जम्मू और कश्मीर में भारतीय सेना तथा सुरक्षा एजेंसियां पीर पंजाल क्षेत्र में पाकिस्तान से आतंकवादियों को बाहर निकालने के लिए 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' के नाम से जाना जाने वाला एक पूर्ण पैमाने पर ड्रिल कर रही हैं। यह ऑपरेशन 20 अप्रैल को पुंछ के भट्टा डुरियन क्षेत्र में सेना के एक वाहन पर हुए आतंकी हमले के बाद आया है। 5 मई को 22-24 मई को जी20 की बैठक के क्रम में राजौरी सेक्टर में केसरी हिल पर घात लगाकर हमला किया गया था।
पिछले दो महीनों में राजौरी-पुंछ क्षेत्र में हुए आतंकी हमलों में भारतीय सेना के 10 जवानों के शहीद होने के बाद यह कदम उठाया गया है।
भारतीय सेना ने उन दोनों मुठभेड़ों में पांच-पांच सैनिकों को खो दिया, जिनमें चार सैनिक पैराट्रूपर्स बटालियन के थे। घटना के बाद सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने घटनास्थल का दौरा किया तथा स्थिति का जायजा लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी घटनास्थल का दौरा किया तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों में शामिल सैनिकों का मनोबल बढ़ाया।
दोनों ऑपरेशन को लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था। हमले का मास्टरमाइंड कोटली स्थित हबीबुल्ला मलिक उर्फ साजिद जट्ट का मॉड्यूल था। वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का रहने वाला है। जट आतंकियों की भर्ती तथा ड्रोन की मदद से हथियार गिराने में शामिल रहा है। वह केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गैरकानूनी गतिविधियों अधिनियम के तहत एक नामित आतंकवादी है।उसने एक कश्मीरी मुस्लिम से शादी की है, जो पाकिस्तान चली गयी हैं। उनका बेटा हालांकि घाटी में रहता है। 2021 से अब तक उक्त क्षेत्र में 24 जवान शहीद हो चुके हैं। सेना ने इन हत्याओं का बदला लेने के लिए अब एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सेना को सुरक्षा एजेंसियों तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस से मदद मिलती है। 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में नागरिक हताहतों की संख्या को कम करना भी है।

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