
समारोह में शिक्षा, समाज सेवा, कला-संस्कृति, उद्यमिता, स्वास्थ्य, खेल और महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली कई ख़वातीन को “लाल डेड नेशनल अवॉर्ड” से नवाज़ा गया। इस मौके पर उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की महिलाएं आज हर मैदान में अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं और मुल्क की तरक़्क़ी में अहम किरदार निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि “कश्मीर की बेटियां अब सिर्फ़ घरों तक महदूद नहीं रहीं, बल्कि इल्म, तहज़ीब, कारोबार और क़ौमी सेवा के मैदान में नई मिसालें कायम कर रही हैं।”
अपने ख़िताब में उन्होंने सूफी संत और महान कवयित्री लाल डेड की विरासत का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनकी सोच और पैग़ाम आज भी महिलाओं को हौसला और रौशनी देते हैं। उन्होंने कहा कि लाल डेड ने सदियों पहले इंसानियत, बराबरी और इल्म की जो मशाल रोशन की थी, आज वही रूह जम्मू-कश्मीर की महिलाओं में दिखाई दे रही है।
समारोह में सम्मानित हुई कई महिलाओं की कहानियां बेहद प्रेरणादायक रहीं। किसी ने मुश्किल हालात में तालीम हासिल कर अपने गांव की बच्चियों के लिए स्कूल शुरू किया, तो किसी ने कश्मीरी हस्तशिल्प और लोक कला को नई पहचान देकर स्थानीय महिलाओं को रोज़गार मुहैया कराया। कुछ अवॉर्डी ऐसी भी थीं जिन्होंने समाज में नशा, बेरोज़गारी और घरेलू हिंसा जैसे मसलों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया।
एक सम्मानित शिक्षिका ने कहा, “यह अवॉर्ड सिर्फ़ मेरा नहीं, बल्कि हर उस कश्मीरी बेटी का है जो मुश्किल हालात में भी अपने ख्वाबों को ज़िंदा रखती है।” वहीं एक युवा उद्यमी ने कहा कि सरकार की तरफ़ से मिल रही मदद और प्रोत्साहन ने महिलाओं में नया भरोसा पैदा किया है। उन्होंने कहा कि आज कश्मीर की लड़कियां कारोबार, स्टार्टअप और डिजिटल दुनिया में भी आगे बढ़ रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का दिल जीत लिया। कश्मीरी सूफियाना संगीत, पारंपरिक वानवुन और लोक नृत्य ने समारोह को एक रूहानी और तहज़ीबी रंग दे दिया। इससे यह पैग़ाम भी गया कि कश्मीर सिर्फ़ अपनी ख़ूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति और प्रतिभाशाली महिलाओं के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है।
उपराज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन महिलाओं की तालीम, सुरक्षा, हुनर विकास और आर्थिक मजबूती के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि हर लड़की को बराबरी का मौका मिले ताकि वह अपने सपनों को पूरा कर सके। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों, कौशल विकास योजनाओं और शिक्षा अभियानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन पहलों से हज़ारों महिलाएं फायदा उठा रही हैं।
समारोह में मौजूद लोगों ने भी इस पहल की भरपूर सराहना की। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना था कि ऐसे आयोजन महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला देते हैं और समाज में एक सकारात्मक पैग़ाम पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर की महिलाओं ने हमेशा मुश्किल दौर में भी अपने जज़्बे और हिम्मत से समाज को संभाला है, और अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
“कश्मीर्स मोमेंट ऑफ नेशनल प्राइड” की थीम पर आयोजित यह समारोह इस बात का सबूत बना कि जम्मू-कश्मीर की महिलाएं अब बदलाव की नई तस्वीर बन चुकी हैं। उनकी सफलता सिर्फ़ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समाज की तरक़्क़ी और नई सोच की निशानी है।
लाल डेड नेशनल अवॉर्ड समारोह ने एक बार फिर साबित किया कि कश्मीर की बेटियां मेहनत, इल्म और हुनर के दम पर मुल्क की तरक़्क़ी में अपना अहम हिस्सा डाल रही हैं। यह आयोजन उन तमाम महिलाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का पैग़ाम बनकर उभरा, जो अपने सपनों को हक़ीक़त में बदलने का हौसला रखती हैं।

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