कश्मीर से जल्द शुरू हो सकती है रोल-ऑन/रोल-ऑफ (RORO) रेल सेवा, फल और माल ढुलाई को मिलेगी नई राह


कश्मीर घाटी से माल और फलों की आवाजाही को और आसान बनाने की दिशा में रेलवे एक अहम कदम उठाने की तैयारी में है। एक स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रेलवे आने वाले दिनों में कश्मीर से रोल-ऑन/रोल-ऑफ (RORO) सेवा शुरू कर सकता है। इस सेवा के तहत सामान से लदे ट्रकों को सीधे फ्लैट वैगनों पर चढ़ाकर रेल के ज़रिए आगे भेजा जाएगा। इससे ट्रकों को लंबे सड़क जाम और राजमार्ग पर होने वाली देरी से बचाने में मदद मिल सकती है।

शोपियां की रिपोर्ट की एक पोस्ट में इस संभावित सेवा का ज़िक्र किया गया है। हालांकि, अभी तक इस संबंध में भारतीय रेलवे की तरफ से विस्तृत आधिकारिक आदेश या सर्कुलर सामने नहीं आया है। इसलिए सेवा की शुरुआत की तारीख, परिचालन व्यवस्था, मार्ग और अन्य तकनीकी जानकारियों को लेकर अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ हो सकेगी।

कश्मीर की अर्थव्यवस्था में फल उद्योग की अहम हिस्सेदारी है और हर साल बड़ी मात्रा में सेब तथा दूसरे बागवानी उत्पाद घाटी से देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाए जाते हैं। इन उत्पादों की समय पर ढुलाई किसानों, बागवानों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए बेहद अहम होती है। सड़क मार्ग पर भारी यातायात, मौसम और अन्य कारणों से पैदा होने वाली देरी कई बार माल की आवाजाही को प्रभावित करती है। ऐसे में रेलवे के ज़रिए ट्रकों को ही आगे ले जाने वाली RORO व्यवस्था को संभावित तौर पर एक वैकल्पिक परिवहन सुविधा के रूप में देखा जा रहा है।

इस व्यवस्था की खासियत यह होगी कि ट्रक को अपना माल उतारकर दोबारा लोड करने की जरूरत नहीं होगी। माल से लदा ट्रक रेलवे के विशेष फ्लैट वैगन पर चढ़ाया जाएगा और ट्रेन के माध्यम से आगे के गंतव्य तक भेजा जा सकेगा। मंज़िल पर पहुंचने के बाद ट्रक को वैगन से उतारकर सड़क मार्ग से अपनी यात्रा जारी रखने की सुविधा होगी। इस तरह सड़क और रेल परिवहन को एक साथ जोड़ने वाली व्यवस्था तैयार हो सकती है।

कश्मीर से रेलवे द्वारा बागवानी उत्पादों की ढुलाई का अनुभव पहले से मौजूद है। पिछली फल मंडी के मौसम में करीब 25,000 मीट्रिक टन सेब रेल के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह आंकड़ा बताता है कि घाटी के फल कारोबार में रेल परिवहन की भूमिका धीरे-धीरे बढ़ रही है। RORO सेवा शुरू होने की स्थिति में यह व्यवस्था केवल थोक माल की ढुलाई तक सीमित न रहकर पूरे मालवाहक ट्रकों को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में अगला कदम साबित हो सकती है।

बागवानों और व्यापारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय और परिवहन की निरंतरता है। यदि RORO सेवा नियमित और सुचारु रूप से संचालित होती है, तो फल और अन्य आवश्यक माल को सड़क पर लंबे समय तक खड़े रहने की स्थिति से राहत मिल सकती है। साथ ही, लंबी दूरी के कुछ हिस्से रेल के ज़रिए तय होने से सड़क परिवहन पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि, फिलहाल यह सेवा संभावित स्तर पर है और आधिकारिक पुष्टि का इंतज़ार है। रेलवे की ओर से जारी होने वाले सर्कुलर में सेवा की शुरुआत, ट्रकों की क्षमता, बुकिंग प्रक्रिया, किराया, रूट और संचालन से जुड़ी अन्य शर्तों की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

कश्मीर में बागवानी और व्यापार से जुड़े लोगों की निगाहें अब इस संभावित पहल पर टिकी हैं। यदि RORO सेवा आधिकारिक तौर पर शुरू होती है, तो यह घाटी से देश के दूसरे हिस्सों तक फल और माल पहुंचाने के मौजूदा परिवहन तंत्र में एक नया विकल्प जोड़ सकती है। 

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