टारबेला बांध के पास लश्कर प्रशिक्षण का दावा, एसएसजी से कथित जुड़ाव पर उठे सवाल


पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे और वहां की सुरक्षा एजेंसियों के बीच कथित संपर्क को लेकर एक नई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रेजोनेंट न्यूज की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के टारबेला बांध के आसपास लश्कर-ए-तैयबा के कैडरों के साथ पाकिस्तान सेना की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (एसएसजी) से जुड़े कर्मियों को देखा गया। रिपोर्ट में एक वीडियो का हवाला देते हुए इसे प्रशिक्षक और प्रशिक्षुओं के बीच संभावित संपर्क के तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है, इसलिए इन्हें फिलहाल रिपोर्ट में किए गए आरोप के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, टारबेला के आसपास सामने आए दृश्य इसलिए अहम माने जा रहे हैं क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान के मंगला इलाके को लेकर भी इसी तरह के दावे सामने आ चुके हैं। बताया गया है कि मंगला और अब टारबेला जैसे इलाकों में एसएसजी से जुड़े सैन्य प्रतिष्ठानों के आसपास आतंकवादी संगठन के सदस्यों की कथित मौजूदगी सुरक्षा ढांचे और आतंकी नेटवर्क के बीच संभावित रिश्तों की ओर इशारा करती है। रिपोर्ट में वीडियो के कुछ दृश्यों को इस बात के विश्लेषण के तौर पर पेश किया गया है कि क्या वहां सैन्य प्रशिक्षण हासिल करने वाले तत्वों और लश्कर कैडरों के बीच किसी तरह का संपर्क मौजूद था।

लश्कर-ए-तैयबा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है और लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने वाली आतंकी गतिविधियों से इसका नाम जुड़ता रहा है। ऐसे में यदि टारबेला के आसपास सामने आए दावों की स्वतंत्र जांच में पुष्टि होती है, तो यह पाकिस्तान में आतंकवादी नेटवर्क और सैन्य प्रतिष्ठानों के बीच कथित संपर्क को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर सकता है। खास तौर पर जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में यह मुद्दा इसलिए संवेदनशील है क्योंकि सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकवादी ढांचे को समर्थन देने के आरोप पाकिस्तान पर पहले भी लगते रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि ऐसे दृश्य पाकिस्तान के उन आधिकारिक दावों पर सवाल खड़े कर सकते हैं, जिनमें आतंकवादी संगठनों से दूरी बनाए रखने की बात कही जाती है। यदि किसी आतंकवादी संगठन के कैडरों और विशेष सैन्य बलों से जुड़े कर्मियों के बीच संपर्क की पुष्टि होती है, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के रुख की विश्वसनीयता पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर के लिए यह घटनाक्रम खास अहमियत रखता है। वादी में पिछले वर्षों के दौरान अमन-ओ-अमान, विकास, पर्यटन और नौजवानों के बेहतर मुस्तकबिल को मजबूत करने की कोशिशें लगातार आगे बढ़ी हैं। ऐसे में सीमा पार आतंकवाद से जुड़े किसी भी नेटवर्क की मौजूदगी या उसके संभावित प्रशिक्षण ढांचे की खबरें इस बात को रेखांकित करती हैं कि क्षेत्र में स्थायी अमन के लिए आतंकवाद के बुनियादी ढांचे पर रोक लगाना कितना जरूरी है। कश्मीर के लोग लंबे समय से चाहते हैं कि सरहद के दोनों तरफ तनाव और हिंसा के बजाय तरक्की, कारोबार, शिक्षा और आपसी संपर्क का माहौल मजबूत हो।

फिलहाल टारबेला बांध के पास सामने आए वीडियो और रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र एवं विश्वसनीय पुष्टि की आवश्यकता बनी हुई है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें दिखाई देने वाले व्यक्तियों की पहचान और कथित गतिविधियों की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी। यदि जांच में सैन्य प्रतिष्ठानों और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन के बीच किसी तरह का संगठित संपर्क सामने आता है, तो यह न केवल पाकिस्तान की सुरक्षा नीति बल्कि पूरे क्षेत्र में अमन-ओ-अमान की कोशिशों के लिए भी गंभीर सवाल पैदा कर सकता है।

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