कश्मीर के अरागाम गांव के अब्दुल मन्नान भट की बड़ी कामयाबी, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में उर्दू और इंडो-पर्शियन पढ़ाएंगे

 

कश्मीर की वादी से निकलकर दुनिया की नामवर यूनिवर्सिटियों तक पहुंचने वाले नौजवानों की फेहरिस्त में अब अब्दुल मन्नान भट का नाम भी एक अहम मुकाम हासिल कर चुका है। बंदीपोरा के अरागाम से ताल्लुक रखने वाले मन्नान भट को अमेरिका की प्रतिष्ठित Harvard University में Urdu और Indo-Persian के Preceptor के तौर पर नियुक्त किया गया है। हार्वर्ड के Department of Near Eastern Languages and Civilizations में उनकी नियुक्ति कश्मीरी अकादमिक प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय पहचान को उजागर करती है।

मन्नान का सफर किसी एक दिन की कामयाबी नहीं, बल्कि बरसों की पढ़ाई, रिसर्च और लगातार मेहनत का नतीजा है। उन्होंने अमेरिका के Lafayette College से Religious Studies और International Affairs में पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने University of Pennsylvania का रुख किया, जहां Religious Studies में डॉक्टरेट की पढ़ाई की। इसी दौरान उन्हें प्रतिष्ठित Penn Presidential PhD Fellowship भी मिली, जो बेहतरीन अकादमिक क्षमता रखने वाले चुनिंदा शोधार्थियों को दी जाती है।

मन्नान की अकादमिक दिलचस्पी मजहब, अदब और समाज के आपसी रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। हार्वर्ड में वह Urdu और Indo-Persian literature, Sufism और Islamic intellectual traditions से जुड़े विषय पढ़ाते हैं। उनकी रिसर्च का खास फोकस Persianate दुनिया में इस्लामी विचार, शायरी और धार्मिक साहित्य की परंपराओं पर है। उनका पहला किताब प्रोजेक्ट “Divine Craft: Poetry, Bodies, and Islam in Modernity” है, जिसमें वह दक्षिण और मध्य एशिया में शायरी, धार्मिक ज्ञान और साहित्यिक अमल के रिश्ते को नए नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं।

उनके सफर की एक खास बात यह भी है कि उनकी पढ़ाई और रिसर्च कई जुबानों और सांस्कृतिक परंपराओं से होकर गुजरती है। मन्नान कश्मीरी, उर्दू और हिंदी में दक्ष हैं, जबकि फारसी और अरबी पर भी उनकी पकड़ है। उनकी रिसर्च में कश्मीरी समेत फारसी, अरबी, उर्दू और हिंदी के archival sources का इस्तेमाल शामिल है।

अकादमिक दुनिया के साथ मन्नान की पहचान एक उर्दू शायर के तौर पर भी है। वह ‘आलम’ के तखल्लुस से शायरी करते हैं और दक्षिण एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका में मुशायरों और साहित्यिक महफिलों में अपना कलाम पेश कर चुके हैं। उनकी कई ग़ज़लों को दक्षिण एशिया के मशहूर classical singers ने भी आवाज दी है।

2025 में University of Pennsylvania से उनकी PhD पूरी हुई। उनके dissertation को बाद में 2025 S.S. Pirzada Dissertation Prize in Pakistan Studies में honorable mention भी मिला, जो उनकी scholarly research की गुणवत्ता को दर्शाता है।

मन्नान भट की कहानी कश्मीर के उन नौजवानों के लिए एक अहम पैगाम है जो सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद बड़े ख्वाब देखते हैं। अरागाम से निकलकर Harvard जैसे विश्वस्तरीय अकादमिक संस्थान तक पहुंचना इस बात का सबूत है कि कश्मीर की तालीमी और बौद्धिक सलाहियत को जब सही मौके और अंतरराष्ट्रीय मंच मिलता है, तो वह अपनी अलग पहचान कायम कर सकती है।

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