
सूत्रों के मुताबिक़, इन कैंपों में शामिल लोगों को नदी, झील और समंदर के रास्ते घुसपैठ, बचाव और हथियारों की आवाजाही जैसी तकनीकों की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की ट्रेनिंग सिर्फ़ खेल या फिटनेस तक महदूद नहीं, बल्कि दहशतगर्दी ऑपरेशनों की तैयारी का हिस्सा है। यही वजह है कि इन गतिविधियों ने पूरे दक्षिण एशिया में सिक्योरिटी एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारों का कहना है कि सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में कैंप चलने के बावजूद पाकिस्तान की हुकूमत और सुरक्षा एजेंसियां ख़ामोश क्यों हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर किसी मुल्क में दर्जनों कैंप लगातार आयोजित हो रहे हों और प्रशासन कोई कार्रवाई न करे, तो यह “स्टेट टॉलरेंस” यानी सरकारी संरक्षण की तरफ़ साफ़ इशारा करता है।
इंटरनेशनल एजेंसियां पहले भी पाकिस्तान को आतंकवाद के मसले पर कई बार चेतावनी देती रही हैं। FATF समेत कई वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान पर यह इल्ज़ाम लगता रहा है कि वह आतंकवादी नेटवर्क्स के खिलाफ़ ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रहा है। अब इन नए कैंपों की खबरों ने एक बार फिर पाकिस्तान की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, पानी के रास्ते घुसपैठ की ट्रेनिंग बेहद ख़तरनाक मानी जाती है क्योंकि इससे सीमावर्ती इलाक़ों में अचानक हमलों का खतरा बढ़ जाता है। भारत पहले भी समुद्री रास्तों से आतंकी हमलों का दर्द झेल चुका है, इसलिए ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही हैं।
कश्मीर और पीओके से जुड़े मामलों पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे अरसे से “प्रॉक्सी वॉर” की नीति पर काम करता आया है। कभी लॉन्च पैड, कभी हथियार सप्लाई और अब वॉटर ट्रेनिंग कैंप — ये तमाम गतिविधियां इस बात की तरफ़ इशारा करती हैं कि आतंकवाद को अब भी रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इन खुलासों के बाद तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई यूज़र्स ने पाकिस्तान को “Factory of Terror” यानी “आतंक की फैक्ट्री” करार देते हुए कहा कि दुनिया को अब सिर्फ़ बयान नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। कुछ पोस्ट्स में आतंकियों की ट्रेनिंग तस्वीरों को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चेतावनियों के साथ जोड़कर दिखाया गया, ताकि यह साफ़ हो सके कि पाकिस्तान की ज़मीन पर कट्टरपंथ और दहशतगर्दी किस तरह खुलेआम फल-फूल रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ने ऐसे कैंपों पर लगाम नहीं लगाई, तो भारत-पाक रिश्तों में तनाव और बढ़ सकता है। साथ ही, इससे दक्षिण एशिया में अमन और स्थिरता की कोशिशों को भी गहरा नुकसान पहुंचेगा।
दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ़ चल रही जंग के बीच पाकिस्तान पर लग रहे ये नए आरोप एक बार फिर यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या इस मुल्क ने वास्तव में आतंकवाद के खिलाफ़ कार्रवाई करने का इरादा बनाया है, या फिर दहशतगर्द तंजीमों को अब भी “स्ट्रेटेजिक एसेट” समझा जा रहा है। फिलहाल, इन रिपोर्ट्स ने पाकिस्तान की छवि को एक बार फिर कटघरे में ला खड़ा किया है और यह नैरेटिव मज़बूत किया है — “पाकिस्तान: आतंक की फैक्ट्री।”

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