नासर जावेद: 20 साल से LeT के आतंकी नेटवर्क का अहम नाम, PoJK से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के लोअर डिर तक कनेक्शन

 


पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकी नेटवर्क से जुड़े पुराने नामों में नासर जावेद का नाम लंबे समय से सामने आता रहा है। अलग-अलग दस्तावेजों में उसे नस्र जावेद, नासिर जावेद, नासिर जावैद, नासर जावेद और अबू इस्माइल जैसे नामों से भी दर्ज किया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के रिकॉर्ड में भी उसके नाम और इन उपनामों का उल्लेख मिला है।

भारतीय सुरक्षा दस्तावेजों और उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, जावेद का नाम LeT के ट्रेनिंग, कैडर भर्ती और आतंकी नेटवर्क से करीब दो दशक से जुड़ा बताया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह 2004 से 2015 के दौरान पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के दुलाई ट्रेनिंग कैंप का कमांडर भी रहा है। इसके बाद उसका नाम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा स्थित मनसेहरा के जामिया अबू हुरैरा कैंप से भी जोड़ा गया।

भारत की ओर से 25 फरवरी 2010 को पाकिस्तान को सौंपे गए डोजियर में भी उसका नाम उन आतंकियों की सूची में दिया गया था, जिनकी भारत को तलाश थी। नासर जावेद का नाम 2006–2007 के हैदराबाद आतंकी नेटवर्क से जुड़े आरोपों में भी सामने आया है। कुछ रिपोर्ट्स में उसे अगस्त 2007 के हैदराबाद बम धमाकों की कथित संयुक्त योजना से जोड़ा गया है। उसका नाम LeT और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के बीच कथित समन्वय के संदर्भ में भी सामने आया है।

5 फरवरी 2008 को पाकिस्तान के कश्मीर सॉलिडेरिटी डे के दौरान नासर जावेद के एक भाषण का रिकॉर्ड भी सामने आया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने कश्मीर के नाम पर जिहादी विचारधारा और हिंसक एजेंडे को बढ़ावा देने वाली बातें की थीं।

1 जुलाई 2009 से प्रभावी अमेरिकी कार्रवाई में उसका नाम Executive Order 13224 के तहत आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों की प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया। अमेरिकी रिकॉर्ड में उसका नाम Nasir Javaid, Nasar Javed, Naser Javed, Nasir Javed और Abu Ishmael जैसे नामों से दर्ज है। ब्रिटेन ने भी उसे देश में प्रवेश से प्रतिबंधित किए जाने वाले व्यक्तियों की सूची में शामिल किया था।

2025 में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के लोअर डिर जिले के कुंबन मैदान इलाके में Markaz Jihad-e-Aqsa नाम के एक नए LeT-linked ट्रेनिंग और रिहायशी परिसर के निर्माण की रिपोर्ट्स सामने आईं। भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैटेलाइट इमेजरी और वीडियो में इस परिसर का निर्माण दिखाई दिया। इसे अफगानिस्तान सीमा से करीब 47 किलोमीटर दूर बताया गया और कुछ रिपोर्ट्स में इसे नासर जावेद की कथित कमान से जोड़ा गया है।

नासर जावेद से जुड़ी टाइमलाइन PoJK के दुलाई कैंप से लेकर लोअर डिर तक अलग-अलग समय में सामने आए कथित आतंकी नेटवर्क की ओर इशारा करती है। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि इससे सवाल उठता है कि क्या पुराने आतंकी नेटवर्क खत्म हुए हैं, या फिर उन्होंने नई लोकेशन और बदले हुए ढांचे के साथ अपनी गतिविधियां जारी रखी हैं।

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