कश्मीर में NIA की बड़ी कार्रवाई, 5 जिलों में 10 ठिकानों पर छापेमारी; सीमा पार आतंकी साजिश की परतें खुलीं

 

जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से चल रही आतंकी साजिशों और उनके स्थानीय मददगारों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। NIA ने 22 अगस्त 2026 को श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम में एक साथ 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई पाकिस्तान में बैठे कथित आतंकी हैंडलरों और स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) के उस नेटवर्क की जांच का हिस्सा है, जिस पर घुसपैठ कर आए आतंकियों को लॉजिस्टिक और दूसरी तरह की मदद पहुंचाने रहे हैं।

NIA के मुताबिक यह मामला FIR नंबर 0024/2026 से शुरू हुआ, जो श्रीनगर के जकूरा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। बाद में NIA ने इसे RC-02/2026/NIA/JMU के तौर पर दोबारा दर्ज किया। मामले में UAPA अधिनियम 1967 की धारा 23, शस्त्र अधिनियम 1959 की धाराएं 7 और 25 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

जांच की शुरुआत 31 मार्च 2026 की देर रात एक नाका बिंदु पर हुई कार्रवाई से बताई गई है। NIA के अनुसार इस दौरान एक स्थानीय OGW को पकड़ा गया था। उसके कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड और जिंदा गोला-बारूद बरामद किया गया।

इसके बाद जांच एजेंसियों ने बरामद हथियारों के स्रोत, आरोपी के संपर्कों और उसके संभावित आतंकी नेटवर्क से रिश्तों को खंगालना शुरू किया। NIA के मुताबिक जांच आगे बढ़ने पर साजिश से कथित तौर पर जुड़े पाकिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया और स्थानीय सहायता नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान तथा उनकी कथित भूमिकाओं की जांच की गई।

NIA की अब तक की जांच में पाकिस्तान स्थित हैंडलरों और उनके कथित स्थानीय सहयोगियों के बीच लिंक सामने आए हैं। एजेंसी के अनुसार इन स्थानीय सहयोगियों का इस्तेमाल कथित तौर पर संचार, लॉजिस्टिक इंतजाम, आतंकियों की आवाजाही और उन्हें छिपाने, ठिकाना देने, इलाके की टोह लेने तथा दूसरी तरह की सहायता के लिए किया जाता था।

यानी जांच का दायरा केवल हथियारों की बरामदगी तक महदूद नहीं है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित नेटवर्क किस तरह काम करता था, कौन लोग आपस में संपर्क में थे और घुसपैठ करने वाले आतंकियों को स्थानीय स्तर पर किस तरह सहायता उपलब्ध कराई जाती थी।

NIA के मुताबिक जांच में वित्तीय लेन-देन के सुराग, संचार माध्यम, आरोपियों की आवाजाही तथा हथियारों और विस्फोटकों के स्रोत को भी खंगाला जा रहा है। मकसद पूरे सहायता नेटवर्क की संरचना और उसकी गतिविधियों की वास्तविक हद का पता लगाना है।

22 अगस्त को की गई तलाशी के दौरान हासिल किए गए नए सबूतों को पहले से मामले में जमा सामग्री के साथ जांच और पुष्टि की जा रही है। एजेंसी के मुताबिक इससे सीमा पार आतंकी साजिश और उसके कथित सहायता तंत्र को और स्पष्ट करने में मदद मिल रही है।

NIA ने कहा है कि यह तलाशी अभियान एक बड़ी सीमा पार आतंकी साजिश की लगातार जारी जांच का हिस्सा है। एजेंसी अब तक मिले सबूतों और बरामद सामग्री की जांच कर रही है। जांच के नतीजे के आधार पर आगे गिरफ्तारियां या अन्य बरामदगियां भी की जा रही हैं।

पांच जिलों में एक साथ हुई यह कार्रवाई इस बात की तरफ इशारा करती है कि जांच एजेंसियों का फोकस अब सिर्फ सक्रिय आतंकियों तक महदूद नहीं, बल्कि उनके कथित स्थानीय सहायता और लॉजिस्टिक नेटवर्क को भी उजागर करने पर है। NIA की कार्रवाई का मकसद ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उसे कानून के दायरे में लाना और सीमा पार से संचालित आतंकी साजिशों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए जाने वाले सहायता तंत्र को कमजोर करना है।

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