श्रीनगर में 13 वर्षीय लेखक की किताब रिलीज, चिनार कॉर्प्स कमांडर ने बढ़ाया हौसला


कश्मीर की वादियों में जहां नई नस्ल के नौजवान अपनी काबिलियत से अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं श्रीनगर के महज़ 13 साल के एक बच्चे ने अपनी कलम के ज़रिए मां की हिम्मत, संघर्ष और जद्दोजहद को दुनिया के सामने रखने की पहल की है। आर्मी पब्लिक स्कूल, श्रीनगर में चिनार कॉर्प्स कमांडर ने 13 वर्षीय लेखक सैयद शुनैन की पहली किताब ‘Her Strength, My Story’ का विमोचन किया। यह किताब एक ऐसी मां और उसके बच्चे की कहानी को सामने लाती है, जिसमें मुश्किल हालात के बावजूद हिम्मत और उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा गया।

Swan Book Publishing House से प्रकाशित यह किताब शुनैन की अपनी जिंदगी के अनुभवों और एकल मां के साये में उनकी परवरिश की कहानी पर आधारित है। कम उम्र में ही लेखन की दुनिया में कदम रखने वाले शुनैन ने अपनी मां की जद्दोजहद और उनकी ताकत को शब्दों में ढालकर एक ऐसा संस्मरण पेश किया है, जो पारिवारिक रिश्तों, मां की कुर्बानी और बच्चों की संवेदनशील सोच को उजागर करता है।

सैयद शुनैन ने महज़ 11 साल की उम्र में Kashmir Images के लिए लिखना शुरू किया था। इतनी कम उम्र में पत्रकारिता और लेखन की तरफ उनका रुझान इस बात का इशारा है कि कश्मीर की नई नस्ल में अदब, तहरीर और रचनात्मक सोच के लिए गहरी दिलचस्पी मौजूद है। शुनैन का ताल्लुक एक ऐसे परिवार से है, जहां कलम और साहित्य की अपनी पुरानी रवायत रही है। उनके परिवार में मशहूर शायर फाज़िल कश्मीरी और पत्रकार ज़ीनत ज़ीशान फ़ाज़िल जैसे नाम शामिल हैं।

‘Her Strength, My Story’ महज़ एक 13 वर्षीय बच्चे की पहली किताब नहीं है, बल्कि यह उस मां को भी एक ख़िराज-ए-अकीदत है, जिसने मुश्किल हालात में अपने बच्चे की परवरिश की और उसे आगे बढ़ने का हौसला दिया। शुनैन ने अपनी किताब के ज़रिए यह बताने की कोशिश की है कि किसी बच्चे की कामयाबी के पीछे अक्सर मां की वह खामोश जद्दोजहद होती है, जिसे दुनिया की नज़रें नहीं देख पातीं।

किताब के विमोचन के मौके पर चिनार कॉर्प्स कमांडर ने युवा लेखक की कोशिश को सराहा और उसकी हौसला-अफजाई की। कमांडर की ओर से एक कम उम्र के कश्मीरी लेखक की इस उपलब्धि को तवज्जो दिया जाना उन बच्चों और नौजवानों के लिए भी एक सकारात्मक पैगाम के तौर पर देखा जा सकता है, जो पढ़ाई के साथ-साथ लिखने, अदब, कला और दूसरे रचनात्मक मैदानों में अपनी पहचान बनाने का ख्वाब रखते हैं।

कार्यक्रम के दौरान कमांडर ने स्कूल के विद्यार्थियों से भी मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस मौके ने छात्रों के लिए भी यह पैगाम दिया कि मेहनत, काबिलियत और लगन के दम पर कम उम्र में भी अपनी अलग पहचान कायम की जा सकती है।

शुनैन की कहानी कश्मीर के उन नौजवानों के लिए एक मिसाल बन सकती है, जो अपनी बात कलम के जरिए दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं। उनकी पहली किताब यह भी दिखाती है कि अदब और लेखन सिर्फ उम्र के मोहताज नहीं होते। अगर जज़्बा मजबूत हो और घर से हौसला मिले तो छोटी उम्र में भी बड़ी बात कही जा सकती है।

‘Her Strength, My Story’ के जरिए शुनैन ने अपनी मां की हिम्मत को तहरीर का रूप दिया है। उनकी यह पहली कोशिश न सिर्फ एक बेटे की मां के लिए मोहब्बत और एहतराम का इज़हार है, बल्कि श्रीनगर की नई नस्ल में उभरती रचनात्मक सोच और लेखन की क्षमता की भी एक खूबसूरत तस्वीर पेश करती है।

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