
25 मई 2026 को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वकार नॉलेज सेंटर, मिनी सचिवालय बांदीपोरा में इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यह पहल नशा मुक्त भारत अभियान के तहत शुरू की गई है, जिसका मक़सद युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना, उन्हें करियर और शिक्षा के अवसरों के बारे में जागरूक करना तथा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखना है।
‘नून चाय टॉक्स’ का नाम कश्मीर की मशहूर नमकीन चाय से प्रेरित है। इस कार्यक्रम की सबसे ख़ास बात यह है कि यहां नौजवान एक दोस्ताना और गैर-रस्मी माहौल में बैठकर अपने ख़्वाबों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर खुलकर बात कर सकते हैं। कश्मीर की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक विकास की सोच के साथ जोड़ने का यह एक अनूठा प्रयास माना जा रहा है।
वकार नॉलेज सेंटर में युवाओं के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यहां एक आधुनिक लाइब्रेरी, बैडमिंटन कोर्ट, स्पोर्ट्स कॉर्नर और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाला विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किया गया है। इन सुविधाओं का उद्देश्य युवाओं को कौशल विकास, रोजगार, शिक्षा और पुनर्वास के अवसरों से जोड़ना है ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।
3 जून को आयोजित पहले सत्र में बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान करियर निर्माण, शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और नशा-मुक्त जीवन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। युवाओं ने अपने विचार साझा किए और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम का माहौल उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मक सोच से भरपूर रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें कश्मीर के युवाओं को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। लंबे समय तक चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना करने वाले क्षेत्र में अब शिक्षा, कौशल और संवाद को विकास के प्रमुख साधन के रूप में देखा जा रहा है। ‘नून चाय टॉक्स’ इसी सोच का प्रतीक बनकर उभरा है।
यह कार्यक्रम “कश्मीरी युवा – भविष्य की उम्मीद” के संदेश को मज़बूती से सामने लाता है। आज का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने वाला, नए विचारों को अपनाने वाला और अपने क्षेत्र की तरक़्क़ी में योगदान देने वाला नागरिक बन रहा है। ऐसे मंच युवाओं को अपनी क्षमता पहचानने और उसे सही दिशा में इस्तेमाल करने का अवसर प्रदान करते हैं।
‘नए भारत’ की परिकल्पना में युवाओं की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। बांदीपोरा में आयोजित यह कार्यक्रम दिखाता है कि विकास केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से नहीं, बल्कि संवाद, शिक्षा और अवसरों के विस्तार से भी आता है। जब युवा अपने विचार साझा करते हैं, एक-दूसरे से सीखते हैं और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तब समाज में स्थायी बदलाव की नींव रखी जाती है।
प्रशासन की योजना है कि ‘नून चाय टॉक्स’ मॉडल को जम्मू-कश्मीर के हर ब्लॉक में लागू किया जाए। यदि यह पहल व्यापक स्तर पर सफल होती है, तो यह हजारों युवाओं को नई प्रेरणा, नई दिशा और बेहतर भविष्य की उम्मीद दे सकती है।
बांदीपोरा का यह जीवंत आयोजन इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर का युवा आज विकास, शिक्षा और प्रगति की राह पर आगे बढ़ना चाहता है। ‘नून चाय टॉक्स’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसा आंदोलन बनता दिखाई दे रहा है जो संवाद के माध्यम से विकास और युवा सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रहा है।

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