बलूचिस्तान में फिर खून-खराबा, सुराब में हवाई हमले के दावों से मचा हड़कंप

 


 पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सुराब जिले के गिदार इलाके में बीती रात पाकिस्तानी सैन्य लड़ाकू विमानों ने कथित तौर पर नागरिक आबादी वाले इलाकों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 27 लोगों के मारे जाने तथा कई अन्य के घायल होने का दावा किया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे इन दावों ने बलूचिस्तान में जारी सैन्य कार्रवाई और उसके मानवीय असर को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। हालांकि, हमलों में हुई मौतों और नुकसान के इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ऐसे में घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए आधिकारिक और स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि जरूरी है।

बलूचिस्तान लंबे समय से राजनीतिक असंतोष, अलगाववादी हिंसा और सुरक्षा अभियानों के बीच फंसा हुआ है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा प्रतिष्ठान अक्सर सैन्य कार्रवाई को आतंकवाद और सशस्त्र समूहों के खिलाफ जरूरी कदम बताते रहे हैं। दूसरी तरफ, बलूच अधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठनों की तरफ से सुरक्षा अभियानों के दौरान नागरिकों के कथित नुकसान, गिरफ्तारियों और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं।

गिदार में सामने आए ताजा आरोप इसी पुराने विवाद को फिर सामने लाते हैं। अगर नागरिक आबादी वाले इलाकों में हवाई ताकत का इस्तेमाल हुआ है और बड़ी संख्या में आम लोग प्रभावित हुए हैं, तो यह सैन्य अभियानों के दौरान proportionality और civilian protection जैसे बुनियादी सवालों को जन्म देता है।

बलूचिस्तान में हिंसा का दायरा सिर्फ हथियारबंद संगठनों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ तक सीमित नहीं रहता। जब किसी इलाके में सैन्य अभियान, जवाबी कार्रवाई और सशस्त्र हमले लगातार होते रहें, तो सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ता है। महिलाएं और बच्चे, जो किसी भी संघर्ष में सबसे कमजोर तबका होते हैं, हिंसा की कीमत चुकाने पर मजबूर हो जाते हैं।

मौजूदा घटनाक्रम पाकिस्तान के सामने एक बड़ा सवाल भी रखता है: आतंकवाद और विद्रोह से निपटने की रणनीति में आम नागरिकों की सुरक्षा को किस हद तक प्राथमिकता दी जा रही है?

बलूचिस्तान में स्थायी अमन केवल सैन्य ताकत के जरिए हासिल करना मुश्किल है। इसके लिए राजनीतिक संवाद, स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान, कानून का निष्पक्ष पालन और नागरिकों के बुनियादी अधिकारों की हिफाजत भी जरूरी है।

गिदार से सामने आए ये आरोप, अगर स्वतंत्र जांच में सही साबित होते हैं, तो पाकिस्तान के सुरक्षा अभियानों के मानवीय पहलू पर एक और गंभीर सवाल खड़ा करेंगे। फिलहाल, सबसे अहम जरूरत यही है कि घटना की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो और प्रभावित परिवारों को सच्चाई तथा इंसाफ मिले।

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