उरी में अग्निवीर भर्ती रैली में कश्मीरी युवाओं की बड़ी भागीदारी, स्थानीय लोगों ने बढ़ाया मेहमाननवाज़ी का हाथ


पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर से सटी सरहद के करीब स्थित उरी इन दिनों नौजवानों की उम्मीदों और हौसले का गवाह बना हुआ है। उरी मिलिट्री स्टेशन में भारतीय सेना की ओर से आयोजित अग्निवीर भर्ती रैली में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से हजारों नौजवान हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं। 14 सितंबर से जारी इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान स्थानीय कारोबारियों, मस्जिदों और होटल मालिकों ने दूर-दराज से आए उम्मीदवारों के लिए मुफ्त खाने और ठहरने का इंतज़ाम कर सामुदायिक मेहमाननवाज़ी की मिसाल पेश की है।

भारतीय सेना की इस भर्ती रैली का आयोजन जेडआरओ जालंधर और एआरओ श्रीनगर की निगरानी में किया जा रहा है। भर्ती में शामिल होने के लिए कश्मीर के अलग-अलग जिलों से नौजवान उरी पहुंच रहे हैं। इनमें कई ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिन्हें भर्ती प्रक्रिया के दौरान रहने और खाने की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में स्थानीय समाज की तरफ से आगे बढ़कर की गई मदद इन नौजवानों के लिए सहारा बन रही है। उरी जैसे सरहदी इलाके में यह तस्वीर खास अहमियत रखती है, जहां स्थानीय आबादी ने अपने सामाजिक रवैये और मेहमाननवाज़ी के जरिए बाहर से आने वाले युवाओं का इस्तकबाल किया है।

उरी के व्यापार मंडल ने हाजी मोहम्मद शफी की अगुवाई में भर्ती के लिए आने वाले उम्मीदवारों की मदद का बीड़ा उठाया है। व्यापारियों की ओर से नौजवानों के लिए मुफ्त खाने का इंतज़ाम किया जा रहा है, ताकि दूर-दराज से आने वाले उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। व्यापारिक बिरादरी की यह पहल स्थानीय बाजार और नौजवानों के बीच कायम सामाजिक रिश्ते की एक तस्वीर पेश करती है। भर्ती में शामिल होने वाले उम्मीदवारों के लिए यह सहयोग महज भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें अपनेपन और हौसले का एहसास भी दे रहा है।

स्थानीय मसाजिद ने भी इस मुहिम में अहम भूमिका निभाई है। जामिया मस्जिद नूर और जामिया मस्जिद जुमा समेत स्थानीय मसाजिद में उम्मीदवारों के लिए मुफ्त ठहरने और खाने की व्यवस्था की गई है। मस्जिदों के दरवाजे दूर-दराज से आने वाले नौजवानों के लिए खोले गए हैं, जिससे भर्ती रैली के दौरान सामुदायिक सहयोग की एक मिसाल सामने आई है। स्थानीय लोगों की तरफ से की गई यह मेहमाननवाज़ी उरी की सामाजिक तहज़ीब और भाईचारे की रवायत को भी उजागर करती है।

इसी तरह उरी के जुल्फिकार, पाकीज़ा और बादशाह जैसे होटलों ने भी भर्ती उम्मीदवारों के लिए मुफ्त बिस्तर और भोजन उपलब्ध कराने में सहयोग दिया है। कई उम्मीदवारों के लिए यह व्यवस्था खास तौर पर अहम है, क्योंकि उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए अपने घरों से काफी दूर सफर करना पड़ा है। स्थानीय होटल कारोबारियों की यह पहल भीड़ के बीच आने वाले युवाओं के लिए एक सुरक्षित और सहूलियतभरा ठिकाना मुहैया करा रही है।

अग्निवीर भर्ती रैली में युवाओं की यह भागीदारी जम्मू-कश्मीर के नौजवानों में भारतीय सेना में सेवा देने और अपने भविष्य को नई दिशा देने की दिलचस्पी को सामने लाती है। भर्ती मैदान में उम्मीदवारों की कतारें जहां उनके इरादों और मेहनत की तस्वीर पेश कर रही हैं, वहीं उरी के बाजार, मसाजिद और होटल उनकी मेहमाननवाज़ी और सामाजिक सहयोग की कहानी बयान कर रहे हैं।

सरहदी उरी में सामने आई यह तस्वीर इस बात को भी रेखांकित करती है कि नौजवानों के भविष्य से जुड़े मौकों पर स्थानीय समाज किस तरह मिल-जुलकर मदद का हाथ बढ़ा सकता है। अग्निवीर बनने की उम्मीद लेकर पहुंचे युवाओं के लिए स्थानीय लोगों की यह मदद भर्ती प्रक्रिया के साथ-साथ उन्हें उरी की मेहमाननवाज़ी, भाईचारे और तहज़ीब का भी एहसास करा रही है।

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