कश्मीर के पर्यावरण प्रहरी मंज़ूर वांगनू को 'ख़तीजा बेगम अवॉर्ड 2026' से नवाज़ा गया


श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यावरणविद् और समाजसेवी मंज़ूर वांगनू को पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए 'ख़तीजा बेगम अवॉर्ड 2026' से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान जम्मू-कश्मीर रूरल डेवलपमेंट सोसायटी (JKRDS) की ओर से प्रदान किया गया। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने समाज, पर्यावरण और सतत विकास के लिए असाधारण योगदान दिया हो।

मंज़ूर वांगनू को यह सम्मान घाटी में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों को पर्यावरण सुरक्षा के लिए एकजुट करने में उनके लंबे समय से चले आ रहे प्रयासों के लिए दिया गया। इस सम्मान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कश्मीर में नागरिक समाज पर्यावरण संरक्षण और समाज की बेहतरी के लिए अहम भूमिका निभा रहा है।

वर्षों से मंज़ूर वांगनू झीलों, नदियों, हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने लोगों, विशेषकर युवाओं को पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदार बनाने और स्वच्छ व हरित कश्मीर के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके प्रयासों ने यह दिखाया है कि जब समाज और नागरिक मिलकर काम करते हैं तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर रूरल डेवलपमेंट सोसायटी (JKRDS) द्वारा दिया गया यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के प्रयासों की सराहना भी है जो घाटी में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामाजिक कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। संस्था का मानना है कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं से ही नहीं, बल्कि आम लोगों की सक्रिय भागीदारी से भी संभव है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ते शहरीकरण और पर्यावरणीय चुनौतियों के इस दौर में ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान न केवल प्रकृति की रक्षा करते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने में भी अहम योगदान देते हैं।

कश्मीर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों, नदियों, बाग़-बगीचों और घने जंगलों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। ऐसे में इन प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत की हिफ़ाज़त का भी सवाल है। मंज़ूर वांगनू जैसे पर्यावरण प्रेमियों के प्रयास इस दिशा में समाज को नई सोच और नई प्रेरणा प्रदान करते हैं।

यह सम्मान इस बात का भी प्रतीक है कि जम्मू-कश्मीर में सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप देने की कोशिशें लगातार आगे बढ़ रही हैं। स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलने की यह सोच पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता को भी मज़बूत करती है।

मंज़ूर वांगनू को मिला 'ख़तीजा बेगम अवॉर्ड 2026' इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर में सकारात्मक सामाजिक पहल, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। यह उपलब्धि युवाओं और समाजसेवियों के लिए भी एक प्रेरणा है कि सामूहिक प्रयासों के ज़रिए प्रकृति की हिफ़ाज़त और समाज के विकास में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागरिक समाज, स्थानीय संस्थाएँ और आम लोग इसी तरह मिलकर काम करते रहें, तो जम्मू-कश्मीर आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। मंज़ूर वांगनू का यह सम्मान उसी सकारात्मक सोच, सामाजिक प्रतिबद्धता और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

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