
पोस्ट में एक अकाउंट ने भारतीय एजेंसियों और पुलिस को टैग करते हुए लिखा कि “कुछ लोग पाकिस्तान फौज के फंडेड आर्टिकल्स और नैरेटिव को प्रमोट कर रहे हैं।” साथ ही पाकिस्तानी लेखक आकीब शाह का नाम भी लिया गया, जिनके बारे में दावा किया गया कि उनका ताल्लुक पाकिस्तान की फौजी लॉबी से है। हालांकि इन इल्ज़ामात की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के सामने आने के बाद लोगों के बीच गरमागरम बहस शुरू हो गई। कुछ यूज़र्स का कहना है कि डिजिटल दौर में “इन्फॉर्मेशन वॉर” यानी जानकारी और प्रचार की जंग असली जंग से भी ज्यादा खतरनाक बन चुकी है। वहीं कुछ लोगों ने इसे महज़ ऑनलाइन प्रोपेगेंडा करार दिया।
दिल्ली के एक सियासी तजज़िया निगार ने कहा, “आजकल लड़ाई सिर्फ सरहद पर नहीं होती जनाब, सोशल मीडिया भी एक बड़ा मैदान बन चुका है। कोई भी नैरेटिव वायरल करके लोगों के ज़ेहन पर असर डालने की कोशिश की जाती है।”
वायरल पोस्ट में यह भी कहा गया कि कुछ लेख और पोस्ट भारतीय फौज के खिलाफ माहौल बनाने के लिए शेयर किए जा रहे हैं। इसको लेकर कई राष्ट्रवादी सोशल मीडिया अकाउंट्स ने सख़्त प्रतिक्रिया दी और जांच की मांग की। दूसरी तरफ कुछ पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स ने कहा कि बिना सबूत किसी को विदेशी एजेंट या फंडेड कहना सही नहीं और इससे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर असर पड़ सकता है।
डिजिटल सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ सोशल मीडिया का इस्तेमाल नैरेटिव बनाने और लोगों की राय प्रभावित करने के लिए किया जाता रहा है। खासकर कश्मीर से जुड़ी खबरें और पोस्ट जल्दी वायरल हो जाती हैं क्योंकि यह मसला दोनों मुल्कों में बेहद जज़्बाती माना जाता है।
एक रिटायर्ड प्रोफेसर ने कहा, “पहले जंग बंदूक से होती थी, अब मोबाइल स्क्रीन से हो रही है। नौजवान जो कुछ ऑनलाइन पढ़ता है, वही उसकी सोच बना देता है। इसलिए हर खबर को बिना तहक़ीक़ शेयर करना खतरनाक हो सकता है।”
पोस्ट में जिन पाकिस्तानी लेखक का जिक्र हुआ, उनका नाम पहले भी दक्षिण एशिया की राजनीति और सिविल-मिलिट्री रिलेशन पर लिखे गए लेखों को लेकर चर्चा में रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों के बारे में अभी तक किसी सरकारी एजेंसी ने खुलकर कोई बयान नहीं दिया है।
सोशल मीडिया यूज़र्स का एक बड़ा तबका यह भी कह रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से मौजूद तनाव में इस तरह की ऑनलाइन लड़ाइयां और नफरत हालात को और खराब कर सकती हैं। कई लोगों ने अपील की कि बिना वेरिफिकेशन किसी पोस्ट को सच मानकर शेयर न किया जाए।
कश्मीर के एक बुज़ुर्ग ने कहा, “हमने बहुत अफवाहें देखीं बेटा। यहां एक छोटी सी खबर भी आग की तरह फैलती है। लोगों को चाहिए पहले सच जानें, फिर राय बनाएं।”
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। कुछ लोग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बता रहे हैं, जबकि दूसरे इसे डिजिटल प्रोपेगेंडा और ऑनलाइन राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं। मगर एक बात साफ दिखाई देती है — आज के दौर में सोशल मीडिया सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह सियासत, नैरेटिव और लोगों की सोच को प्रभावित करने का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।

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