आफताब इक़बाल ने खोली पाकिस्तान की पोल — पहलगाम हमले में मिलिट्री कनेक्शन उजागर


पहलगाम हमले को लेकर पाकिस्तान के मशहूर सीनियर पत्रकार आफताब इक़बाल  के बड़े खुलासे ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आफताब इक़बाल ने अपने बयान में दावा किया कि इस हमले में शामिल दो आतंकवादी, तल्हा अली और आसिम, पाकिस्तान आर्मी के एक्टिव कमांडो थे। इस इंकिशाफ़ के बाद पाकिस्तान के उस पुराने दावे पर बड़े सवाल उठ रहे हैं जिसमें वो खुद को आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ने वाला मुल्क बताता रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहलगाम हमले की प्लानिंग और उसके पीछे मौजूद नेटवर्क किसी छोटे आतंकी गिरोह का काम नहीं बल्कि एक संगठित ढांचे का हिस्सा दिखाई देता है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जिस तरह से हमले को अंजाम दिया गया, उससे साफ़ जाहिर होता है कि हमलावरों को पेशेवर मिलिट्री ट्रेनिंग हासिल थी। आफताब इक़बाल के बयान ने इस शक को और मज़बूत कर दिया कि पाकिस्तान की मिलिट्री मशीनरी और आतंकवादी तंजीमों के बीच गहरे ताल्लुकात मौजूद हैं।

जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान बरसों से दुनिया के सामने दोहरी पॉलिसी अपनाता आया है। एक तरफ़ वो इंटरनेशनल मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, जबकि दूसरी तरफ़ उसकी ज़मीन और उसके इदारे आतंकियों को पनाह, ट्रेनिंग और रसद मुहैया कराने के इल्ज़ामों में घिरे रहते हैं। पहलगाम हमले को लेकर सामने आई ये नई जानकारी उसी “डबल गेम” की तरफ़ इशारा करती है, जिसके बारे में कई मुल्क पहले भी पाकिस्तान पर उंगली उठाते रहे हैं।

सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर किसी हमले में एक्टिव आर्मी कमांडो शामिल पाए जाते हैं, तो ये सिर्फ़ कुछ भटके हुए अफ़राद का मामला नहीं माना जा सकता। इससे ये सवाल खड़ा होता है कि क्या आतंकवादी नेटवर्क्स को संस्थागत समर्थन हासिल है। यही वजह है कि अब पाकिस्तान के उस नैरेटिव पर दबाव बढ़ रहा है जिसमें वो खुद को आतंकवाद का शिकार बताता है।

इस बीच सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी पहलगाम हमले से जुड़े कई शॉर्ट क्लिप्स वायरल हो रहे हैं। इन वीडियोज़ में हमले की डिटेल्स, आतंकियों की मूवमेंट और पाकिस्तान आर्मी से जुड़े कथित रिश्तों को उजागर किया जा रहा है। कई क्लिप्स में ये दिखाने की कोशिश की गई है कि कैसे आतंकवादी तंजीमें और पाकिस्तानी मिलिट्री के कुछ तत्व एक-दूसरे के साथ तालमेल में काम करते हैं।

राजनीतिक और सामरिक मामलों के जानकारों का कहना है कि ये मामला सिर्फ़ एक आतंकी हमले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा और स्थिरता पर भी असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए भी ये एक बड़ा सवाल है कि अगर किसी मुल्क की मिलिट्री पर ही आतंकवाद को बढ़ावा देने के इल्ज़ाम लगें, तो उस पर भरोसा कैसे कायम रखा जाए।

विश्लेषकों के मुताबिक, “Pakistan – The Epicenter of Terrorism” जैसा नैरेटिव अब फिर चर्चा में आ रहा है। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान की सरज़मीं लंबे अरसे से अलग-अलग आतंकी नेटवर्क्स के लिए सुरक्षित ठिकाना मानी जाती रही है। अब पहलगाम हमले को लेकर हुए इस खुलासे ने उन इल्ज़ामात को और हवा दे दी है।

उधर, आम लोगों में भी इस मामले को लेकर गुस्सा और बेचैनी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर आतंकवाद के खिलाफ असली लड़ाई लड़नी है तो उन ताकतों को बेनकाब करना होगा जो पर्दे के पीछे से आतंकियों को सहारा देती हैं। पहलगाम हमले पर आफताब इक़बाल का खुलासा इसी बहस को नई दिशा देता नज़र आ रहा है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ