उल्फ़त सिकंदर, मोहम्मद सिकंदर की बेटी हैं और फिलहाल हाजिन के एम.डी. हाजिनी मेमोरियल हाई स्कूल में दसवीं जमात में तालीम हासिल कर रही हैं। कम उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाना इस बात की निशानी है कि अगर बेटियों को अपनी सलाहियत दिखाने का मौक़ा मिले, तो वे किसी भी मैदान में अपनी काबिलियत साबित कर सकती हैं।
कुपवाड़ा ट्रायल के बाद मिली कामयाबी
उल्फ़त का राष्ट्रीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के लिए चयन कुपवाड़ा में हुए ट्रायल के बाद हुआ। इस चयन ने उनके क्रिकेट सफ़र को एक नई दिशा दी है। राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का मौक़ा किसी भी खिलाड़ी के लिए अहम होता है, क्योंकि इससे उसे अपनी प्रतिभा को बड़े मंच पर दिखाने और आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है।
उल्फ़त की कामयाबी यह भी दिखाती है कि कश्मीर के दूर-दराज़ इलाक़ों में भी खेल की सलाहियत रखने वाली लड़कियां मौजूद हैं। ज़रूरत इस बात की है कि उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए सही रहनुमाई, प्रशिक्षण और बेहतर मौक़े मिलते रहें।
हालांकि उल्फ़त के क्रिकेट सफ़र की तमाम तफ़सीलात सामने नहीं आई हैं, लेकिन राष्ट्रीय अंडर-19 टीम के लिए उनका चयन उनके खेल जीवन का एक अहम पड़ाव है। दसवीं जमात की पढ़ाई के साथ क्रिकेट में आगे बढ़ने का यह सफ़र दूसरी छात्राओं के लिए भी प्रेरणा का सबब बन सकता है।
कश्मीर की बेटियों के लिए हौसले का पैग़ाम
वादी-ए-कश्मीर में लड़कियां अब तालीम के साथ-साथ खेल, विज्ञान, तकनीक और दूसरे मैदानों में भी अपनी पहचान बना रही हैं। उल्फ़त सिकंदर की कामयाबी इसी बदलती तस्वीर का हिस्सा है। उनका चयन इस बात की तरफ़ इशारा करता है कि बेटियों को अगर बराबर मौक़े और परिवार की हिमायत मिले, तो वे राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवा सकती हैं।
खेल सिर्फ़ शारीरिक सेहत का ज़रिया नहीं, बल्कि यह इंसान में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और मुश्किल हालात का सामना करने का हौसला भी पैदा करता है। क्रिकेट जैसे खेल में कामयाबी हासिल करने के लिए लगातार मेहनत, सब्र और अपने मक़सद के प्रति वफ़ादारी ज़रूरी होती है।
उल्फ़त का चयन उन लड़कियों के लिए ख़ास अहमियत रखता है, जो छोटे कस्बों और गांवों में रहते हुए बड़े सपने देखती हैं। उनकी उपलब्धि यह पैग़ाम देती है कि मंज़िल तक पहुंचने के लिए ज़रूरी है कि इंसान अपने ख़्वाबों पर यक़ीन रखे और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार कोशिश करता रहे।
परिवार और तालीम के साथ खेल में आगे बढ़ने की मिसाल
मोहम्मद सिकंदर की बेटी उल्फ़त इस वक़्त दसवीं जमात की छात्रा हैं। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाए रखना युवा खिलाड़ियों के लिए एक अहम चुनौती होती है। ऐसे में उल्फ़त का राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना इस बात को उजागर करता है कि तालीम और खेल, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश की जा सकती है।
कश्मीर में महिला क्रिकेट को मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी है कि स्कूलों में खेल की सहूलियतें बेहतर की जाएं, लड़कियों को नियमित प्रशिक्षण मिले और उन्हें ज़िला, प्रदेश तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। साथ ही, परिवारों और समाज को भी बेटियों के खेल संबंधी ख़्वाबों की हिमायत करनी चाहिए।
उल्फ़त सिकंदर का राष्ट्रीय अंडर-19 क्रिकेट टीम के लिए चयन हाजिन और बांदीपोरा के लिए फ़ख़्र का मौक़ा है। उनकी यह कामयाबी कश्मीर की उभरती महिला खेल प्रतिभाओं की तस्वीर को और रोशन करती है।
उल्फ़त की कामयाबी का पैग़ाम साफ़ है—बेटियों को मौक़ा दीजिए, उनके हौसले को मज़बूत कीजिए और उन्हें अपने ख़्वाब पूरे करने दीजिए। आज हाजिन की यह छात्रा राष्ट्रीय क्रिकेट के सफ़र पर आगे बढ़ रही है, तो उसकी उपलब्धि आने वाले वक़्त में कई दूसरी लड़कियों को भी क्रिकेट के मैदान में उतरने और अपने मुल्क के लिए खेलने का हौसला दे सकती है।


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