दाचीगाम मामले में फेक नैरेटिव के ज़रिए अवाम को गुमराह करने की कोशिश


श्रीनगर : दाचीगाम इलाके को लेकर पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स और प्रोपेगेंडा प्लेटफॉर्म्स की तरफ से एक नई झूठी और गुमराह कुन मुहिम चलायी जा रही है। इन प्लेटफॉर्म्स ने दावा किया है कि दाचीगाम में तैनात 50 आरआर यूनिट कथित तौर पर गैर-अखलाकी गतिविधियों, ब्लैकमेलिंग और फहाशी जैसे मामलों में शामिल है और यह सब हिंदुस्तानी फौज की सरपरस्ती में हो रहा है। साथ ही जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा के दफ्तर पर भी बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाकर इसे “प्रोपेगेंडा ऑपरेशन” का हिस्सा बताने की कोशिश की गई है।

मगर ज़मीनी हक़ीक़त और मौजूदा हालात को देखने पर साफ़ जाहिर होता है कि यह पूरा नैरेटिव एक सोची-समझी दुष्प्रचार मुहिम का हिस्सा है, जिसका मकसद घाटी में अवाम के बीच गलतफहमियां पैदा करना और हिंदुस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की साख को नुकसान पहुंचाना है। दाचीगाम, जो अपनी खूबसूरत वादियों, वाइल्डलाइफ सेंचुरी और अमन-पसंद माहौल के लिए जाना जाता है, उसे बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर झूठी कहानियां फैलायी जा रही हैं।

माहिरीन का कहना है कि पाकिस्तान समर्थित ऑनलाइन नेटवर्क्स पिछले कुछ महीनों से लगातार ऐसे मनगढ़ंत इल्ज़ामात फैला रहे हैं ताकि जम्मू-कश्मीर में बेहतर होती सुरक्षा और विकास की तस्वीर को धुंधला किया जा सके। सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस तरह के प्रोपेगेंडा का मकसद सिर्फ अवाम में डर और अविश्वास पैदा करना होता है। खास तौर पर फौज और प्रशासन को निशाना बनाकर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि घाटी में हालात खराब हैं, जबकि जमीनी स्तर पर पर्यटन, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार बेहतरी देखी जा रही है।

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही ऐसी खबरों का सच से कोई वास्ता नहीं होता। दाचीगाम और उसके आसपास रहने वाले कई लोगों ने इन दावों को पूरी तरह बेबुनियाद और अफवाह करार दिया है। उनका कहना है कि सुरक्षा बल इलाके में अमन-कायम रखने और अवाम की मदद के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान समर्थित तत्व बार-बार फेक नैरेटिव खड़ा कर माहौल खराब करने की कोशिश करते हैं।

सियासी जानकारों के मुताबिक, पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की दुष्प्रचार रणनीति नई नहीं है। पहले भी कई बार फर्जी वीडियो, एडिटेड तस्वीरें और मनगढ़ंत रिपोर्ट्स के जरिए भारतीय फौज और प्रशासन के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा चुकी है। मगर वक्त के साथ ऐसे दावों की सच्चाई सामने आती रही है।

जानकारों का मानना है कि डिजिटल दौर में “इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर” एक बड़ा हथियार बन चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अफवाहें तेजी से फैलायी जाती हैं ताकि लोगों के ज़ेहन में शक और नाराज़गी पैदा की जा सके। खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके को निशाना बनाकर पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क्स लगातार ऐसे नैरेटिव चलाते हैं, जिनका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना होता है।

इधर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी लोगों से अपील कर रही हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर दावे पर यकीन न करें और किसी भी खबर की तस्दीक आधिकारिक स्रोतों से जरूर करें। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी खबरें और अफवाहें समाज में अशांति फैलाने का जरिया बनती हैं और इनसे सतर्क रहने की जरूरत है।

दाचीगाम को लेकर फैलाया जा रहा यह नया नैरेटिव भी उसी सिलसिले की एक कड़ी माना जा रहा है, जिसमें झूठे इल्ज़ामों और मनगढ़ंत कहानियों के जरिए भारतीय सुरक्षा बलों और प्रशासन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। मगर घाटी में रहने वाले लोग अब ऐसे प्रोपेगेंडा को समझने लगे हैं और सोशल मीडिया पर फैलायी जाने वाली हर खबर को आंख बंद करके मानने के बजाय उसकी सच्चाई जांचने पर जोर दे रहे हैं। 

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