बरामूला की सोलिहा सोहेल ने बॉक्सिंग में जीता यूटी गोल्ड, राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए चयन


बरामूला की होनहार मुक्केबाज़ सोलिहा सोहेल ने बॉक्सिंग के मैदान में शानदार प्रदर्शन करते हुए 51 से 54 किलोग्राम भार वर्ग में यूटी स्तर की चैंपियनशिप का गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। इस कामयाबी के साथ ही सोलिहा ने अब राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करने का रास्ता भी साफ कर लिया है। उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ बरामूला, बल्कि पूरे उत्तर कश्मीर के खेल हलकों में खुशी की लहर है।

यूटी स्तर की यह बॉक्सिंग चैंपियनशिप यूथ सर्विसेज एंड स्पोर्ट्स जम्मू-कश्मीर की ओर से आयोजित की गई थी, जिसमें अलग-अलग जिलों से आए खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा और मेहनत का प्रदर्शन किया। कड़े मुकाबलों के बीच सोलिहा सोहेल ने 51–54 किलोग्राम वर्ग में बेहतरीन खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। उनके प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में जम्मू-कश्मीर की टीम का हिस्सा बनाया गया है।

सोलिहा की यह कामयाबी उनके लिए एक अहम पड़ाव मानी जा रही है। उत्तर कश्मीर के बरामूला जैसे जिले से निकलकर यूटी स्तर के मंच पर गोल्ड जीतना और उसके बाद राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए चयन हासिल करना इस बात की मिसाल है कि स्थानीय स्तर पर मेहनत करने वाले युवा खिलाड़ी बड़े मंच तक पहुंच सकते हैं।

अपनी कामयाबी का श्रेय सोलिहा ने अपने प्रशिक्षकों मास्टर मंजूर और आदिल के साथ-साथ अपने परिवार को दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षकों की लगातार रहनुमाई, प्रशिक्षण के दौरान की गई मेहनत और परिवार की हौसला-अफ़ज़ाई ने उन्हें मुकाबलों के लिए बेहतर तरीके से तैयार किया। बॉक्सिंग जैसे खेल में लगातार अभ्यास, अनुशासन और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है और सोलिहा ने इन तमाम पहलुओं पर मेहनत करते हुए यह मुकाम हासिल किया।

बरामूला के खिलाड़ियों के लिए भी यह उपलब्धि एक अच्छे खेल अभियान का हिस्सा बनकर सामने आई है। यूटी स्तर की प्रतियोगिता में जिले के खिलाड़ियों ने कुल 10 पदक हासिल किए, जिसमें सोलिहा का गोल्ड मेडल खास तौर पर अहम रहा। इस प्रदर्शन ने बरामूला की खेल प्रतिभाओं को एक बार फिर सामने लाया है और यह संकेत दिया है कि जिले के युवा खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में अपनी जगह बनाने की काबिलियत रखते हैं।

सोलिहा की कहानी खास तौर पर उत्तर कश्मीर की उन लड़कियों के लिए अहम है, जो खेल के मैदान में आगे बढ़ने का ख्वाब देखती हैं। एक स्थानीय खिलाड़ी का जिला स्तर से यूटी पोडियम तक पहुंचना और फिर राष्ट्रीय चैंपियनशिप की सूची में जगह बनाना युवाओं के लिए हौसले का पैगाम है। इससे यह भी जाहिर होता है कि सही प्रशिक्षण, परिवार की हिमायत और लगातार मेहनत के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को बड़े मंच तक पहुंचाया जा सकता है।

अब सोलिहा की निगाहें राष्ट्रीय चैंपियनशिप पर होंगी, जहां उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाली मुक्केबाज़ों के साथ मुकाबला करना होगा। यूटी स्तर पर गोल्ड जीतने के बाद उनके सामने अगला इम्तिहान राष्ट्रीय मंच पर अपनी काबिलियत साबित करने का होगा। बरामूला और उत्तर कश्मीर के खेल प्रेमियों को उनसे अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।

सोलिहा सोहेल की यह कामयाबी सिर्फ एक मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर कश्मीर की उभरती खेल प्रतिभाओं के लिए एक नई उम्मीद और हौसले की तस्वीर भी पेश करती है। यूटी के पोडियम से राष्ट्रीय मंच तक का उनका यह सफर आने वाले दिनों में कई और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का सबब बन सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ