श्रीनगर: कश्मीर की वादियों में एक बार फिर बल्ले और गेंद की टक्कर का शोर सुनाई देने वाला है। श्रीनगर के ऐतिहासिक शेर-ए-कश्मीर क्रिकेट स्टेडियम को 1 से 5 अक्टूबर तक होने वाले ईरानी कप 2026 की मेजबानी मिली है। इस मुकाबले में 2025-26 रणजी ट्रॉफी की चैंपियन जम्मू-कश्मीर की टीम का सामना रेस्ट ऑफ इंडिया से होगा। यह आयोजन घाटी में बड़े स्तर के क्रिकेट की वापसी का एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
इस मुकाबले की अहमियत इसलिए भी खास है क्योंकि यह कश्मीर में 1986 में हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया वनडे मुकाबले के बाद यहां आयोजित होने वाला सबसे बड़ा हाई-प्रोफाइल क्रिकेट मैच होगा। करीब चार दशक बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों और देश के शीर्ष घरेलू क्रिकेटरों की मौजूदगी श्रीनगर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होगी।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के लिए भी यह मुकाबला एक बड़ी उपलब्धि है। रणजी ट्रॉफी 2025-26 में शानदार प्रदर्शन कर खिताब जीतने वाली J&K टीम ने घरेलू क्रिकेट में अपनी बढ़ती ताकत का मुज़ाहिरा किया है। अब ईरानी कप में रेस्ट ऑफ इंडिया के सामने उतरकर टीम के पास अपनी काबिलियत को राष्ट्रीय मंच पर साबित करने का एक और बड़ा मौका होगा।
इस टीम में कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब नबी डार पर भी निगाहें रहेंगी। रणजी ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट हासिल करने वाले गेंदबाजों में शीर्ष पर रहने वाले औकिब ने अपनी रफ्तार और गेंदबाजी के हुनर से खास पहचान बनाई है। ईरानी कप जैसे बड़े मुकाबले में उनकी भूमिका J&K के लिए काफी अहम रह सकती है।
यह आयोजन सिर्फ एक क्रिकेट मैच नहीं, बल्कि बदलते कश्मीर की तस्वीर का भी एक हिस्सा है। लंबे अरसे बाद घाटी में इतने बड़े स्तर का क्रिकेट मुकाबला होना खेल के मैदान पर जम्मू-कश्मीर की बढ़ती पहचान को सामने लाता है। स्टेडियम में जुटने वाले हजारों दर्शक, स्थानीय नौजवानों में क्रिकेट को लेकर बढ़ता जुनून और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की मौजूदगी कश्मीर के खेल माहौल को नई रौनक देगी।
ईरानी कप की मेजबानी से श्रीनगर को देश के क्रिकेट नक्शे पर फिर एक बार प्रमुख जगह मिलने जा रही है। यह आयोजन घाटी में अमन, सामान्य हालात और तरक्की के उस माहौल को भी उजागर करता है, जहां खेल और युवा प्रतिभाएं आगे बढ़ने के नए रास्ते तलाश रही हैं।
1 से 5 अक्टूबर तक शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में होने वाला यह मुकाबला J&K क्रिकेट के लिए सिर्फ एक इम्तिहान नहीं होगा, बल्कि कश्मीर की खेली हुई पुरानी क्रिकेट विरासत को नई पीढ़ी के साथ जोड़ने वाला एक यादगार अध्याय भी साबित हो सकता है।

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