इस सिलसिले में श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लाबरू की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें खेलो इंडिया आंदोलन के तहत वर्ष 2026-31 के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तार से गौर किया गया। बैठक में खेलों के मौजूदा ढांचे, जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं की जरूरत और उभरते हुए खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा की गई।
प्रस्तावित पांच वर्षीय योजना में खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना एक प्रमुख प्राथमिकता के तौर पर सामने आया है। इसके तहत ऐसे इलाकों में खेल मैदान, प्रशिक्षण सुविधाएं और जरूरी खेल संसाधन विकसित करने पर जोर दिया जाएगा, जहां नौजवानों को मौजूदा समय में पर्याप्त सुविधाएं हासिल नहीं हैं। खास तौर पर ग्रामीण और कम सुविधा वाले क्षेत्रों को योजना में तवज्जो देने की बात कही गई है, ताकि खेलों का फायदा केवल शहरी इलाकों तक महदूद न रहे।
अधिकारियों का मानना है कि अगर जमीनी स्तर पर ही खिलाड़ियों को सही माहौल, प्रशिक्षण और जरूरी सुविधाएं मिलें तो जम्मू-कश्मीर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के और अधिक खिलाड़ी सामने आ सकते हैं। इसी सोच के तहत प्रस्तावित कार्ययोजना में प्रतिभा पहचान को भी अहम जगह दी गई है। कम उम्र में खेल प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के लिए उचित मंच उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
श्रीनगर जिले के लिए यह पांच वर्षीय खेल खाका इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राजधानी में बड़ी तादाद में युवा आबादी मौजूद है। स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों से निकलने वाले खिलाड़ियों को अगर शुरुआती दौर में ही प्रशिक्षित किया जाए तो उनमें प्रतिस्पर्धी खेलों के लिए जरूरी हुनर और आत्मविश्वास पैदा किया जा सकता है। इससे न केवल खिलाड़ियों की व्यक्तिगत कामयाबी का रास्ता खुलेगा, बल्कि जिले में खेल संस्कृति को भी मजबूती मिलेगी।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि खेल सुविधाओं का विकास केवल मैदान और इमारतें तैयार करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास, प्रशिक्षकों की उपलब्धता, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अपनी सलाहियत को परखने के लिए लगातार अवसर मिलना भी उतना ही जरूरी है। पांच वर्षीय योजना में इन पहलुओं को ध्यान में रखकर एक संगठित खेल व्यवस्था विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
कश्मीर के लिए इस पहल का व्यापक महत्व भी है। लंबे समय से खेलों को नौजवानों की सकारात्मक ऊर्जा को सही दिशा देने का एक अहम जरिया माना जाता रहा है। क्रिकेट, फुटबॉल, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स, ताइक्वांडो, बैडमिंटन और दूसरे खेलों में घाटी के नौजवानों ने अपनी काबिलियत का मुजाहिरा किया है। ऐसे में ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में बेहतर सुविधाओं का विस्तार नई प्रतिभाओं के लिए दरवाजे खोल सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर 2026-31 की प्रस्तावित कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारा जाता है तो श्रीनगर जिले में खेलों के लिए एक मजबूत और टिकाऊ पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो सकता है। इससे नौजवानों को फिटनेस, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की तरफ बढ़ने का मौका मिलेगा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए जिला स्तर से राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की राह भी आसान हो सकती है।
कुल मिलाकर, श्रीनगर का यह पांच वर्षीय खेल रोडमैप केवल बुनियादी ढांचे के विस्तार की योजना नहीं, बल्कि जिले के नौजवानों की सलाहियत को पहचानने और उन्हें बेहतर मुस्तकबिल की तरफ ले जाने की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यदि इस योजना को तय प्राथमिकताओं के मुताबिक अमल में लाया जाता है, तो आने वाले वर्षों में श्रीनगर जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर के खेल विकास का एक मजबूत केंद्र बन सकता है।


0 टिप्पणियाँ