इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिनके लिए रोजमर्रा का सफर अक्सर आर्थिक और भौतिक दोनों तरह की मुश्किलों से जुड़ा रहता है। व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति हों या बैसाखियों के सहारे चलने वाले यात्री, अब सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल उनके लिए पहले की तरह टिकट और किराये की रुकावट से जुड़ा नहीं रहेगा। खास तौर पर वादी के दूरदराज इलाकों में रहने वाले दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक बसें शिक्षा, रोज़गार, इलाज, सरकारी सेवाओं और दूसरे जरूरी कामों तक पहुंच का अहम जरिया हैं। ऐसे में किराया माफ किए जाने से उनकी आवाजाही को सहूलियत मिलने की उम्मीद है।
सरकार के मुताबिक यह फैसला जम्मू-कश्मीर में समावेशी परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस पहल को आगे बढ़ाने में परिवहन मंत्री सतीश शर्मा की भूमिका का उल्लेख किया और इसे ऐसी व्यवस्था की तरफ कदम बताया जिसमें समाज के हर तबके को सार्वजनिक सुविधाओं तक बराबर पहुंच मिल सके। जेकेआरटीसी के सार्वजनिक बस नेटवर्क तथा जम्मू और श्रीनगर स्मार्ट सिटी के ई-बस नेटवर्क को इस दायरे में लाने से यह सुविधा केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल से जुड़ती है।
कश्मीर के संदर्भ में इस फैसले की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि सार्वजनिक परिवहन बड़ी आबादी के लिए रोजमर्रा की आवाजाही का महत्वपूर्ण साधन है। शहरों से लेकर कस्बों और दूरदराज इलाकों तक बस सेवाएं लोगों को बाजारों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और सरकारी कार्यालयों से जोड़ती हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा इस कनेक्टिविटी को आर्थिक सहारे के साथ जोड़ती है। इससे परिवारों पर पड़ने वाले यात्रा खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है और दिव्यांगजनों को अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी भी कुछ हद तक कम हो सकती है।
यह फैसला केवल किराये में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा भी है। परिवहन किसी भी समाज में शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक भागीदारी तक पहुंच का बुनियादी माध्यम होता है। जब किसी व्यक्ति की शारीरिक अक्षमता उसकी आवाजाही में अतिरिक्त बाधा पैदा करती है, तो सस्ती और सुलभ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उस बाधा को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। सरकार की इस पहल से दिव्यांगजनों के लिए सार्वजनिक बसों का इस्तेमाल अधिक सुविधाजनक और किफायती बनने की संभावना है।
मार्च 2026 के बजट में किए गए वादे को लागू करने के साथ जम्मू-कश्मीर सरकार ने सामाजिक समावेशन से जुड़े अपने एजेंडे में एक और कदम आगे बढ़ाया है। जेकेआरटीसी और स्मार्ट सिटी ई-बस सेवाओं में मुफ्त सफर की मंजूरी से दिव्यांग यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन का दायरा आर्थिक रूप से अधिक सुलभ होगा। वादी और जम्मू संभाग, दोनों क्षेत्रों में यह पहल उन लोगों के लिए राहत का जरिया बन सकती है जो रोजाना जरूरी कामों के लिए सार्वजनिक बस सेवाओं पर निर्भर हैं।


0 टिप्पणियाँ