बरामुल्ला की नीलोफर ने दुबई में लहराया कश्मीर का परचम, ‘नैनू’ को मिला रियल एस्टेट और लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर अवॉर्ड

 

जम्मू-कश्मीर के ज़िला बरामुल्ला से ताल्लुक रखने वाली नीलोफर, जिन्हें सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया में ‘नैनू’ के नाम से भी जाना जाता है, ने दुबई में अपनी कामयाबी का परचम बुलंद किया है। नीलोफर को दुबई में ‘रियल एस्टेट एंड लाइफस्टाइल इन्फ्लुएंसर ऑफ द ईयर’ के अवॉर्ड से नवाज़ा गया है। यह एज़ाज़ न सिर्फ उनकी निजी कामयाबी को दर्शाता है, बल्कि बरामुल्ला और पूरी कश्मीर वादी के लिए भी खुशी और फ़ख्र का मौक़ा बनकर सामने आया है।

नीलोफर दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी हुई हैं और इसके साथ ही डिजिटल क्रिएटर के तौर पर भी अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने अपने काम के ज़रिए रियल एस्टेट और लाइफस्टाइल से जुड़े कंटेंट को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेश किया है। दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय शहर में इस क्षेत्र में अपनी जगह बनाना उनके पेशेवर सफर की एक अहम कामयाबी मानी जा रही है।

अवॉर्ड मिलने के बाद नीलोफर ने इस एज़ाज़ को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए कहा कि उनके लिए यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उस जगह की नुमाइंदगी का भी मौक़ा है जहां से उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की। बरामुल्ला की सरज़मीन से निकलकर दुबई के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना उनके लिए एक ऐसा सफर है जिसमें कश्मीर की यादें और अपनी मिट्टी से जुड़ाव लगातार उनके साथ रहा है।

नीलोफर की कहानी इस लिहाज़ से भी अहम है कि आज कश्मीर के नौजवान अलग-अलग मुल्कों और शहरों में जाकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रहे हैं। कोई तालीम के मैदान में आगे बढ़ रहा है तो कोई कारोबार, टेक्नोलॉजी, खेल, कला और डिजिटल मीडिया में अपनी पहचान बना रहा है। नीलोफर की कामयाबी इसी बदलती तस्वीर की एक मिसाल के तौर पर देखी जा सकती है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी यह उपलब्धि कश्मीर के और ज़्यादा नौजवानों, खासकर लड़कियों, को अपने हुनर और काबिलियत पर भरोसा करने के लिए हौसला देगी। उनका मानना है कि अगर नौजवान अपने हुनर को सही दिशा दें और मेहनत के साथ आगे बढ़ें तो वे दुनिया के किसी भी हिस्से में अपनी जगह बना सकते हैं।

नीलोफर का यह सफर उन कश्मीरी युवाओं के लिए भी एक पैग़ाम रखता है जो वादी से बाहर निकलकर नए मौक़ों की तलाश में हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विदेश जाना या किसी बड़े शहर में काम करना सिर्फ रोज़गार हासिल करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि अपनी काबिलियत से एक अलग पहचान कायम करना भी मक़सद होना चाहिए।

बरामुल्ला की इस बेटी को दुबई में मिला सम्मान यह बताता है कि कश्मीर की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी मेहनत, हुनर और पेशेवर काबिलियत के दम पर आगे बढ़ रही हैं। नीलोफर के लिए यह अवॉर्ड उनके सफर की एक अहम मंज़िल है, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी जगाता है कि वादी के कई और नौजवान आने वाले वक्त में दुनिया के अलग-अलग मंचों पर अपनी पहचान बनाएंगे।

कश्मीर से दूर रहते हुए भी अपनी जड़ों को याद रखना और अपनी पहचान को साथ लेकर आगे बढ़ना नीलोफर की कहानी का खास पहलू है। बरामुल्ला से दुबई तक का उनका सफर इस बात की तस्वीर पेश करता है कि अगर हौसला, हुनर और मेहनत साथ हों तो कश्मीरी नौजवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बना सकते हैं।

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