितरित किए गए तथा आयोजन को कामयाब बनाने में योगदान देने वालों को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
केरन मेला 2026 ने यह पैगाम दिया कि सरहदी गांव केवल अपनी भौगोलिक अहमियत के लिए नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति, पर्यटन, स्थानीय हुनर और सामुदायिक भागीदारी के लिहाज से भी खास पहचान रखते हैं।


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