पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी दमन की इंतिहा: 54 दिनों में 75 नागरिकों की मौत, रावलकोट में फिर खूनी झड़पें


रावलकोट (पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर): पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) एक बार फिर हिंसा, दमन और अवाम के ग़ुस्से का गवाह बना है। रावलकोट के चिनार चौक पर अपने हक़ और इंसाफ़ की मांग को लेकर जमा हुए प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की कथित गोलीबारी के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। स्थानीय सूत्रों और प्रदर्शनकारियों के दावों के मुताबिक़ इस ताज़ा घटना में कम से कम 14 लोगों की जान चली गई, जबकि बड़ी तादाद में लोग ज़ख़्मी हुए हैं।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का कहना है कि 5 जून से शुरू हुए आंदोलन के बाद से अब तक 54 दिनों के भीतर 75 नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। समिति का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षाबल निहत्थे लोगों पर लगातार बल प्रयोग कर रहे हैं, बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की जा रही हैं और विरोध की हर आवाज़ को सख़्ती से दबाने की कोशिश की जा रही है।

रावलकोट के चिनार चौक पर उस वक़्त हालात बिगड़ गए जब बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ प्रदर्शनकारियों ने अपने लापता साथियों और हालिया मौतों के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद की, लेकिन इसी दौरान पाकिस्तानी रेंजर्स ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। इसके बाद पूरे इलाक़े में अफ़रा-तफ़री फैल गई और कई लोग गोली लगने से घायल हो गए।

हालांकि कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ। बड़ी तादाद में लोग चिनार चौक और आसपास के इलाक़ों में डटे रहे। प्रदर्शनकारियों का काफ़िला डी-चौक की ओर बढ़ा और बाद में रावलकोट के मक़बूल भट शहीद चौक पर एकत्र होकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से गौर नहीं किया जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी का दावा है कि हाल के दिनों में अचानक लोगों के लापता होने, संदिग्ध मौतों और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाइयों ने पूरे पीओके में डर और बेचैनी का माहौल पैदा कर दिया है। समिति का आरोप है कि सैकड़ों लोग ज़ख़्मी हुए हैं और बड़ी संख्या में नागरिकों को हिरासत में लिया गया है। उनका कहना है कि हालात अब सामान्य कानून-व्यवस्था के दायरे से निकलकर व्यापक जन असंतोष का रूप ले चुके हैं।

इस बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (PTI) के नेता डॉ. शहबाज़ गिल ने भी इस घटनाक्रम पर पाकिस्तानी सेना और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आम नागरिकों के खिलाफ़ सैन्य कार्रवाई की जा रही है, उसने स्थानीय आबादी में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। गिल के मुताबिक़ मृतकों की वास्तविक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया और स्थानीय माध्यमों पर सामने आ रही तस्वीरें और वीडियो हालात की गंभीरता बयान कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मारे गए कई युवक 22 से 28 वर्ष की आयु के थे और उनकी गोली लगने से मौत हुई।

शहबाज़ गिल ने विदेशों में बैठकर पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की तारीफ़ करने वालों पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि ज़मीनी हालात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, पीओके के लोगों में बढ़ता असंतोष आने वाले समय में और व्यापक रूप ले सकता है।

इधर, कश्मीर एक्शन कमेटी के नेता ख्वाजा मेहरान ने पाकिस्तान के साथ सभी प्रवेश मार्ग बंद करने और पाकिस्तानी सेना की आवाजाही रोकने की घोषणा की है। वहीं, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने संकेत दिया है कि आंदोलन के अगले चरण और नई रणनीति का आधिकारिक ऐलान जल्द किया जाएगा।

रावलकोट और पीओके के अन्य इलाक़ों में जारी यह आंदोलन अब केवल एक स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे वहां की अवाम द्वारा अपने अधिकारों, सुरक्षा और जवाबदेही की मांग से जोड़कर देखा जा रहा है। लगातार बढ़ती मौतों, घायल नागरिकों और दमन के आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति किस दिशा में जाती है, इस पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नज़र बनी हुई है।

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