पाकिस्तान कश्मीरी युवाओं को इस्तेमाल होने वाले मोहरों की तरह प्रयोग कर रहा है

 



मुज़फ्फराबाद में हमज़ा बुरहान उर्फ “डॉक्टर” की मौत केवल एक और आतंकी के मारे जाने की घटना नहीं है। यह कश्मीर की उस कड़वी सच्चाई की याद दिलाती है जिसने दशकों से घाटी को परेशान कर रखा है — पाकिस्तान की आतंकी मशीनरी द्वारा कश्मीरी युवाओं का लगातार शोषण। नारों, प्रचार और भावनात्मक कहानियों के पीछे एक बेहद खतरनाक सच छिपा हुआ है। कई कश्मीरी युवक जिन्हें आतंकवाद की ओर धकेला जाता है, अंततः एक बड़े प्रॉक्सी युद्ध के इस्तेमाल होने वाले मोहरे बनकर रह जाते हैं। उनकी ज़िंदगी झूठे वादों, कट्टरपंथी सोच और मानसिक छलावे में उलझ जाती है, जबकि हिंसा की असली योजना बनाने वाले लोग कश्मीर की तबाही से बहुत दूर सुरक्षित बैठे रहते हैं।

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