PoJK में हालात पर दुनिया की नजर, यूरोप से ब्रिटेन तक उठ रही आवाज

 


श्रीनगर: पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में जारी अशांति और वहां के लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आवाज बुलंद होने लगी है। PoJK में कथित दमन, गिरफ्तारियों, इंटरनेट और जरूरी खाद्य सामान की पाबंदियों तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आरोपों को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में solidarity protests और मार्च का ऐलान किया गया है।

घोषित कार्यक्रमों के मुताबिक 12 अगस्त को ब्रुसेल्स में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस से संयुक्त राष्ट्र कार्यालय तक मार्च निकाला। 13 अगस्त को ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जाने की बात कही गई है। वहीं 21 अगस्त को जिनेवा में UN Human Rights Office के बाहर प्रदर्शन और 30 अगस्त को बर्मिंघम में Grand March प्रस्तावित है।

इन कार्यक्रमों का मकसद PoJK में आम लोगों की कथित मुश्किलों और मानवाधिकारों से जुड़े सवालों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना बताया गया है। आयोजकों की तरफ से arbitrary arrests, खाने-पीने की जरूरी चीजों तक पहुंच में रुकावट, इंटरनेट प्रतिबंध और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा जैसे आरोप सामने रखे जा रहे हैं।

PoJK में पिछले दो महीनों से ज्यादा समय से जारी बेचैनी ने इस मामले को एक लंबे खिंचने वाले अधिकार आंदोलन की शक्ल दे दी है। स्थानीय स्तर पर उठने वाली आवाज अब यूरोप और ब्रिटेन तक पहुंच रही है। Brussels, Geneva और Birmingham जैसे शहरों में प्रस्तावित कार्यक्रम यह संकेत देते हैं कि PoJK के हालात को लेकर diaspora communities और rights groups के बीच भी mobilisation बढ़ रही है।

इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू यह है कि इंटरनेट और संचार व्यवस्था पर पाबंदियों के आरोपों के बीच बाहर की दुनिया तक जानकारी पहुंचाने की कोशिशें भी तेज हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोगों को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और बुनियादी सुविधाओं की मांग करने का हक मिलना चाहिए।

PoJK का मुद्दा लंबे अरसे से राजनीतिक और संवैधानिक विवादों के बीच दबा रहा है, लेकिन मौजूदा unrest ने इसे एक बार फिर international attention में ला दिया है। विदेशों में होने वाले इन प्रदर्शनों के जरिए आयोजक पाकिस्तान पर दबाव बनाने और PoJK के लोगों की शिकायतों को global forums तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

हालांकि इन कार्यक्रमों के प्रभाव का आकलन आने वाले दिनों में ही हो सकेगा, लेकिन लगातार हो रही international mobilisation यह जरूर दिखाती है कि PoJK में हालात को लेकर चर्चा अब केवल स्थानीय दायरे तक सीमित नहीं रही है।

दो महीने से ज्यादा वक्त गुजरने के बावजूद अगर सड़क पर उठने वाली आवाज Brussels, London, Geneva और Birmingham तक सुनाई देने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि PoJK का rights movement अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।

अब निगाह इस बात पर होगी कि इन demonstrations के बाद international organisations और human rights forums इस मामले को किस तरह देखते हैं और पाकिस्तान के सामने PoJK में लोगों के अधिकारों तथा बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल किस हद तक उठाए जाते हैं।

 

 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ