28 जुलाई 2026 को भेजे गए इस ज्ञापन में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) से तत्काल मानवीय और निवारक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। JKHRO का कहना है कि यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं तथा नागरिकों की जान को और अधिक खतरा पैदा हो सकता है।
ज्ञापन के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को रावलाकोट से मुज़फ़्फराबाद की ओर बढ़ रहे शांतिपूर्ण लॉन्ग मार्च के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 15 मृतकों की पहचान या आंशिक पहचान की गई है। इसके अलावा दो अन्य मृतकों की पहचान अभी शेष बताई गई है, जबकि कम से कम 80 से अधिक लोगों के घायल होने की विभिन्न रिपोर्टों का भी उल्लेख किया गया है। संस्था ने स्पष्ट किया है कि यह सूची अभी प्रारंभिक (Provisional) है और अंतिम स्वतंत्र रूप से सत्यापित मृत्यु सूची नहीं है।
ज्ञापन में कहा गया है कि संचार प्रतिबंध, अस्पतालों तक सीमित पहुँच और आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के कारण मृतकों और घायलों की सही संख्या का स्वतंत्र सत्यापन अभी जारी है। JKHRO ने बताया कि वह अस्पतालों, परिवारों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य स्रोतों से जानकारी एकत्र कर रही है ताकि अंतिम तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार की जा सके।
संस्था ने संयुक्त राष्ट्र से कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की अपील की है। इनमें तत्काल युद्धविराम और गोलीबारी रोकने की सार्वजनिक अपील, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध जीवित गोलियों के प्रयोग पर रोक, OHCHR की रावलाकोट तक तत्काल पहुँच, संयुक्त राष्ट्र की विशेष जांच प्रक्रिया (Special Procedures) सक्रिय करना, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की तैनाती तथा मानवीय सहायता और चिकित्सा सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना शामिल है।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि एक स्वतंत्र सत्यापन तंत्र (Independent Verification Mechanism) स्थापित किया जाए, जो घटनाओं से संबंधित सूचनाओं को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित कर सके। संस्था का कहना है कि संचार व्यवधान और सूचना प्रतिबंधों के कारण अफवाहों तथा अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
दस्तावेज़ में अस्पतालों, एम्बुलेंस सेवाओं, डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, घायलों को बिना किसी भय या प्रताड़ना के इलाज उपलब्ध कराने तथा आवश्यक दवाइयों, रक्त और राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति की भी मांग की गई है। इसके साथ ही खाद्य सामग्री, पेयजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
JKHRO ने संयुक्त राष्ट्र से यह भी अनुरोध किया है कि वह संबंधित पक्षों के बीच विश्वसनीय और समयबद्ध संवाद की सुविधा उपलब्ध कराए, ताकि नागरिकों की सुरक्षा, हिरासत में लिए गए लोगों के अधिकार, संचार सेवाओं की बहाली और मानवीय राहत जैसे मुद्दों पर शीघ्र समाधान निकाला जा सके।
ज्ञापन में प्रकाशित प्रारंभिक सूची के अनुसार मृतकों में ख्वाजा जरघम खलील, उस्मान नज़ीर, मोहम्मद मुज़म्मिल, नईम बट्ट, फ़िदा हुसैन, फ़हीम अफ़ज़ल, काशिफ याकूब, साक़िब हनीफ़, साक़िब इशाक, निसार धमन, अरील असगर, कमरान मुश्ताक, उस्मान गुल, जाफ़र पहलवान और अरसलान लतीफ़ डार के नाम शामिल हैं, जबकि दो अन्य व्यक्तियों की पहचान की पुष्टि अभी शेष बताई गई है।
मानवाधिकार संस्था ने अपने ज्ञापन के अंत में कहा है कि स्थिति लगातार बदल रही है और यदि समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं हुआ तो जनहानि बढ़ने की आशंका बनी रहेगी। संस्था ने संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्ष जांच, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की तैनाती और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

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