JKLF ने अमेरिकी राजदूत के बयान को नकारा, J&K को भारत का अहम हिस्सा बताने पर जताई आपत्ति


लंदन, 20 अगस्त 2026: जम्मू-कश्मीर को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के हालिया बयान पर अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। लंदन से जारी एक प्रेस बयान में संगठन ने गोर द्वारा जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” बताए जाने पर गहरी आपत्ति जताते हुए इस टिप्पणी को खारिज कर दिया।

सर्जियो गोर ने 19 अगस्त को श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद जम्मू-कश्मीर को “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” बताया था। उन्होंने क्षेत्र की खूबसूरती और यहां की सुरक्षा स्थिति की भी तारीफ की। गोर ने यह भी संकेत दिया कि बेहतर सुरक्षा माहौल को देखते हुए अमेरिका जम्मू-कश्मीर से जुड़ी अपनी यात्रा एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है। 

JKLF ने अपने बयान में अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी को स्वीकार करने से इनकार करते हुए जम्मू-कश्मीर के लिए आत्मनिर्णय की अपनी पुरानी मांग दोहराई। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के भविष्य का फैसला आत्मनिर्णय के अधिकार के आधार पर होना चाहिए।

हालांकि, गोर के बयान के बाद केवल JKLF ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया। इस्लामाबाद ने इसे अपने घोषित रुख के विपरीत बताया और जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र के रूप में पेश करने की कोशिश की।

भारत ने पाकिस्तान की प्रतिक्रिया को तवज्जो नहीं दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और आगे भी रहेंगे। 

इस पूरे घटनाक्रम में JKLF की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी राजदूत के बयान के बाद संगठन का तुरंत विरोध यह दिखाता है कि अलगाववादी प्लेटफॉर्म अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जम्मू-कश्मीर की स्थिति को अपने पारंपरिक नैरेटिव के अनुरूप पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक द्वारा श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताए जाने से इस नैरेटिव को राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती मिली है।

हालांकि, गोर की टिप्पणी को अमेरिकी विदेश नीति में औपचारिक बदलाव के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। विशेषज्ञों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि बयान महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इससे अपने आप में वाशिंगटन की आधिकारिक कश्मीर नीति में बदलाव साबित नहीं होता।

फिलहाल, JKLF का विरोध यह संकेत देता है कि अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी ने अलगाववादी संगठनों के बीच बेचैनी बढ़ाई है। दूसरी ओर, भारत ने जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक और क्षेत्रीय स्थिति पर अपने स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।

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