पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बिगड़ते हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ती जा रही है। ब्रिटेन के 70 से ज्यादा सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres को पत्र लिखकर इलाके में हिंसा, संचार पाबंदियों और मानवाधिकार उल्लंघनों की शिकायतों पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इस पहल की अगुवाई Labour MP Imran Hussain ने की है, जो ब्रिटिश संसद के All-Party Parliamentary Group on Kashmir के Chair हैं।
सांसदों का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब PoJK के कई हिस्सों में स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, बिजली की कमी, भारी टैक्स, बेरोजगारी, खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और सरकारी सुविधाओं की कमी के खिलाफ आवाज उठाई। कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर धरना दिया और बाजार बंद रखकर प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई। स्थानीय रिपोर्टों में रास्ते बंद किए जाने, प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया है। कुछ घटनाओं में झड़पों के दौरान लोगों के घायल होने और मौतों की भी खबरें सामने आईं। हालांकि, संचार पाबंदियों के कारण इन घटनाओं की स्वतंत्र और पूरी जानकारी तुरंत सामने नहीं आ सकी।
स्थानीय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में आम नागरिक भी प्रभावित हुए। कई परिवारों ने दावा किया कि उनके रिश्तेदारों को हिरासत में लिए जाने के बाद लंबे समय तक उनकी स्थिति की जानकारी नहीं दी गई। सांसदों ने मृतकों और घायलों के मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
PoJK में लोगों की शिकायतें केवल राजनीतिक अधिकारों तक सीमित नहीं हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिजली कटौती, ईंधन की कमी और महंगाई ने रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। बिजली की अनियमित आपूर्ति से कारोबार, छोटे उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। खाद्य वस्तुओं और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, भारी टैक्स और सीमित रोजगार के अवसरों ने लोगों की नाराजगी बढ़ाई है।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर पाबंदी लगाए जाने की खबरें भी सामने आईं। संचार सेवाएं बंद होने से लोगों के लिए परिवारों से संपर्क करना, अस्पतालों और प्रशासन से मदद लेना तथा घटनाओं की सही जानकारी हासिल करना मुश्किल हो गया। ब्रिटेन और अन्य देशों में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों के परिवारों ने भी चिंता जताई कि वे अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के बारे में समय पर जानकारी नहीं पा रहे हैं।
ब्रिटिश सांसदों और कश्मीरी समुदाय से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि भारत के नियंत्रण वाले जम्मू-कश्मीर में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं के कारण लोगों को अपेक्षाकृत बेहतर सुविधाएं और आर्थिक अवसर मिल रहे हैं। इसके विपरीत, PoJK में लोग बिजली, रोजगार, महंगाई, खाद्य सुरक्षा और राजनीतिक अधिकारों जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि इसी अंतर के कारण PoJK के कई लोग भारत के जम्मू-कश्मीर में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और परिचितों से मिलने तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं और अवसरों का लाभ उठाने की इच्छा जताते हैं। कश्मीरी समुदाय से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों का यह भी कहना है कि PoJK के लोग भारत के जम्मू-कश्मीर के साथ जुड़ने और वहां के लोगों के साथ रहने की इच्छा व्यक्त करते हैं।

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