मिली मालूमात के मुताबिक़, नेहरियन बईहक के ऊपरी पहाड़ी इलाक़े में एक बुज़ुर्ग शख़्स पर अचानक जंगली भालू ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर तौर पर ज़ख्मी हो गए। इलाक़ा बेहद दुर्गम होने की वजह से तत्काल मदद पहुँचाना आसान नहीं था, लेकिन जैसे ही घटना की इत्तिला भारतीय सेना को मिली, जवान बिना देर किए मौके पर पहुँच गए।
मौके पर पहुँचते ही भारतीय सेना के जवानों ने घायल बुज़ुर्ग को फ़ौरन प्राथमिक उपचार (फ़र्स्ट एड) दिया, ताकि उनकी हालत और ज़्यादा न बिगड़े। इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से एक तेज़ और सुनियोजित रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। कठिन पहाड़ी रास्तों और चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद जवानों ने घायल को सुरक्षित निकालकर नज़दीकी अस्पताल तक पहुँचाया, जहाँ उनका आगे का इलाज शुरू किया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक़, समय पर मिली प्राथमिक चिकित्सा और तेज़ी से अस्पताल पहुँचाए जाने की वजह से घायल को तुरंत इलाज मिल सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर राहत पहुँचने में थोड़ी भी देर होती, तो हालात कहीं ज़्यादा गंभीर हो सकते थे। उन्होंने भारतीय सेना की तत्परता, पेशेवर अंदाज़ और इंसानी हमदर्दी की भरपूर तारीफ़ की।
इलाक़े के बाशिंदों ने कहा कि दूरदराज़ पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति के दौरान भारतीय सेना हमेशा सबसे पहले मदद के लिए आगे आती है। चाहे प्राकृतिक आपदा हो, स्वास्थ्य संबंधी इमरजेंसी हो या किसी हादसे में राहत पहुँचानी हो, सेना के जवान हर मुश्किल वक़्त में लोगों के साथ खड़े नज़र आते हैं।
स्थानीय अवाम ने भारतीय सेना और रेस्क्यू अभियान में शामिल वालंटियर्स का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई इंसानियत, ख़िदमत और अवाम की हिफ़ाज़त के प्रति समर्पण की बेहतरीन मिसाल है। उनका कहना था कि सेना की फ़ौरन कार्रवाई ने न सिर्फ़ एक ज़िंदगी बचाई, बल्कि लोगों के दिलों में भरोसे और अपनापन को भी और मज़बूत किया।
कश्मीर के दूरदराज़ इलाक़ों में भारतीय सेना की ऐसी जन-कल्याणकारी पहलें लगातार यह पैग़ाम देती हैं कि सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की सलामती, राहत और बहबूद (कल्याण) भी उसकी अहम ज़िम्मेदारियों में शामिल है। बोनियार का यह रेस्क्यू ऑपरेशन एक बार फिर साबित करता है कि मुश्किल से मुश्किल हालात में भी भारतीय सेना इंसानी ख़िदमत और फ़ौरन राहत पहुँचाने के अपने फ़र्ज़ को पूरी लगन और पेशेवराना अंदाज़ में निभा रही है।

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