ऑनलाइन गेमिंग के ज़रिए आतंक फैलाने की पाक साज़िश बेनकाब


पाकिस्तान से जुड़े दहशतगर्द गिरोह अब सिर्फ बंदूक और बारूद तक महदूद नहीं रहे, बल्कि डिजिटल दुनिया को भी अपने नापाक मकासिद के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। भारतीय एजेंसियों की ताजा तहकीकात में ये संगीन खुलासा हुआ है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, वर्चुअल करेंसी और एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स को आतंक फैलाने, नौजवानों को बहकाने और गैर-कानूनी फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

तहकीकात के मुताबिक पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स, जो ISIS और AQIS जैसे खतरनाक दहशतगर्द तंजीमों से जुड़े बताए जा रहे हैं, ऑनलाइन गेम्स के जरिए हिंदुस्तान समेत कई मुल्कों के युवाओं तक पहुंच बना रहे हैं। ये लोग गेमिंग चैट, प्राइवेट सर्वर और डिजिटल टोकन्स का इस्तेमाल कर कट्टरपंथी प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। एजेंसियों का कहना है कि गेम खेलने वाले कम उम्र नौजवानों को पहले दोस्ती और इनाम का लालच दिया जाता है, फिर धीरे-धीरे उन्हें जहरीली सोच की तरफ धकेला जाता है।

सिक्योरिटी एजेंसियों ने पाया कि कई गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर वर्चुअल करेंसी और इन-गेम ट्रांजैक्शन को हवाला जैसे गैर-कानूनी नेटवर्क की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। दहशतगर्द नेटवर्क गेमिंग कॉइन्स खरीदने और बेचने के बहाने करोड़ों रुपये इधर से उधर पहुंचा रहे हैं ताकि किसी को शक न हो। डिजिटल वॉलेट्स, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग चैनलों के जरिए ये रकम आतंकवादी गतिविधियों तक पहुंचाई जा रही थी।

भारतीय जांच एजेंसियों ने इस सिलसिले में कई संदिग्ध अकाउंट्स और ऑनलाइन नेटवर्क्स की पहचान की है। कुछ मामलों में ये भी सामने आया कि पाकिस्तान से ऑपरेट होने वाले हैंडलर्स गेमिंग कम्युनिटीज में घुसकर युवाओं को “जुल्म के खिलाफ जंग” और “मजहबी फर्ज़” जैसे नारों से प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। नौजवानों को पहले भावनात्मक वीडियो और कट्टरपंथी मैसेज भेजे जाते, फिर उन्हें अलग-अलग गुप्त चैट ग्रुप्स में शामिल किया जाता था।

एजेंसियों का कहना है कि यह पूरी रणनीति “डिजिटल जिहाद” का नया चेहरा है, जहां बंदूक की जगह मोबाइल फोन और गेमिंग ऐप्स को हथियार बनाया जा रहा है। पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर ऐसी जंग छेड़ना चाहते हैं, जिसमें बिना सीमा पार किए दिमागों को निशाना बनाया जा सके। खास तौर पर किशोर और युवा वर्ग को टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वे ऑनलाइन गेमिंग में ज्यादा वक्त गुजारते हैं।

तहकीकात में ये भी सामने आया कि कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन छोटे-छोटे भुगतान के रूप में किए गए ताकि एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। गेमिंग गिफ्ट कार्ड, डिजिटल स्किन्स और वर्चुअल आइटम्स की खरीद-बिक्री के जरिए रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। बाद में यही पैसा कट्टरपंथी नेटवर्क और आतंकी मॉड्यूल्स तक पहुंचाया गया।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे अरसे से प्रॉक्सी वार और साइबर प्रोपेगेंडा का सहारा लेता आया है, लेकिन अब गेमिंग प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल एक नई और खतरनाक चाल के तौर पर सामने आया है। इससे ना सिर्फ आतंकवाद को आर्थिक मदद मिलती है, बल्कि युवाओं के दिमाग में नफरत और कट्टरपंथ भी भरा जा रहा है।

भारतीय एजेंसियों ने लोगों, खासकर वालदैन और नौजवानों से अपील की है कि ऑनलाइन गेमिंग के दौरान अजनबी लोगों से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध लिंक, चैट ग्रुप या फंड ट्रांसफर की जानकारी तुरंत साइबर सेल और सुरक्षा एजेंसियों को दी जाए। सरकार भी अब गेमिंग प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल पेमेंट नेटवर्क्स पर निगरानी मजबूत करने की तैयारी में है ताकि दहशतगर्दों के इस नए डिजिटल नेटवर्क को वक्त रहते तोड़ा जा सके।

माहिरीन का कहना है कि यह सिर्फ साइबर क्राइम का मामला नहीं, बल्कि मुल्क की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर खतरा है। पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क जिस तरह गेमिंग दुनिया को हथियार बना रहे हैं, वह आने वाले वक्त में पूरी दुनिया के लिए बड़ा चैलेंज साबित हो सकता है। हिंदुस्तानी एजेंसियां इस डिजिटल साजिश को बेनकाब करने और युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

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