10वीं नेशनल डेफ सब-जूनियर एंड जूनियर तथा 27वीं नेशनल डेफ सीनियर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप का आयोजन कानपुर में किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इसी राष्ट्रीय मंच पर जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल भावना का मुज़ाहिरा करते हुए 12 पदक हासिल किए। टीम की यह कामयाबी वादी और जम्मू-कश्मीर के खेल जगत के लिए एक अहम उपलब्धि के तौर पर देखी जा रही है।
प्रतियोगिता में जूडो के मुकाबलों में राकेश सिंह और रक्षिंदा मेहक ने स्वर्ण पदक हासिल कर टीम की कामयाबी में अहम योगदान दिया। दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। उनके स्वर्ण पदक ने टीम के प्रदर्शन को और मजबूती दी तथा राष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर के विशेष रूप से सक्षम खिलाड़ियों की काबिलियत को सामने रखा।
कराटे और जूडो में पुरुषों और महिलाओं की अलग-अलग श्रेणियों में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इन मुकाबलों में 12 पदक हासिल करना इस बात का इशारा है कि जम्मू-कश्मीर में मूक-बधिर खिलाड़ियों के बीच खेलों को लेकर दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित किया कि सुनने और बोलने से जुड़ी चुनौतियां उनके खेली जज़्बे और कामयाबी की राह में रुकावट नहीं बन सकतीं।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मिली इस कामयाबी को जम्मू-कश्मीर में समावेशी खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम माना जा सकता है। ऐसे खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के जरिए दूसरे बच्चों और नौजवानों के लिए हौसले का पैगाम पेश करते हैं। खेल का मैदान उन्हें अपनी काबिलियत दिखाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और राष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने का मौका देता है। कानपुर में जम्मू-कश्मीर टीम का प्रदर्शन इसी जज़्बे की एक मिसाल के तौर पर सामने आया है।
जम्मू-कश्मीर यूथ सर्विसेज एंड स्पोर्ट्स के अधिकारियों ने टीम और खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि पर मुबारकबाद दी। अधिकारियों की तरफ से खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की गई और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पदक जीतने पर टीम के सदस्यों को बधाई दी गई। खिलाड़ियों के लिए इस तरह की हौसला-अफ़ज़ाई आगे भी खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा का सबब बन सकती है।
मूक-बधिर खिलाड़ियों की यह उपलब्धि जम्मू-कश्मीर के खेल परिदृश्य में एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है। राष्ट्रीय स्तर पर 12 पदक हासिल कर खिलाड़ियों ने अपनी मेहनत का फल हासिल किया और जम्मू-कश्मीर की मौजूदगी को राष्ट्रीय खेल मंच पर मजबूत किया। जूडो में राकेश सिंह और रक्षिंदा मेहक के स्वर्ण पदक समेत पूरी टीम का प्रदर्शन यह बताता है कि सही अवसर और लगातार मेहनत मिलने पर विशेष रूप से सक्षम खिलाड़ी भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत का परचम बुलंद कर सकते हैं।
यह कामयाबी खिलाड़ियों, उनके परिवारों, प्रशिक्षकों और खेल से जुड़े लोगों के लिए हौसले का पैगाम है। साथ ही यह बात भी सामने आती है कि खेलों में हर खिलाड़ी को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बराबर मौके मिलना जरूरी है। जम्मू-कश्मीर के इन खिलाड़ियों ने कानपुर के राष्ट्रीय मंच पर अपने प्रदर्शन से इसी जज़्बे को उजागर किया है।


0 टिप्पणियाँ