पाकिस्तान के नागरिकों को लेकर खाड़ी देशों में सख्ती का एक और बड़ा मामला सामने आया है। मार्च से जुलाई 2026 के बीच छह Gulf Cooperation Council (GCC) देशों से 20 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को औपचारिक तौर पर डिपोर्ट किए जाने की जानकारी पाकिस्तान की National Assembly में पेश किए गए आंकड़ों में सामने आई है। इन आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों को सऊदी अरब से वापस भेजा गया, जहां करीब 15,500 लोगों का निष्कासन हुआ।
सऊदी अरब के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और दूसरे Gulf देशों से भी बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिकों को डिपोर्ट किया गया। आंकड़ों ने पाकिस्तान के लिए एक नई चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि Gulf region लंबे अरसे से पाकिस्तानी कामगारों और प्रवासियों के लिए रोजगार का एक अहम ठिकाना रहा है। लाखों पाकिस्तानी नागरिक रोजी-रोटी के सिलसिले में सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान में रहते और काम करते हैं।
National Assembly में पेश जानकारी के मुताबिक deportations के पीछे कई अलग-अलग वजहें बताई गई हैं। इनमें भीख मांगना, गैर-कानूनी तरीके से दाखिल होना, visa violations, drug-related offences और security concerns प्रमुख हैं। कुछ मामलों में लोगों के visa और residency rules की उल्लंघना को भी कार्रवाई की वजह बताया गया। Gulf देशों में immigration और public-security regulations को लेकर सख्ती बढ़ने के साथ ऐसे मामलों में authorities की कार्रवाई भी तेज हुई है।
खास तौर पर begging को लेकर Gulf देशों में Pakistani nationals के खिलाफ पहले से चिंता जताई जाती रही है। कई मामलों में धार्मिक यात्रा या visit visa पर Gulf जाने वाले लोगों पर वहां अवैध तौर पर भीख मांगने के आरोप लगे हैं। इसी तरह visa अवधि खत्म होने के बाद भी रुकना, बिना उचित दस्तावेज काम करना या immigration rules की अनदेखी करना भी deportation का कारण बन सकता है।
Drug offences और security-related मामलों ने इस मुद्दे को और संवेदनशील बना दिया है। Gulf देशों की authorities सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मामलों में zero-tolerance policy अपनाती हैं। ऐसे में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर अपराध या security concern सामने आने पर detention और deportation की कार्रवाई की जा सकती है।
इन आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि Gulf देशों में पाकिस्तानी नागरिकों के लिए immigration scrutiny पहले के मुकाबले ज्यादा सख्त हो रही है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हर पाकिस्तानी नागरिक को समान रूप से प्रतिबंध या कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में पाकिस्तानी प्रवासी Gulf economies में कानूनी तौर पर काम कर रहे हैं और अपने परिवारों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक मदद भेजते हैं।
फिर भी 20 हजार से ज्यादा deportations पाकिस्तान के लिए एक गंभीर warning signal मानी जा सकती हैं। इससे Islamabad के सामने अपने नागरिकों को visa rules, local laws और security regulations की सख्ती से पालन करने के बारे में जागरूक करने की जरूरत बढ़ गई है। साथ ही, पाकिस्तान को यह भी देखना होगा कि बार-बार सामने आ रहे ऐसे मामलों से उसके overseas workforce की reputation और Gulf देशों में रोजगार के अवसरों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
मार्च से जुलाई के सिर्फ पांच महीनों में इतनी बड़ी संख्या में deportations यह दिखाती हैं कि Gulf countries अब immigration violations, illegal activities और security concerns को लेकर काफी सख्त रवैया अपना रहे हैं। पाकिस्तान के लिए चुनौती सिर्फ अपने नागरिकों की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि Gulf region में भरोसा और अपने overseas workforce की साख बनाए रखना भी अब एक अहम मसला बन गया है।

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