सीरत ने अपनी शुरुआती तालीम श्रीनगर के दिल्ली पब्लिक स्कूल से हासिल की। बचपन से ही वह पढ़ाई में काफी मेहनती और होशियार थीं। उनके टीचर और साथी हमेशा उनकी लगन और अनुशासन की तारीफ करते थे। उन्होंने हर कदम पर यह साबित किया कि अगर इंसान अपने मकसद के लिए ईमानदारी से मेहनत करे तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीरत ने देश के मशहूर संस्थान बिट्स पिलानी से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में बीटेक किया। बिट्स पिलानी में दाखिला हासिल करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है क्योंकि वहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन की जरूरत होती है। अपने कॉलेज के दिनों में सीरत ने सिर्फ तकनीकी जानकारी ही नहीं हासिल की बल्कि नेतृत्व और नई सोच को भी विकसित किया।
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सीरत ने दुबई में प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर लगभग तीन साल तक काम किया। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के कामकाज का अनुभव हासिल किया। उन्होंने बड़े प्रोजेक्ट संभाले टीमों के साथ काम किया और प्रोफेशनल दुनिया की चुनौतियों को करीब से समझा। दुबई में काम करने का अनुभव उनके आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को और मजबूत बनाने वाला साबित हुआ।
लेकिन सीरत का सपना इससे भी बड़ा था। वह दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में पढ़ना चाहती थीं। इसी मकसद के साथ उन्होंने जीमैट परीक्षा की तैयारी शुरू की। नौकरी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं होता लेकिन सीरत ने कभी हार नहीं मानी। दिन रात की मेहनत और लगातार कोशिशों के बाद उन्होंने शानदार जीमैट स्कोर हासिल किया।
इसके बाद उन्होंने दुनिया की कई नामी यूनिवर्सिटियों में आवेदन किया। उनकी प्रतिभा मेहनत और क्षमता को देखते हुए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें अपने प्रतिष्ठित एमबीए प्रोग्राम के लिए चुन लिया। हार्वर्ड में दाखिला मिलना किसी भी छात्र के लिए बहुत बड़ा सम्मान माना जाता है क्योंकि यहां दुनिया भर से चुनिंदा और बेहतरीन छात्र ही पहुंच पाते हैं।
सीरत की सफलता सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि पूरे कश्मीर के लिए गर्व का पल है। ऐसे समय में जब घाटी के कई युवा अलग अलग चुनौतियों का सामना कर रहे हैं सीरत की कहानी यह साबित करती है कि मेहनत और हौसले से हर सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने यह दिखा दिया कि छोटे शहरों और दूरदराज इलाकों से निकलकर भी दुनिया की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटियों तक पहुंचा जा सकता है।
उनकी यह उपलब्धि खास तौर पर कश्मीर की बेटियों के लिए बेहद प्रेरणादायक है। समाज में आज भी कई लड़कियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। सीरत ने यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी रुकावट इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी इस सफलता पर खुशी जाहिर कर रहे हैं। बांदीपोरा से लेकर पूरे कश्मीर तक लोग उन्हें मुबारकबाद दे रहे हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बता रहे हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोग भी मानते हैं कि सीरत की यह उपलब्धि घाटी के छात्रों में नई उम्मीद जगाएगी।
सीरत परवेज़ की कहानी मेहनत सब्र और आत्मविश्वास की कहानी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान खुद पर भरोसा रखे और लगातार मेहनत करता रहे तो दुनिया की कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। आज वह सिर्फ अपने परिवार का नहीं बल्कि पूरे कश्मीर का नाम रोशन कर रही हैं।
कश्मीर की इस बेटी का हार्वर्ड तक पहुंचना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी मिसाल बन चुका है जो युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का हौसला देता रहेगा।

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