सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट ने फिर छेड़ी कश्मीर और पाकिस्तान फौज पर बहस


श्रीनगर/इस्लामाबाद: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट खूब वायरल हो रही है, जिसमें पाकिस्तान के पूर्व आर्मी चीफ जनरल अशफ़ाक परवेज़ कयानी के हवाले से कई बड़े दावे किए गए हैं। इस पोस्ट में कहा गया है कि “भारतीय कश्मीर” से पाकिस्तान की दखलअंदाज़ी कम होने के बाद इलाके में अमन, सुकून और तरक़्क़ी देखने को मिली। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक तस्दीक़ नहीं हुई है, मगर इंटरनेट पर इस पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट में लिखा गया है कि पाकिस्तान की फौज और आईएसआई ने बीते दशकों में कश्मीर के नाम पर जंग, दहशतगर्दी और सियासी एजेंडा चलाया। साथ ही यह भी दावा किया गया कि जनरल कयानी ने यह माना था कि पाकिस्तान हिंदुस्तान के साथ जंग जीत नहीं सकता। पोस्ट में पूर्व पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा का भी ज़िक्र किया गया, जिनके बारे में कहा गया कि उन्होंने भी पाकिस्तान की आर्थिक और फौजी हालत को लेकर इसी तरह की बातें कहीं थीं।

कश्मीर में इस पोस्ट को लेकर मुख़्तलिफ़ राय सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पाकिस्तान की सियासत और फौज पर तंज़ मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे महज़ सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा बता रहे हैं। श्रीनगर के एक नौजवान ने कहा,
“जनाब, असल मसला ये है कि आम आदमी बस अमन चाहता है। चाहे हिंदुस्तान हो या पाकिस्तान, लड़ाई का नुक़सान हमेशा गरीब और नौजवान को उठाना पड़ता है।”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूज़र्स ने लिखा कि कश्मीर के लोगों को अब बंदूक और नारों से ज्यादा रोज़गार, तालीम और अमन चाहिए। वहीं कुछ पाकिस्तानी यूज़र्स ने इस पोस्ट को “फेक नैरेटिव” बताते हुए इसकी सख़्त मुख़ालफ़त की।

सियासी जानकारों का कहना है कि कश्मीर का मुद्दा हमेशा से पाकिस्तान और भारत के रिश्तों का सबसे नाज़ुक पहलू रहा है। पाकिस्तान की सियासत में फौज का असर किसी से छुपा नहीं, और अक्सर कश्मीर के मसले को अंदरूनी सियासत और अवाम का ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

एक कश्मीरी तजज़िया निगार ने कहा,“आज का नौजवान जंग नहीं, इंटरनेट, कारोबार और बेहतर ज़िंदगी चाहता है। लोग अब पुराने नारों से थक चुके हैं। अगर सरहदों पर सुकून रहेगा तो पूरा इलाका तरक़्क़ी करेगा।”

पोस्ट में यह भी लिखा गया कि पाकिस्तान की फौज आज भी “कश्मीर को आज़ाद कराने” का नारा इस्तेमाल करके अपने बजट और ताक़त को सही ठहराती है। इस बयान को लेकर पाकिस्तान में भी बहस तेज़ हो गई है। कुछ लोग मानते हैं कि मुल्क को अब जंग और टकराव की सियासत छोड़कर आर्थिक हालत सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर बात को सच मान लेना ठीक नहीं। कई बार बिना सबूत के दावे वायरल कर दिए जाते हैं, जिनका मक़सद लोगों के जज़्बात भड़काना होता है। इसलिए किसी भी पोस्ट को मानने से पहले उसकी तहक़ीक़ जरूरी है।

कश्मीर में रहने वाले कई लोगों का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ चैन और बेहतर मुस्तकबिल चाहिए। एक बुज़ुर्ग शख़्स ने कहा,
“बेटा, हमने बहुत खून-खराबा देखा। अब बस यही दुआ है कि हमारे बच्चे किताब पकड़ें, बंदूक नहीं।”

फिलहाल यह पोस्ट सोशल मीडिया पर लगातार शेयर की जा रही है और लोग अपने-अपने नज़रिए से इस पर बहस कर रहे हैं। मगर एक बात साफ़ है — चाहे सियासत कुछ भी कहे, आम इंसान हमेशा अमन, इज़्ज़त और बेहतर ज़िंदगी ही चाहता है। 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ