कश्मीर की सरज़मीन पर खेलों में नई नस्ल की चमक लगातार सामने आ रही है। इसी कड़ी में Army Goodwill School (AGS) बांदीपोरा की छात्रा महनूर अख्तर ने श्रीनगर में हुए स्टेट कूडो चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। महनूर की इस कामयाबी के साथ ही उनका चयन आने वाली नेशनल कूडो चैंपियनशिप के लिए भी हुआ है। उनकी यह उपलब्धि बांदीपोरा के साथ-साथ पूरे कश्मीर के लिए फख्र का मौका है।
कूडो एक मार्शल आर्ट डिसिप्लिन है, जिसमें फिजिकल स्ट्रेंथ के साथ तेजी, बैलेंस, तकनीक और मानसिक एकाग्रता की भी खास अहमियत होती है। महनूर ने राज्य स्तर के मुकाबलों में अपनी मेहनत और हुनर का मुज़ाहिरा करते हुए गोल्ड पर कब्जा जमाया। इस प्रदर्शन ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले का टिकट दिलाया है, जहां अब वह कश्मीर की नुमाइंदगी करेंगी।
महनूर की कामयाबी को Army Goodwill Schools में तालीम के साथ खेलों को दी जा रही अहमियत के तौर पर भी देखा जा रहा है। AGS की बुनियाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दूरदराज़ इलाकों में बच्चों को बेहतर तालीमी मौके देने और उनकी छिपी सलाहियतों को सामने लाने के मकसद से रखी गई थी। इन स्कूलों में किताबों की तालीम के साथ स्पोर्ट्स, फिजिकल फिटनेस, कल्चरल एक्टिविटीज और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट पर भी तवज्जो दी जाती है।
भारतीय सेना के ऑपरेशन सद्भावना के तहत चलने वाला AGS नेटवर्क आज घाटी के कई इलाकों में बच्चों के लिए तालीम और तरक्की का एक अहम प्लेटफॉर्म बन चुका है। स्कूलों में विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ खेलों में आगे बढ़ने के लिए सुविधाएं, कोचिंग और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के मौके दिए जाते हैं। यही वजह है कि इन स्कूलों से निकलने वाले कई बच्चे अलग-अलग खेलों में जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना रहे हैं।
AGS बांदीपोरा भी इसी सफर का अहम हिस्सा है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचि के मुताबिक खेल और दूसरी गतिविधियों में आगे बढ़ने का मौका मिलता है। महनूर का गोल्ड मेडल इसी माहौल में तैयार हो रही उस नई खेल प्रतिभा की मिसाल है, जो कश्मीर के गांवों और कस्बों से निकलकर बड़े मंचों तक पहुंच रही है।
महनूर अख्तर की कामयाबी का एक खास पहलू यह भी है कि उन्होंने मार्शल आर्ट जैसे खेल में अपनी जगह बनाई है, जहां अनुशासन और लगातार मेहनत कामयाबी की बुनियाद माने जाते हैं। उनकी यह जीत घाटी की दूसरी लड़कियों के लिए भी एक हौसला है कि अगर इरादा मजबूत हो और सही प्लेटफॉर्म मिले तो खेल के किसी भी मैदान में कामयाबी हासिल की जा सकती है।
अब महनूर की निगाहें नेशनल चैंपियनशिप पर हैं। राज्य स्तर पर गोल्ड जीतने के बाद उनसे उम्मीद है कि वह राष्ट्रीय मंच पर भी अपने प्रदर्शन से बांदीपोरा और कश्मीर का नाम रोशन करेंगी। उनकी कहानी इस बात का पैगाम देती है कि घाटी की नौजवान नस्ल में टैलेंट की कोई कमी नहीं—जरूरत सिर्फ उसे सही रहनुमाई, मौके और मंच देने की है।

0 टिप्पणियाँ