यह राष्ट्रीय कोचिंग कैंप स्नोशू फेडरेशन ऑफ इंडिया (SSFI) की तरफ से आयोजित किया जा रहा है। कैंप का आयोजन ऐसे वक्त में हो रहा है जब खिलाड़ी और फेडरेशन 2027 में होने वाली वर्ल्ड स्नोशू चैंपियनशिप की तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में श्रीनगर में राष्ट्रीय स्तर का यह कैंप जम्मू-कश्मीर के लिए महज एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि इलाके को अंतरराष्ट्रीय विंटर स्पोर्ट्स के एक अहम मरकज़ के तौर पर पेश करने का मौका भी माना जा रहा है।
स्नोशू एक ऐसा विंटर स्पोर्ट्स है जिसमें बर्फ से ढके इलाकों में विशेष जूतों की मदद से दौड़ और प्रतिस्पर्धा की जाती है। कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियां और यहां लंबे समय तक रहने वाली बर्फ इस खेल के लिए कुदरती तौर पर मुनासिब माहौल मुहैया कराती हैं। यही वजह है कि जम्मू-कश्मीर में इस खेल को लेकर दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है और अब राष्ट्रीय स्तर के आयोजन यहां होने से स्थानीय खिलाड़ियों के लिए भी नए दरवाज़े खुलने की उम्मीद है।
SSFI के अध्यक्ष मीर मुदस्सर ने कहा है कि स्नोशू खेल के जरिए जम्मू-कश्मीर के विंटर स्पोर्ट्स और टूरिज्म को देश और दुनिया के सामने पेश करने की कोशिश की जा रही है। उनका मानना है कि बर्फ से जुड़े खेलों को बढ़ावा देने से न सिर्फ खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, बल्कि जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों में भी खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है जहां सर्दियों में बर्फ आम ज़िंदगी का हिस्सा रहती है।
इस सिलसिले में जम्मू-कश्मीर के लिए एक और अहम कामयाबी यह है कि स्नोशू फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 11वीं नेशनल स्नोशू चैंपियनशिप 2027 की मेज़बानी के अधिकार भी J&K को दिए हैं। यानी श्रीनगर में मौजूदा राष्ट्रीय कोचिंग कैंप के बाद अगले साल राष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेज़बानी भी इसी सरज़मीन पर होने जा रही है।
खेल विशेषज्ञों और विंटर स्पोर्ट्स से जुड़े लोगों के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे श्रीनगर और कश्मीर को सिर्फ पारंपरिक पर्यटन स्थल के तौर पर नहीं, बल्कि विंटर स्पोर्ट्स बेस के रूप में स्थापित करने की राह मजबूत हो सकती है। स्कीइंग और दूसरे बर्फानी खेलों के साथ स्नोशू जैसी गतिविधियों का विस्तार स्थानीय नौजवानों के लिए खेल के नए विकल्प पैदा कर सकता है।
मकामी अवाम के लिए भी यह पहल कई मायनों में उम्मीद लेकर आई है। अगर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विंटर स्पोर्ट्स आयोजनों का सिलसिला आगे बढ़ता है तो खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों, खेल आयोजकों, पर्यटन कारोबार और स्थानीय सेवा क्षेत्र के लिए भी नए मौके पैदा हो सकते हैं।
श्रीनगर में शुरू हुआ यह राष्ट्रीय कैंप इस बात का इशारा है कि कश्मीर की बर्फ अब सिर्फ खूबसूरती और सैलानियों की कशिश तक महदूद नहीं रहना चाहती। सही बुनियादी ढांचे, लगातार प्रशिक्षण और बड़े मुकाबलों की मेज़बानी के साथ यही बर्फ जम्मू-कश्मीर के नौजवानों के लिए खेल, हुनर और अंतरराष्ट्रीय पहचान का नया रास्ता बन सकती है।


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