पहली बार जम्मू-कश्मीर में इतने बड़े पैमाने पर आयोजित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया। महोत्सव के लिए दुनिया के 92 देशों से करीब 1,100 फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुईं, जिनमें से 40 से अधिक देशों की 135 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। यह आंकड़ा इस बात की गवाही देता है कि कश्मीर अब अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के लिए भी एक दिलचस्प और संभावनाओं से भरी जगह बन रहा है।
एसकेआईसीसी में आयोजित उद्घाटन समारोह के दौरान दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आई फिल्मों और फिल्मकारों ने कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक सिनेमा से जोड़ने का एक नया रास्ता खोला। महोत्सव में अलग-अलग देशों की फिल्मों की मौजूदगी से दर्शकों को विभिन्न समाजों, संस्कृतियों और मानवीय अनुभवों को बड़े पर्दे पर देखने और समझने का मौका मिलेगा।
कश्मीर की खूबसूरत वादियां लंबे अरसे से फिल्मकारों को अपनी तरफ खींचती रही हैं। यहां की बर्फ से ढकी पहाड़ियां, झीलें, हरे-भरे मैदान, पुराने शहर की गलियां और ग्रामीण जीवन सिनेमा के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं। मगर श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन इस रिश्ते को एक नए मुकाम तक ले जाता दिखाई दे रहा है। अब कश्मीर केवल फिल्मों की शूटिंग के लिए एक खूबसूरत लोकेशन ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के सिनेमा को एक मंच पर लाने वाली जगह के तौर पर भी अपनी पहचान बनाने की तरफ बढ़ रहा है।
महोत्सव में 92 देशों से प्राप्त फिल्मों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म बिरादरी की नजरें कश्मीर की ओर हैं। 135 फिल्मों का चयन और उनका विभिन्न कार्यक्रमों के तहत प्रदर्शन स्थानीय दर्शकों के लिए भी एक अहम सांस्कृतिक तजुर्बा होगा। इससे नौजवानों, विद्यार्थियों और सिनेमा में दिलचस्पी रखने वाले स्थानीय प्रतिभाशाली लोगों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बन रहे सिनेमा को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
श्रीनगर में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय आयोजन का एक बड़ा पहलू शहर की बदलती तस्वीर भी है। एक लंबे अरसे तक कश्मीर को अक्सर सिर्फ पर्यटन या संवेदनशीलता के संदर्भ में देखा जाता रहा है, लेकिन अब यहां सांस्कृतिक, शैक्षणिक, खेल और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। फिल्म महोत्सव इसी सिलसिले की एक अहम कड़ी माना जा सकता है।
उद्घाटन समारोह में लोगों की मौजूदगी और शहर में महोत्सव को लेकर पैदा हुआ माहौल यह बताता है कि श्रीनगर बड़े सांस्कृतिक आयोजनों की मेजबानी करने की क्षमता रखता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिनेमा जब कश्मीर की सरजमीं पर एक साथ पहुंचता है तो इससे शहर की सार्वजनिक जिंदगी, सांस्कृतिक गतिविधियों और पर्यटन की संभावनाओं को भी नई ऊर्जा मिल सकती है।
पर्यटन के लिहाज से भी इस आयोजन को अहम माना जा रहा है। दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले फिल्मकारों और सिनेमा से जुड़े प्रतिनिधियों को कश्मीर को करीब से देखने और यहां की संस्कृति, खान-पान, विरासत और प्राकृतिक खूबसूरती से रूबरू होने का मौका मिलेगा। ऐसे आयोजनों से अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के बीच कश्मीर की एक व्यापक और सकारात्मक तस्वीर पेश करने की गुंजाइश बढ़ती है।
खास तौर पर नौजवानों के लिए यह महोत्सव एक नया दरवाजा खोल सकता है। फिल्म निर्माण, निर्देशन, पटकथा लेखन, अभिनय, सिनेमैटोग्राफी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में रुचि रखने वाले युवाओं को अंतरराष्ट्रीय सिनेमा से सीखने और पेशेवर लोगों के साथ संवाद करने का मौका मिल सकता है। इससे घाटी में रचनात्मक उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद भी बढ़ती है।
कश्मीर की अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कहानी कहने की परंपरा रही है। लोक कथाओं, सूफियाना विरासत, संगीत और साहित्य में यहां की पहचान गहराई से बसी हुई है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव स्थानीय कहानियों को भी दुनिया तक पहुंचाने का एक जरिया बन सकता है। अगर स्थानीय फिल्मकारों और कलाकारों को इस मंच से जुड़ने के पर्याप्त मौके मिलते हैं तो आने वाले वक्त में कश्मीर से नई सिनेमाई आवाजें उभर सकती हैं।
श्रीनगर में पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आगाज महज एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। यह उस कश्मीर की तस्वीर भी पेश करता है जो दुनिया के सामने अपनी कला, संस्कृति, मेजबानी और रचनात्मक क्षमता के साथ खड़ा होना चाहता है। एसकेआईसीसी में दुनिया भर के सिनेमा का जुटना इस बात का पैगाम है कि कश्मीर अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों की मेजबानी के लिए तैयार है।


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