पाकिस्तान में सैन्य ताकत का केंद्रीकरण, आसिम मुनीर को मिली तीनों सेनाओं की कमान


इस्लामाबाद, 22 अगस्त 2026: पाकिस्तान में फौज और सियासत के रिश्तों को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। पाकिस्तान की संसद ने Defence Forces of Pakistan Act 2026 को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को मुल्क की तीनों सशस्त्र सेनाओं—थल सेना, नौसेना और वायु सेना—की कमान पर बेहद व्यापक अधिकार हासिल हो गए हैं।

नए कानूनी ढांचे के तहत डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर (DFHQ) की स्थापना की गई है। इसके जरिए तीनों सेनाओं के साझा अभियानों और कमान को एक केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत लाने का प्रावधान किया गया है। यानी जमीन, समंदर और फिजा से जुड़े सैन्य ऑपरेशंस की निगरानी एक ही कमांड स्ट्रक्चर के तहत होगी।

इस कानून की सबसे अहम बात यह है कि CDF को सैन्य अफसरों और दूसरे कर्मियों के सर्विस मामलों में भी व्यापक इख्तियार दिए गए हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक उन्हें आर्मी, नेवी और एयर फोर्स के personnel को retire, discharge या release करने का अधिकार होगा। इसके अलावा रिटायरमेंट की उम्र या सर्विस की शर्तों में बदलाव और उम्र सीमा में रियायत देने का अधिकार भी नए ढांचे का हिस्सा बताया गया है।

नए सिस्टम में संयुक्त सैन्य अभियानों पर भी CDF का सीधा ऑपरेशनल कंट्रोल होगा। DFHQ के तहत तीनों सेनाओं के साझा ऑपरेशंस को एकीकृत किया जाएगा। इससे पाकिस्तान के पारंपरिक अलग-अलग सैन्य कमांड ढांचे की जगह ज्यादा केंद्रीकृत कमांड व्यवस्था कायम होने की राह खुलती है।

कानून की एक और अहम बात यह है कि अगर पुराने सैन्य कानूनों और नए कमांड ढांचे के बीच किसी तरह का टकराव पैदा होता है, तो नए प्रावधानों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की गई है। साथ ही CDF को प्रधानमंत्री के प्रमुख सैन्य सलाहकार के तौर पर भी नामित किया गया है।

इस फैसले को पाकिस्तान के सियासी और संवैधानिक निजाम के लिए काफी अहम माना जा रहा है। आलोचकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मुल्क की तीनों सेनाओं की कमान, personnel decisions और joint operations का इख्तियार एक ही सैन्य पद पर केंद्रित हो जाए, तो सिविलियन अथॉरिटी की निगरानी कितनी प्रभावी रह पाएगी।

पाकिस्तान में फौज का सियासत पर असर कोई नई बात नहीं है। मुल्क की तारीख में कई मर्तबा सैन्य नेतृत्व ने सीधे या परोक्ष तौर पर सियासी फैसलों में अहम किरदार अदा किया है। ऐसे में नई कमांड व्यवस्था को पाकिस्तान में मिलिट्री पावर के और ज्यादा केंद्रीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

इस कानून से आसिम मुनीर की संस्थागत ताकत भी काफी बढ़ती दिखाई देती है। एक तरफ वह तीनों सेनाओं के संयुक्त ऑपरेशनल ढांचे के शीर्ष पर होंगे, वहीं दूसरी तरफ सैन्य personnel और कमांड से जुड़े अहम फैसलों में भी उनका दखल रहेगा। इससे पाकिस्तान के सिविल-मिलिट्री बैलेंस को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

कुल मिलाकर Defence Forces of Pakistan Act 2026 पाकिस्तान के फौजी निजाम में एक बड़ी तब्दीली का इशारा करता है। तीनों सेनाओं को एक केंद्रीकृत कमांड के नीचे लाने और CDF को व्यापक अधिकार देने से मुल्क की डिफेंस मशीनरी ज्यादा एकीकृत जरूर हो सकती है, मगर साथ ही यह सवाल भी सामने है कि इतनी ताकत एक ही सैन्य पद पर जमा होने से लोकतांत्रिक और सिविलियन निगरानी का दायरा कितना महफूज रहेगा। 

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