कुपवाड़ा, 19 अक्टूबर 2026। उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के करनाह सेक्टर में एलओसी के करीब बसे जबरी गांव में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की दिशा में एक अहम पहल की गई। रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन ने भारतीय सेना और लीलावती अस्पताल के सहयोग से गांव में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया, जिसमें बच्चों, महिलाओं समेत कुल 180 लोगों ने अपनी सेहत की जांच करवाई और विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह हासिल की। दूरदराज और सरहदी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए इस तरह की पहल इसलिए भी अहम है, क्योंकि कई बार विशेषज्ञ डॉक्टरों से मशविरा लेने के लिए उन्हें लंबा सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में गांव के करीब ही मेडिकल कैंप का आयोजन स्थानीय आबादी के लिए बड़ी राहत लेकर आया।
इस स्वास्थ्य शिविर में बच्चों की बीमारियों, महिलाओं की सेहत, कान-नाक-गले और दांतों से जुड़ी परेशानियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने परामर्श दिया। कैंप में पीडियाट्रिक्स यानी बच्चों की बीमारियों के विशेषज्ञ, गायनेकोलॉजी यानी महिलाओं की सेहत के विशेषज्ञ, ईएनटी विशेषज्ञ और दंत चिकित्सक मौजूद रहे। इन विशेषज्ञों की मौजूदगी से लोगों को अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर सीधे मेडिकल सलाह लेने का अवसर मिला। कुल 180 लोगों की भागीदारी इस बात को उजागर करती है कि सीमावर्ती गांवों में सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की कितनी अहमियत है।
करनाह जैसे पहाड़ी और सरहदी इलाकों में भौगोलिक परिस्थितियां आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को कई तरह से प्रभावित करती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी इन्हीं चुनौतियों में से एक है। किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेने के लिए दूर जाना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। बच्चों की सेहत, महिलाओं की नियमित जांच, कान-नाक-गले की तकलीफ और दांतों से जुड़ी समस्याओं को समय रहते पहचानना जरूरी होता है। जब चिकित्सा परामर्श गांव के करीब उपलब्ध कराया जाता है, तो लोगों को अपनी परेशानियों के बारे में जानकारी हासिल करने और आगे के इलाज के लिए उचित सलाह लेने का मौका मिलता है।
जबरी गांव में आयोजित इस शिविर ने स्वास्थ्य सेवाओं को जरूरतमंद लोगों के करीब लाने के लिए विभिन्न संस्थाओं के आपसी सहयोग की अहमियत को भी सामने रखा। रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन की पहल को भारतीय सेना और लीलावती अस्पताल का सहयोग मिला, जिससे सरहदी क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने में मदद मिली। इस तरह के प्रयास यह दिखाते हैं कि दूरदराज के इलाकों में लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकारी, सामाजिक और चिकित्सा संस्थाओं के बीच तालमेल कितना महत्वपूर्ण है। भारतीय सेना का सहयोग भी ऐसे क्षेत्रों में नागरिकों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने की कोशिश का अहम हिस्सा बना।
कैंप में बच्चों के लिए विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा उपलब्ध होने से परिवारों को उनकी सेहत और विकास से जुड़े सवालों पर डॉक्टरों से बात करने का अवसर मिला। वहीं, गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ की मौजूदगी ने महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों पर सलाह लेने की सुविधा दी। ईएनटी और दंत चिकित्सा सेवाओं के जरिए लोगों को कान, नाक, गले और मुंह की सेहत से जुड़े मामलों में भी परामर्श हासिल हुआ। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना कई स्वास्थ्य समस्याओं को गंभीर होने से पहले पहचानने में मददगार हो सकता है। हालांकि, जिन मरीजों को आगे जांच या इलाज की जरूरत हो, उनके लिए उचित चिकित्सा व्यवस्था तक पहुंच सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में काम करने वाला गैर-लाभकारी संगठन है। फाउंडेशन की इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद समुदायों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाना और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयासों को बढ़ावा देना है। जबरी गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर इसी व्यापक सोच को दर्शाता है, जिसमें स्वास्थ्य को समुदाय के समग्र विकास का एक अहम हिस्सा माना गया है।
कश्मीर की तरक्की का असल मकसद तभी पूरा हो सकता है, जब विकास की सुविधाएं शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि एलओसी के करीब बसे गांवों और दूरदराज के पहाड़ी इलाकों तक भी पहुंचें। जबरी गांव में 180 लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श पहुंचाने की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। ऐसे प्रयास सरहदी आबादी के बीच स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने, समय पर इलाज की अहमियत समझाने और लोगों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने में मदद कर सकते हैं। जरूरत इस बात की है कि इस तरह के स्वास्थ्य शिविर नियमित रूप से आयोजित हों और स्थानीय लोगों को आगे के इलाज के लिए भी जरूरी मार्गदर्शन मिलता रहे, ताकि करनाह जैसे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवार भी बेहतर स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की सुविधाओं से जुड़ सकें।


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