श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में ठंडे पानी में पाई जाने वाली मछली ट्राउट की खेती अब घाटी की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने की तरफ आगे बढ़ रही है। केंद्र सरकार की तरफ से हिमालयी इलाकों में कोल्डवॉटर फिशरीज यानी ठंडे पानी की मछली पालन व्यवस्था को विकसित करने के लिए ₹2,299 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया गया है। इस पहल से जम्मू-कश्मीर के ट्राउट फार्मिंग सेक्टर को भी बड़ा सहारा मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि प्रदेश में ट्राउट का उत्पादन पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है, जो यहां के किसानों, नौजवानों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए रोजी-रोटी के नए रास्ते खोल सकता है।
केंद्र की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में ट्राउट का उत्पादन साल 2015–16 में 298 मीट्रिक टन था, जो बढ़कर 2025–26 में 3,010 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी इस बात की तरफ इशारा करती है कि घाटी में मछली पालन अब केवल एक पारंपरिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ आर्थिक क्षेत्र बन रहा है। यहां के ठंडे पानी वाले प्राकृतिक स्रोत, पहाड़ी नदियां और अनुकूल वातावरण ट्राउट पालन के लिए अहम माने जाते हैं। अगर इस क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और बाजार तक मजबूत पहुंच मिले, तो आने वाले वक्त में यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है।
इसी सिलसिले में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मत्स्य पालन से जुड़े विकास कार्यों के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत ₹149.73 करोड़ आवंटित किए हैं। इस योजना का मकसद मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। इसके तहत मछली पालन इकाइयों, हैचरी, फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज, मछली बिक्री केंद्रों और रेफ्रिजरेटेड परिवहन जैसी सुविधाओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इन सुविधाओं के बेहतर होने से मछली पालकों को उत्पादन के बाद अपनी उपज सुरक्षित रखने और उसे बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले को एक समर्पित कोल्डवॉटर फिशरीज क्लस्टर के रूप में पहचान दी गई है। यहां इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क और उससे जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने की पहल भी इस क्षेत्र के लिए अहम मानी जा रही है। इसका मकसद उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक पहुंचने की पूरी व्यवस्था को मजबूत करना है। जब किसी इलाके में उत्पादन के साथ-साथ भंडारण, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री की सुविधाएं भी उपलब्ध होती हैं, तो किसानों को अपनी मेहनत का बेहतर फायदा मिलने की संभावनाएं बढ़ती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबार और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
केंद्र सरकार ने हिमालयी क्षेत्र में ठंडे पानी की मत्स्य पालन क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए अनंतनाग के अलावा उत्तराखंड के पिथौरागढ़, लद्दाख के कारगिल और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू को भी ऐसे क्लस्टरों में शामिल किया है। 18 अक्टूबर को केंद्रीय मत्स्य सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी का दौरा कर ठंडे पानी में मछली पालन से जुड़ी पहलों की समीक्षा की और ट्राउट किसानों के साथ बातचीत की। इस दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दूसरे हिमालयी इलाकों में मत्स्य पालन की भूमिका को आजीविका के विकल्प बढ़ाने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और निर्यात की संभावनाओं को आगे ले जाने के लिहाज से अहम बताया गया।
कश्मीर के नौजवानों के लिए ट्राउट फार्मिंग एक ऐसा क्षेत्र बन सकता है, जिसमें खेती के साथ उद्यमिता और आधुनिक तकनीक को भी जोड़ा जा सकता है। युवा मछली पालन इकाइयां स्थापित करने, फीड सप्लाई, मछली के प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन और बिक्री जैसे कामों में अपनी जगह बना सकते हैं। दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए भी यह आय का एक अतिरिक्त जरिया बन सकता है। हालांकि, इस संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए वैज्ञानिक तरीके से पालन, अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, समय पर फीड की उपलब्धता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी और बाजार की मांग के मुताबिक उत्पादन पर ध्यान देना जरूरी होगा।
कश्मीर की तरक्की केवल बड़े उद्योगों और शहरों में होने वाले विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की आमदनी बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है। ट्राउट फार्मिंग में लगातार हो रही बढ़ोतरी और केंद्र की तरफ से मिल रहा निवेश इस दिशा में एक अहम अवसर पेश करता है। जरूरत इस बात की है कि सरकारी योजनाओं का फायदा असल मछली पालकों और स्थानीय युवाओं तक पहुंचे, उन्हें जरूरी प्रशिक्षण मिले और उनके उत्पादों के लिए भरोसेमंद बाजार तैयार हों। अगर इन प्रयासों को सही तरीके से आगे बढ़ाया गया, तो ट्राउट पालन कश्मीर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने, रोजगार के अवसर पैदा करने और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।


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