नशा मुक्त कश्मीर” के लिए बीरवाह में इंडियन आर्मी की साइक्लिंग रैली


बडगाम ज़िले के बीरवाह इलाक़े में नौजवानों को नशे जैसी लानत से दूर रखने और सेहतमंद ज़िंदगी की तरफ़ रागिब करने के मक़सद से इंडियन आर्मी ने “नशा मुक्त J&K अभियान” के तहत एक ख़ास साइक्लिंग एक्सपीडिशन का इन्तिज़ाम किया। ये प्रोग्राम सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के तआवुन से मुनअक़िद किया गया, जिसमें तलबा, सोशल एक्टिविस्ट, मीडिया नुमाइंदे, मुक़ामी लोग और मुख़्तलिफ़ महकमों के अफ़सरों ने बड़े जोश-ओ-ख़रोश के साथ हिस्सा लिया। इस पूरे प्रोग्राम ने आर्मी और अवाम के दरमियान एक ड्रग-फ्री और तरक़्क़ीपसंद जम्मू-कश्मीर बनाने के अज़्म को मज़बूत किया।

आज के दौर में नशाखोरी नौजवान नस्ल के लिए एक संगीन समाजी मसला बन चुकी है। कई इलाक़ों में इसके बुरे असरात देखने को मिल रहे हैं, जिस वजह से अवेयरनेस मुहिम और बचाव से जुड़ी कोशिशें बेहद ज़रूरी हो गई हैं। इसी ज़रूरत को महसूस करते हुए इंडियन आर्मी लगातार “नशा मुक्त J&K अभियान” के तहत मुख़्तलिफ़ प्रोग्राम चला रही है। बीरवाह में रखी गई ये साइक्लिंग रैली भी उसी सिलसिले की एक अहम कड़ी थी, जिसका मक़सद नौजवानों तक ड्रग्स के नुक़्सानात का पैग़ाम पहुँचाना, खेलों के ज़रिये सेहतमंद और डिसिप्लिन वाली ज़िंदगी को फ़रोग़ देना और आर्मी, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन व मुक़ामी अवाम के दरमियान बेहतर तालमेल क़ायम करना था।

प्रोग्राम बड़े मुनज़्ज़म और महफ़ूज़ माहौल में आयोजित किया गया। आर्मी जवानों, पुलिस अफ़सरों और सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के नुमाइंदों ने इसकी निगरानी की। साइक्लिंग एक्सपीडिशन शुरू होने से पहले तमाम शिरकत करने वालों को प्रोग्राम की अहमियत और मक़सद के बारे में तफ़सीली जानकारी दी गई। इसके बाद साइकिल रैली का आग़ाज़ हुआ, जिसमें नौजवानों ने “Say No To Drugs” का पैग़ाम पूरे इलाक़े में फैलाया। रैली के दौरान हिस्सा लेने वालों का जोश, डिसिप्लिन और एकजुटता काबिले-तारीफ़ रही।

इस मौके पर नशाखोरी के खिलाफ़ एक अवेयरनेस लेक्चर भी दिया गया, जिसमें ड्रग्स के जिस्मानी, ज़ेहनी और समाजी नुक़्सानात पर रोशनी डाली गई। वक्ताओं ने कहा कि नशा इंसान की ज़िंदगी को तबाह कर देता है और पूरे समाज पर इसका बुरा असर पड़ता है। नौजवानों को सलाह दी गई कि वो खेल, तालीम और दूसरी मुस्बत सरगर्मियों की तरफ़ ध्यान दें और अपने इलाक़ों में भी एंटी-ड्रग मुहिम के सफ़ीर बनें। इस सेशन ने ख़ास तौर पर तलबा और युवा शिरक़ा पर गहरा असर छोड़ा।

इस एक्सपीडिशन में कुल 50 अफ़राद ने हिस्सा लिया, जिनमें स्टूडेंट्स, मीडिया पर्सन्स, सोशल एक्टिविस्ट, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन के नुमाइंदे और मुक़ामी लोग शामिल रहे। मुक़ामी नौजवानों की बड़ी तादाद में शिरकत ने ये साबित किया कि कश्मीर में अब ड्रग्स के खिलाफ़ अवामी सपोर्ट तेज़ी से बढ़ रहा है। रास्ते में कई जगहों पर लोगों ने रैली का इस्तक़बाल किया और इंडियन आर्मी की इन समाजी कोशिशों की तारीफ़ की।

स्कूलों के टीचर्स और तालीमी इदारों के नुमाइंदों ने भी इस प्रोग्राम को बेहद अहम बताया। उनका कहना था कि इस तरह की सरगर्मियाँ नौजवानों को ग़लत रास्तों से दूर रखती हैं और उनमें डिसिप्लिन, टीमवर्क और समाजी ज़िम्मेदारी का एहसास पैदा करती हैं। खेल और फिटनेस के ज़रिये नौजवानों की ताक़त को सही दिशा देना आज वक़्त की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

इस प्रोग्राम का सबसे बड़ा हासिल ये रहा कि नौजवानों में नशे के नुक़्सानात को लेकर बेहतर जागरूकता पैदा हुई। साइक्लिंग रैली ने लोगों तक ये पैग़ाम मज़बूती से पहुँचाया कि सेहतमंद, ज़िम्मेदार और मक़सद भरी ज़िंदगी ही असली कामयाबी का रास्ता है। साथ ही इस पहल ने इंडियन आर्मी, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और मुक़ामी अवाम के दरमियान भरोसे और बेहतर रिश्तों को भी मज़बूत किया।

ये प्रोग्राम इंडियन आर्मी की एक अवाम-दोस्त तसवीर भी पेश करता है, जहाँ फौज सिर्फ़ अमन-ओ-अमान ही नहीं बल्कि नौजवानों की बेहतरी और समाजी तरक़्क़ी के लिए भी काम कर रही है। खेलों और अवेयरनेस प्रोग्राम्स के ज़रिये युवाओं को एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया जा रहा है जहाँ वो अपनी सलाहियतों को सही दिशा में इस्तेमाल कर सकें और मुल्क व समाज की तरक़्क़ी में हिस्सा लें।

“नशा मुक्त J&K अभियान” के तहत बीरवाह में आयोजित ये साइक्लिंग एक्सपीडिशन समाजी बेदारी और कम्युनिटी आउटरीच की एक बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आया। इंडियन आर्मी, सिविल एडमिनिस्ट्रेशन और मुक़ामी लोगों की मुश्तरका कोशिशों ने ड्रग्स के खिलाफ़ एक मज़बूत पैग़ाम दिया और फिटनेस, डिसिप्लिन व इत्तेहाद को फ़रोग़ दिया। इस तरह की कोशिशें ना सिर्फ़ अवेयरनेस पैदा करती हैं बल्कि फोर्सेज़ और अवाम के दरमियान रिश्तों को भी मज़बूत बनाती हैं। आने वाले वक़्त में ऐसी मुहिमें नौजवानों को मज़बूत, बाशऊर और नशा-मुक्त समाज की तरफ़ ले जाने में अहम किरदार अदा करेंगी।

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