शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सौगात: जम्मू-कश्मीर के स्कूलों के लिए केंद्र से ₹2,200 करोड़ से अधिक की सहायता


श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में स्कूली शिक्षा को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान बड़ा निवेश किया है। समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) और पीएम श्री (PM SHRI) योजनाओं के तहत केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच ₹2,200 करोड़ से अधिक की केंद्रीय सहायता जारी की है। यह निवेश प्रदेश के सरकारी स्कूलों में आधारभूत ढांचे को मज़बूत करने, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्यसभा में शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना के तहत तीन वर्षों में जम्मू-कश्मीर को ₹2,205.84 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी की गई। इसके अतिरिक्त पीएम श्री योजना के अंतर्गत भी ₹276.80 करोड़ की राशि जारी और उपयोग की गई। इस प्रकार दोनों योजनाओं के तहत कुल केंद्रीय सहायता ₹2,482.64 करोड़ तक पहुँच गई, जिससे प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक विकास कार्यों को गति मिली है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में समग्र शिक्षा योजना के तहत ₹516.92 करोड़, जबकि पीएम श्री योजना के तहत ₹124.68 करोड़ जारी किए गए। इन निधियों का उपयोग सरकारी विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार और छात्रों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार करने में किया जा रहा है।

इन योजनाओं के माध्यम से विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण, डिजिटल एवं स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय, खेल मैदान, पेयजल, बिजली, शौचालय, दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएँ, व्यावसायिक शिक्षा केंद्र और शिक्षण संसाधनों के विकास पर विशेष ज़ोर दिया गया है। इसका उद्देश्य केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना भी है।

शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को समग्र शिक्षा और पीएम श्री जैसी केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती है। विद्यालयों की आवश्यकताओं का आकलन हर वर्ष यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के आँकड़ों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के आधार पर किया जाता है। इसके बाद वार्षिक कार्य योजना एवं बजट (AWP&B) को प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) द्वारा स्वीकृति दी जाती है।

आँकड़ों के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना के तहत वर्ष 2023-24 में ₹865.43 करोड़, 2024-25 में ₹823.49 करोड़ तथा 2025-26 में ₹516.92 करोड़ जारी किए गए। वहीं, इस योजना के अंतर्गत उपलब्ध निधियों का अधिकांश हिस्सा विद्यालयों के विकास कार्यों पर प्रभावी ढंग से खर्च भी किया गया। वर्ष 2025-26 में उपलब्ध लगभग पूरी राशि का उपयोग शिक्षा संबंधी परियोजनाओं के लिए किया गया, जो योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

पीएम श्री योजना के अंतर्गत भी चरणबद्ध तरीके से सहायता बढ़ाई गई। वर्ष 2023-24 में ₹52.40 करोड़, 2024-25 में ₹99.72 करोड़ और 2025-26 में ₹124.68 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी की गई। इस योजना का उद्देश्य चुनिंदा सरकारी विद्यालयों को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम और आदर्श शिक्षण संस्थानों के रूप में विकसित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा किसी भी क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास की सबसे मज़बूत नींव होती है। बेहतर विद्यालय, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, डिजिटल कक्षाएँ और कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करती हैं। जम्मू-कश्मीर में शिक्षा क्षेत्र में हो रहा यह निवेश न केवल छात्रों की सीखने की क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा और रोज़गार के बेहतर अवसरों से भी जोड़ेगा।

केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिक्षा संवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, इसलिए विद्यालयों के विकास और स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान में केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। स्थानीय स्तर पर प्राप्त आवश्यकताओं के आधार पर ही विद्यालयों के लिए नई परियोजनाएँ स्वीकृत की जाती हैं।

शिक्षा क्षेत्र में यह व्यापक निवेश इस बात का संकेत है कि जम्मू-कश्मीर के युवाओं को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बेहतर विद्यालयी ढाँचा, डिजिटल सुविधाएँ और कौशल विकास पर केंद्रित योजनाएँ प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं तथा 'विकसित कश्मीर' की दिशा में एक सशक्त आधार तैयार कर रही हैं।

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