श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के लिए फ़ख्र की बात है कि शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST-K) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर सैयद मुदस्सिर अंद्राबी को भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में शुमार जेसी बोस फ़ेलोशिप (JC Bose Fellowship) से नवाज़ा गया है। यह सम्मान उनके लंबे अरसे से विज्ञान, शोध, तकनीकी नवाचार और ट्रांसलेशनल रिसर्च के क्षेत्र में किए गए बेमिसाल योगदान की तस्दीक करता है।
प्रो. अंद्राबी इस वक़्त SKUAST-K के फ़ैकल्टी ऑफ़ वेटरिनरी साइंसेज़ एंड एनिमल हज़्बेंड्री में डिविज़न ऑफ़ एनिमल बायोटेक्नोलॉजी के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष हैं। उन्हें यह फ़ेलोशिप उन चुनिंदा भारतीय वैज्ञानिकों को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक के तौर पर हासिल हुई है, जिन्होंने अपने शोध और वैज्ञानिक नेतृत्व से देश में विज्ञान और तकनीक की तरक़्क़ी को नई दिशा दी है।
यह उपलब्धि केवल एक वैज्ञानिक की व्यक्तिगत कामयाबी नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में उभर रही वैज्ञानिक प्रतिभा, अनुसंधान संस्कृति और नवाचार की बढ़ती ताक़त का भी सबूत मानी जा रही है। इससे यह पैग़ाम भी मज़बूत होता है कि घाटी अब शिक्षा, विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है।
प्रो. अंद्राबी का शोध कार्य कई अहम क्षेत्रों में फैला हुआ है। उन्होंने एनिमल बायोटेक्नोलॉजी, मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स, वैक्सीन डेवलपमेंट, रीजनरेटिव मेडिसिन, बायोइंजीनियरिंग और ट्रांसलेशनल बायोमेडिकल रिसर्च जैसे विषयों पर उल्लेखनीय काम किया है। उनकी रिसर्च का मक़सद ऐसी आधुनिक तकनीकों को विकसित करना रहा है, जो इंसानों और जानवरों दोनों की सेहत को बेहतर बनाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र और सार्वजनिक कल्याण को भी मज़बूत करें।
प्रो. अंद्राबी के नाम 13 पेटेंट दर्ज हैं, जो उनके नवाचार और वैज्ञानिक सोच की अहम मिसाल माने जाते हैं। उनके शोध कार्यों ने न सिर्फ़ अकादमिक दुनिया में नई राहें खोली हैं, बल्कि स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े व्यावहारिक समाधान भी पेश किए हैं, जिनका लाभ समाज के व्यापक तबके तक पहुँच सकता है।
फ़िलहाल वह देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा वित्तपोषित बड़े अनुसंधान प्रोजेक्ट्स की अगुवाई कर रहे हैं। इनमें अनुसंधान नेशनल रिसर्च फ़ाउंडेशन (ANRF), डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी (DBT), डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST), इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) शामिल हैं। उनके मौजूदा शोध का दायरा एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस, जीन एडिटिंग, रीजनरेटिव मेडिसिन, वैक्सीन डेवलपमेंट और वन हेल्थ (One Health) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों तक फैला हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रो. अंद्राबी की यह उपलब्धि जम्मू-कश्मीर के युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। यह साबित करती है कि समर्पण, मेहनत और उच्च स्तरीय अनुसंधान के ज़रिए देश के किसी भी हिस्से से अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक पहचान हासिल की जा सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर के शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों ने कृषि, स्वास्थ्य, जैव प्रौद्योगिकी और पर्यावरण विज्ञान जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। SKUAST-K भी लगातार आधुनिक अनुसंधान, नवाचार और तकनीक आधारित समाधान विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रो. अंद्राबी को मिला यह सम्मान विश्वविद्यालय की बढ़ती वैज्ञानिक साख और शोध उत्कृष्टता का भी प्रमाण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञान और नवाचार किसी भी समाज की दीर्घकालिक प्रगति की बुनियाद होते हैं। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के वैज्ञानिकों को राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान न केवल क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मज़बूत करती है, बल्कि स्थानीय युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए भी प्रोत्साहित करती है।
प्रो. सैयद मुदस्सिर अंद्राबी को मिला जेसी बोस फ़ेलोशिप सम्मान इस बात का प्रतीक है कि जम्मू-कश्मीर आज केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी क्षेत्रों में अपनी मज़बूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

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