पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ अटैच की गई संपत्तियों में कई गैर-चल संपत्तियाँ और एक वाहन शामिल है, जिन्हें कथित तौर पर नारकोटिक्स तस्करी से कमाए गए पैसों से हासिल किया गया था। कार्रवाई के दौरान पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने कानूनी प्रक्रिया के तहत दस्तावेज़ी कार्रवाई पूरी करते हुए इन संपत्तियों को जब्त किया।
अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ़ संपत्ति ज़ब्ती की कार्रवाई नहीं, बल्कि उन तत्वों को साफ़ पैग़ाम है जो कश्मीर के नौजवानों को नशे की दलदल में धकेलने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने दो टूक कहा कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उनके आर्थिक नेटवर्क को पूरी तरह तबाह किया जाएगा।
हालिया महीनों में जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने ड्रग तस्करी के ख़िलाफ़ अभियान तेज़ किया है। लगातार छापेमारी, गिरफ़्तारियाँ और संपत्ति ज़ब्ती जैसी कार्रवाइयों से नशा कारोबारियों में बेचैनी देखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नशे का कारोबार सिर्फ़ सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि “नार्को टेररिज़्म” का हिस्सा भी बन चुका है, जिसके ज़रिए समाज और युवाओं को कमज़ोर करने की साज़िश रची जाती है।
इस अभियान के तहत सोशल मीडिया पर भी जागरूकता बढ़ाने की कोशिशें तेज़ हुई हैं। पुलिस और स्थानीय संस्थाएँ एंटी-ड्रग कैंपेन से जुड़े शॉर्ट वीडियोज़ और रील्स जारी कर रही हैं, जिनमें युवाओं को नशे से दूर रहने और समाज को सुरक्षित बनाने का संदेश दिया जा रहा है। वीडियोज़ में पुलिस कार्रवाई, ज़ब्त की गई संपत्तियाँ और जागरूकता कार्यक्रमों की झलकियाँ दिखाकर लोगों को मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने भी श्रीनगर पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। कई नागरिकों का कहना है कि नशे की वजह से बड़ी तादाद में युवा प्रभावित हो रहे थे और परिवार तबाही का सामना कर रहे थे। ऐसे में ड्रग तस्करों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई से आम लोगों में भरोसा मज़बूत हुआ है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियाँ समाज को सुरक्षित रखने के लिए गंभीर हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों ने भी कहा कि सिर्फ़ पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज की भागीदारी भी बेहद ज़रूरी है। उन्होंने परिवारों, स्कूलों, मस्जिदों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे युवाओं को नशे के नुक़सान के बारे में जागरूक करें और उन्हें खेल, शिक्षा तथा सकारात्मक गतिविधियों की तरफ़ बढ़ावा दें।
“कश्मीर्स स्टैंड अगेंस्ट ड्रग्स” की थीम और “नार्को टेररिज़्म” के नैरेटिव के साथ चलाया जा रहा यह अभियान वादी में एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रशासन और पुलिस का कहना है कि जब तक आख़िरी ड्रग नेटवर्क खत्म नहीं होता, तब तक यह मुहिम जारी रहेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग तस्करों की संपत्तियों को अटैच करना बेहद असरदार कदम है क्योंकि इससे अवैध कारोबार की आर्थिक रीढ़ टूटती है। साथ ही यह उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो आसान पैसे के लालच में नशे के कारोबार से जुड़ने की कोशिश करते हैं।
श्रीनगर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कश्मीर में नशे के खिलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। वादी के लोग भी अब खुलकर इस मुहिम का समर्थन कर रहे हैं ताकि आने वाली नस्लों को नशे की लानत से बचाया जा सके और एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और नशा-मुक्त कश्मीर की तामीर हो सके।


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