पहला अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फ़ेस्टिवल: दुनिया के 50 देशों से मिली शानदार भागीदारी, सिनेमा के वैश्विक नक्शे पर उभरता कश्मीर


श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर का पहला इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ जम्मू एंड कश्मीर (IFFJK) 2026 दुनिया भर के फ़िल्मकारों के बीच तेज़ी से अपनी पहचान बना रहा है। फ़ेस्टिवल को अब तक करीब 50 देशों से 875 फ़िल्म प्रविष्टियाँ (Film Entries) प्राप्त हुई हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि जम्मू-कश्मीर अब केवल अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती ही नहीं, बल्कि सिनेमा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक उभरते वैश्विक केंद्र के रूप में भी देखा जाने लगा है।

जम्मू-कश्मीर सरकार की इस अहम पहल का आयोजन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) द्वारा नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) के सहयोग से किया जा रहा है। यह चार दिवसीय फ़िल्म महोत्सव 7 से 10 सितंबर 2026 तक आयोजित होगा। फ़िल्मों की प्रविष्टियाँ जमा करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जिसके चलते दुनिया भर के फ़िल्मकारों में अंतिम समय तक भी काफ़ी उत्साह देखा जा रहा है।

इस महोत्सव को मिली वैश्विक प्रतिक्रिया इस बात की गवाही देती है कि जम्मू-कश्मीर में फ़िल्म निर्माण के लिए अनुकूल माहौल, बेहतर बुनियादी ढाँचा और सरकार की सकारात्मक पहल ने अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म जगत का भरोसा जीता है। अलग-अलग देशों से आई फ़िल्में अपने साथ विविध संस्कृतियों, सामाजिक अनुभवों और कहानी कहने की अनूठी परंपराएँ लेकर आएँगी, जिससे यह महोत्सव वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकेगा।

चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में चयनित फ़िल्मों की स्क्रीनिंग के अलावा मास्टरक्लास, इंटरैक्टिव सेशन, पैनल डिस्कशन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के साथ संवाद भी आयोजित किए जाएँगे। इससे फ़िल्मकारों, विद्यार्थियों, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों को एक-दूसरे से सीखने, नए विचार साझा करने और भविष्य के सहयोग के अवसर तलाशने का मौक़ा मिलेगा।

आयोजकों का कहना है कि IFFJK का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित करना है, जहाँ कला, संस्कृति और सिनेमा के माध्यम से दुनिया भर के लोग एक-दूसरे के क़रीब आ सकें। साथ ही यह महोत्सव प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, प्राकृतिक सौंदर्य और रचनात्मक प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने पेश करने का भी अहम माध्यम बनेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ़िल्म उद्योग किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और स्थानीय रोज़गार को नई गति देने की क्षमता रखता है। जब अंतरराष्ट्रीय फ़िल्मकार किसी क्षेत्र में शूटिंग या भागीदारी के लिए आते हैं, तो उससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, होटल उद्योग, परिवहन, हस्तशिल्प और पर्यटन क्षेत्र को भी व्यापक लाभ मिलता है। ऐसे में IFFJK भविष्य में जम्मू-कश्मीर की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

यह महोत्सव केवल फ़िल्मों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य दुनिया के विभिन्न देशों की फ़िल्म संस्कृतियों को समझने, कलात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और सिनेमा के माध्यम से आपसी मित्रता एवं सहयोग को मज़बूत करना भी है। विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले फ़िल्मकारों की भागीदारी इस आयोजन को और अधिक समृद्ध बनाएगी।

गौरतलब है कि 17 जुलाई 2026 को आयोजित कर्टेन रेज़र समारोह के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ किया था। उन्होंने देश-विदेश के फ़िल्मकारों, निर्माताओं, निर्देशकों, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों को इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने का न्योता दिया था। इसके बाद से ही फ़िल्म जगत में इस आयोजन को लेकर लगातार उत्साह देखने को मिल रहा है।

कश्मीर लंबे समय से अपनी मनमोहक वादियों, झीलों, बर्फ़ से ढके पहाड़ों और सांस्कृतिक विरासत के कारण फ़िल्म निर्माताओं की पसंदीदा लोकेशन रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव जैसे आयोजन इस पहचान को और मज़बूत करते हुए जम्मू-कश्मीर को वैश्विक फ़िल्म मानचित्र पर एक नई जगह दिलाने की दिशा में अहम क़दम साबित हो रहे हैं।

करीब 50 देशों से 875 फ़िल्म प्रविष्टियों का मिलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जम्मू-कश्मीर अब केवल पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कृति, सिनेमा, नवाचार और रचनात्मक अभिव्यक्ति का भी उभरता हुआ वैश्विक मंच बन रहा है। यह महोत्सव प्रदेश की सकारात्मक छवि को दुनिया तक पहुँचाने के साथ-साथ स्थानीय प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसरों से जोड़ने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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